4 कुल पढ़कर दम करने का सहीह तरीक़ा – नज़र, डर और शैतानी वसवसों से हिफ़ाज़त की दुआ
चार कुल क्या हैं?
इस्लाम में चार कुल से मुराद क़ुरआन मजीद की चार सूरतें हैं, जिनकी शुरुआत अरबी लफ़्ज़ “क़ुल” (قُلْ) से होती है। ये सूरतें हैं –
- सूरह अल-काफ़िरून — 109
- सूरह अल-इख़लास — 112
- सूरह अल-फ़लक़ — 113
- सूरह अन-नास — 114

इन सूरतों में तौहीद, अल्लाह तआला की यकताई, इबादत में इख़लास और अल्लाह की पनाह माँगने की तालीम मिलती है।
मुसलमान इन सूरतों की तिलावत इबादत, दुआ और अल्लाह तआला से हिफ़ाज़त तलब करने के लिए करते हैं। ख़ास तौर पर सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास को पढ़कर हाथों पर दम करना और बदन पर हाथ फेरना नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत से साबित है।
चार कुल पढ़कर दम करने का सहीह तरीक़ा
सोने से पहले क़ुरआन की सूरतें पढ़कर हाथों पर हल्का दम करना और बदन पर हाथ फेरना सहीह हदीस से साबित अमल है।
दम करने का तरीक़ा-
- दोनों हथेलियों को मिलाकर सामने रखें।
- सूरह अल-काफ़िरून, सूरह अल-इख़लास, सूरह अल-फ़लक़ और सूरह अन-नास पढ़ें।
- पढ़ने के बाद हथेलियों पर हल्का फूँकें। इसे नफ़्थ कहा जाता है; इसमें हल्की फूँक होती है, थूकना मुराद नहीं।
- दोनों हाथों को सिर, चेहरे और बदन के उन हिस्सों पर फेरें जहाँ तक हाथ पहुँच सकें।
- यही अमल तीन बार करें।
सहीह हदीस का हवाला – उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम हर रात बिस्तर पर जाने के वक़्त अपने दोनों हाथ मिलाते, उनमें सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास पढ़कर दम करते और फिर जहाँ तक मुमकिन होता अपने बदन पर हाथ फेरते। आप रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ऐसा तीन बार करते थे।
हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 5017, किताब फ़ज़ाइलुल क़ुरआन। हदीस पढ़ें – https://sunnah.com/bukhari:5017
ज़रूरी वज़ाहत- इस हदीस में तीन सूरतों का ज़िक्र है, चारों कुल का नहीं। सूरह काफ़िरून को भी पढ़ना जायज़ है, लेकिन उसे इसी ख़ास दम के तरीक़े का लाज़िमी हिस्सा या तीन बार पढ़ने वाली सुन्नत का हिस्सा बताने के लिए अलग दलील चाहिए।
सूरह अल-काफ़िरून — Surah Al-Kafirun
क़ुरआन मजीद की सूरह नंबर – 109
आयतें – 6
मौज़ू – तौहीद और इबादत में साफ़ अक़ीदा।
अरबी टेक्स्ट
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ ١
لَا أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ٢
وَلَا أَنْتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ ٣
وَلَا أَنَا عَابِدٌ مَا عَبَدْتُمْ ٤
وَلَا أَنْتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ ٥
لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِيَ دِينِ ٦
हिंदी में तलफ़्फ़ुज़
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
क़ुल या अय्युहल काफ़िरून।
ला आ’बुदु मा ता’बुदून।
वला अन्तुम आबिदूना मा आ’बुद।
वला अना आबिदुम मा अबत्तुम।
वला अन्तुम आबिदूना मा आ’बुद।
लकुम दीनुकुम वलिय दीन।
Hinglish Transliteration
Bismillahir-Rahmanir-Raheem
Qul ya ayyuhal-kafirun.
La a’budu ma ta’budun.
Wa la antum ‘abiduna ma a’bud.
Wa la ana ‘abidum ma ‘abattum.
Wa la antum ‘abiduna ma a’bud.
Lakum deenukum wa liya deen.
