Zam Zam Dua : 5 खूबसूरत दुआएं और पीने का सुन्नत तरीका

Zam Zam Dua  ज़मज़म पानी पीने की दुआ 

Zam Zam Dua

ज़मज़म का पानी पीने की दुआ (Zam Zam Dua for Drinking Water) हर मुसलमान के लिए जानना अहम है। ज़मज़म का पानी अल्लाह सुब्हानवा तआला की एक खास नेमत है, जिसका ताल्लुक हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम और हज़रत हाजरा अलैहस्सलाम के वाक़िये से है।

ज़मज़म पीते वक़्त अल्लाह सुब्हानवा तआला से अपनी ज़रूरतों, सेहत, रिज़्क, इल्म, मग़फिरत और दुनिया व आख़िरत की भलाई के लिए दुआ करनी चाहिए।

इस आर्टिकल में हम ज़मज़म पीने की दुआ अरबी, हिंदी और Hinglish में जानेंगे। साथ ही इसका हिंदी और English में मतलब, ज़मज़म की तारीख़, सहीह हदीस, फज़ीलत और पीने का सही तरीका भी समझेंगे।

1. ज़मज़म पीने की दुआ

ज़मज़म पीते समय अल्लाह से अपनी जायज़ हाजतों के लिए दुआ करना अच्छा अमल है। नीचे एक खूबसूरत दुआ दी गई है, जिसमें इल्म, पाक रिज़्क और शिफा मांगी गई है।

नोट- यह दुआ अच्छे मतलब वाली एक आम दुआ है। इसे ज़मज़म पीने के लिए नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से साबित कोई खास या लाज़िमी दुआ न समझें।

Arabic Dua

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا وَاسِعًا، وَشِفَاءً مِنْ كُلِّ دَاءٍ

Hindi Text (हिंदी में पढ़ने का तरीका)

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका इल्मन नाफिअन, व रिज़्कन वासिअन, व शिफाअन मिन कुल्लि दा।

Hinglish Text

Allahumma Inni As’aluka Ilman Naafi’an, Wa Rizqan Waasi’an, Wa Shifaa’an Min Kulli Daa.

Meaning in Hindi (मतलब)

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे फायदेमंद इल्म, कुशादा और पाक रिज़्क तथा हर बीमारी से शिफा मांगता हूं।

Meaning in English

O Allah! I ask You for beneficial knowledge, abundant provision, and healing from every illness.

2. ज़मज़म पीते समय पढ़ने के लिए दूसरी दुआएं

ज़मज़म पीते समय आप अपनी ज़रूरत के मुताबिक अल्लाह से दुआ कर सकते हैं। मसलन-

1. मग़फिरत के लिए

رَبِّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي

हिंदी: रब्बिग़फिर ली वरहमनी।

Hinglish: Rabbighfir Li Warhamni.

मतलब: ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ फरमा और मुझ पर रहम फरमा।

2. सेहत और आफियत के लिए

اللَّهُمَّ عَافِنِي فِي بَدَنِي

हिंदी: अल्लाहुम्मा आफिनी फी बदनी।

Hinglish: Allahumma Aafini Fi Badani.

मतलब: ऐ अल्लाह! मेरे जिस्म को आफियत और सेहत अता फरमा।

3. हलाल रिज़्क के लिए

اللَّهُمَّ ارْزُقْنِي رِزْقًا حَلَالًا طَيِّبًا

हिंदी: अल्लाहुम्मरज़ुकनी रिज़्कन हलालन तय्यिबा।

Hinglish: Allahummarzuqni Rizqan Halalan Tayyiban.

मतलब: ऐ अल्लाह! मुझे हलाल और पाक रिज़्क अता फरमा।

4. दुनिया और आख़िरत की भलाई के लिए

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

हिंदी: रब्बना आतिना फिद्दुन्या हसनतं व फिल आख़िरति हसनतं व क़िना अज़ाबन्नार।

Hinglish: Rabbana Aatina Fid-Dunya Hasanatan Wa Fil Aakhirati Hasanatan Wa Qina Azaaban Naar.

मतलब: ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई अता फरमा और आख