हिंदी तर्जुमा
अल्लाह के नाम से शुरू, जो निहायत मेहरबान, बार-बार रहम फ़रमाने वाला है।
- कह दीजिए- ऐ इनकार करने वालो!
- मैं उनकी इबादत नहीं करता जिनकी तुम इबादत करते हो।
- और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी मैं इबादत करता हूँ।
- और न मैं उनकी इबादत करने वाला हूँ जिनकी तुमने इबादत की।
- और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी मैं इबादत करता हूँ।
- तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन है और मेरे लिए मेरा दीन।
English Translation
In the name of Allah, the Most Compassionate, the Most Merciful.
- Say, “O disbelievers!
- I do not worship what you worship.
- Nor are you worshippers of what I worship.
- Nor will I worship what you have worshipped.
- Nor will you be worshippers of what I worship.
- For you is your religion, and for me is my religion.”
हवाला – सूरह अल-काफ़िरून, क़ुरआन 109:1–6। अरबी टेक्स्ट और तिलावत – https://quran.com/109
सूरह अल-इख़लास — Surah Al-Ikhlas
क़ुरआन मजीद की सूरह नंबर – 112
आयतें – 4
मौज़ू – अल्लाह तआला की यकताई और तौहीद।
अरबी टेक्स्ट
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ١
اللَّهُ الصَّمَدُ ٢
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ٣
وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ ٤
हिंदी में तलफ़्फ़ुज़
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
क़ुल हुवल्लाहु अहद।
अल्लाहुस्समद।
लम यलिद व लम यूलद।
व लम यकुल्लहू कुफुवन अहद।
Hinglish Transliteration
Bismillahir-Rahmanir-Raheem
Qul huwallahu ahad.
Allahus-samad.
Lam yalid wa lam yulad.
Wa lam yakun lahu kufuwan ahad.
हिंदी तर्जुमा
अल्लाह के नाम से शुरू, जो निहायत मेहरबान, बार-बार रहम फ़रमाने वाला है।
- कह दीजिए – वह अल्लाह एक है।
- अल्लाह बेनियाज़ है, सारी मख़लूक़ उसकी मोहताज है।
- न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है।
- और कोई भी उसके बराबर नहीं।
English Translation
In the name of Allah, the Most Compassionate, the Most Merciful.
- Say, “He is Allah, the One.
- Allah, the Eternal Refuge.
- He neither begets nor is born.
- And there is none comparable to Him.”
सूरह इख़लास की फ़ज़ीलत
सूरह इख़लास में अल्लाह तआला की यकताई और बेनियाज़ी का बयान है। यह तौहीद का एक अहम बयान है।
सहीह बुख़ारी में एक सहाबी के बारे में रिवायत है कि वह सूरह इख़लास से ख़ास मोहब्बत रखते थे। नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फ़रमाया कि इस सूरह से उनकी मोहब्बत उन्हें जन्नत में दाख़िल करेगी।
हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 774। हदीस नंबरिंग के अलग-अलग नुस्ख़ों में फ़र्क़ हो सकता है।
सूरह इख़लास को दम के वक़्त पढ़ने का अमल भी सहीह बुख़ारी 5017 से साबित है।
अरबी टेक्स्ट और तिलावत – https://quran.com/112
सूरह अल-फ़लक़ — Surah Al-Falaq
क़ुरआन मजीद की सूरह नंबर – 113
आयतें – 5
मौज़ू – अल्लाह की पनाह माँगना और मख़लूक़ के शर से हिफ़ाज़त तलब करना।
अरबी टेक्स्ट
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ١
مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ ٢
وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ٣
وَمِنْ شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ ٤
وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ٥
हिंदी में तलफ़्फ़ुज़
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक़।
मिन शर्रि मा ख़लक़।
व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब।
व मिन शर्रिन्नफ़्फ़ासाति फ़िल उक़द।
व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद।
Hinglish Transliteration
Bismillahir-Rahmanir-Raheem
Qul a’udhu bi-rabbil-falaq.
Min sharri ma khalaq.
Wa min sharri ghasiqin idha waqab.
Wa min sharrin-naffathati fil-‘uqad.
Wa min sharri hasidin idha hasad.
हिंदी तर्जुमा
अल्लाह के नाम से शुरू, जो निहायत मेहरबान, बार-बार रहम फ़रमाने वाला है।
- कह दीजिए – मैं सुबह के रब की पनाह माँगता हूँ।
- उसकी पैदा की हुई चीज़ों के शर से।
- और अँधेरी रात के शर से, जब वह छा जाए।
- और गिरहों में फूँकने वालों के शर से।
- और हसद करने वाले के शर से, जब वह हसद करे।
English Translation
In the name of Allah, the Most Compassionate, the Most Merciful.
- Say, “I seek refuge in the Lord of daybreak,
- From the evil of what He has created,
- And from the evil of darkness when it settles,
- And from the evil of those who blow on knots,
- And from the evil of an envier when he envies.”
सूरह फ़लक़ की फ़ज़ीलत
सूरह फ़लक़ में अल्लाह तआला से तमाम तरह के शर से पनाह माँगी गई है। इसमें रात के अँधेरे, जादू से जुड़े शर और हसद करने वाले के शर से हिफ़ाज़त की दुआ शामिल है।
इसे सूरह नास के साथ मुअव्विज़ात में शामिल किया जाता है। नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम सोने से पहले इन सूरतों को पढ़कर दम करते थे।
हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 5017।
अरबी टेक्स्ट और तिलावत – https://quran.com/113
सूरह अन-नास — Surah An-Nas
क़ुरआन मजीद की सूरह नंबर – 114
आयतें – 6
मौज़ू – शैतानी वसवसों और छिपे हुए बुरे ख़यालात से अल्लाह की पनाह माँगना।
अरबी टेक्स्ट
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ١
مَلِكِ النَّاسِ ٢
إِلَٰهِ النَّاسِ ٣
مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ٤
الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ٥
مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ ٦
हिंदी में तलफ़्फ़ुज़
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन्नास।
मलिकिन्नास।
इलाहिन्नास।
मिन शर्रिल वसवासिल ख़न्नास।
अल्लज़ी युवसविसु फ़ी सुदूरिन्नास।
मिनल जिन्नति वन्नास।
Hinglish Transliteration
Bismillahir-Rahmanir-Raheem
Qul a’udhu bi-rabbin-nas.
Malikin-nas.
Ilahin-nas.
Min sharril-waswasil-khannas.
Alladhi yuwaswisu fi sudurin-nas.
Minal-jinnati wan-nas.
हिंदी तर्जुमा
अल्लाह के नाम से शुरू, जो निहायत मेहरबान, बार-बार रहम फ़रमाने वाला है।
- कह दीजिए- मैं इंसानों के रब की पनाह माँगता हूँ।
- इंसानों के बादशाह की।
- इंसानों के माबूद की।
- उस वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले के शर से।
- जो इंसानों के सीनों में वसवसे डालता है।
- चाहे वह जिन्नों में से हो या इंसानों में से।
English Translation
In the name of Allah, the Most Compassionate, the Most Merciful.
- Say, “I seek refuge in the Lord of mankind,
- The King of mankind,
- The God of mankind,
- From the evil of the whisperer who withdraws,
- Who whispers into the hearts of mankind,
- Whether from among jinn or mankind.”
सूरह नास की फ़ज़ीलत
सूरह नास में इंसान को अल्लाह सुब्हानवा तआला की पनाह माँगने की तालीम दी गई है। यह शैतान और दूसरे वसवसा डालने वालों के शर से अल्लाह की हिफ़ाज़त तलब करने की दुआ है।
सूरह फ़लक़ और सूरह नास को पढ़ना और उन पर अमल करना नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत से साबित है।
हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 5017।
अरबी टेक्स्ट और तिलावत – https://quran.com/114
चार कुल पढ़ने और दम करने की फ़ज़ीलत
चारों कुल में अलग-अलग अहम तालीमात हैं। इनकी तिलावत से मुसलमान अल्लाह सुब्हानवातआला की यकताई का इक़रार करता है और उसी से पनाह माँगता है।
1. तौहीद का बयान – सूरह इख़लास अल्लाह तआला की यकताई और बेनियाज़ी को बयान करती है।
2. शर से पनाह – सूरह फ़लक़ में मख़लूक़ के शर, अँधेरे, जादू से जुड़े शर और हसद से पनाह माँगी जाती है।
3. वसवसों से पनाह – सूरह नास में इंसानों और जिन्नों में से वसवसा डालने वालों के शर से अल्लाह की पनाह माँगी जाती है।
4. सहीह सुन्नत पर अमल – सोने से पहले सूरह इख़लास, फ़लक़ और नास पढ़कर हाथों पर दम करना और बदन पर हाथ फेरना नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से साबित है।
5. अल्लाह पर भरोसा – इन सूरतों का पैग़ाम यह है कि बंदा अपनी हिफ़ाज़त के लिए अल्लाह सुब्हानवा तआला की तरफ़ रुजू करे और उसी पर भरोसा रखे।
क्या चार कुल पढ़कर दम करने से हर परेशानी दूर हो जाती है?
क़ुरआन की तिलावत और दुआ मुसलमान के लिए इबादत और अल्लाह से मदद माँगने का ज़रिया है। लेकिन यह दावा करना सही नहीं कि चार कुल पढ़कर दम करने से हर बीमारी, हर परेशानी या हर नुकसान का दूर होना लाज़िमी है।
शिफ़ा और हिफ़ाज़त अल्लाह के इख़्तियार में हैं। दुआ के साथ ज़रूरत पड़ने पर मुनासिब इलाज और जायज़ तदबीर भी अपनानी चाहिए।
चार कुल के बारे में 5 अहम FAQ
चार कुल कौन-कौन सी सूरतें हैं?
चार कुल से मुराद सूरह अल-काफ़िरून (109), सूरह अल-इख़लास (112), सूरह अल-फ़लक़ (113) और सूरह अन-नास (114) हैं।
क्या चारों कुल पढ़कर दम करना सहीह हदीस से साबित है?
सोने से पहले हाथों पर दम करके बदन पर हाथ फेरने की सहीह हदीस में सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास का ज़िक्र है। चारों कुल को एक साथ पढ़ने की मशहूर तरतीब को उसी हदीस का लफ़्ज़ी बयान नहीं समझना चाहिए।
चार कुल कितनी बार पढ़ने चाहिए?
सोने से पहले तीन सूरतों को पढ़कर दम करने का अमल तीन बार करना सहीह बुख़ारी 5017 में बयान हुआ है। चारों कुल को दम के लिए किसी ख़ास तादाद में पढ़ना ज़रूरी है, ऐसा कहने के लिए अलग सहीह दलील चाहिए।
क्या चार कुल पढ़कर बच्चों पर दम कर सकते हैं?
क़ुरआन पढ़कर रुक़्या और दुआ करना जायज़ है, बशर्ते अमल शिर्क और ग़ैर-शरई बातों से पाक हो। बच्चों के लिए भी अल्लाह से हिफ़ाज़त की दुआ की जा सकती है। नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से बच्चों के लिए पनाह की दुआ करना भी साबित है।
क्या चार कुल पढ़कर दम करने से नज़र और जादू का असर ख़त्म हो जाता है?
सूरह फ़लक़ और सूरह नास में शर से पनाह माँगी गई है और क़ुरआन से रुक़्या करना जायज़ है। लेकिन यह गारंटी देना कि किसी भी हालत में हर असर फ़ौरन ख़त्म हो जाएगा, सही नहीं। दुआ करें, अल्लाह पर भरोसा रखें और ज़रूरत होने पर मुनासिब मदद लें।
ख़ुलासा
चार कुल की तिलावत मुसलमान को तौहीद, इख़लास और अल्लाह सुब्हानवा तआला की पनाह माँगने की तालीम देती है। ख़ास तौर पर सोने से पहले सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास पढ़कर हाथों पर हल्का दम करना और बदन पर हाथ फेरना नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत है।
इस अमल को सहीह हदीस के मुताबिक़ अपनाएँ, क़ुरआन के मानी समझने की कोशिश करें और अपनी हिफ़ाज़त व आफ़ियत के लिए अल्लाह सुब्हानवा तआला से दुआ करें।
अल्लाह सुब्हानवा तआला हम सबको क़ुरआन मजीद पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
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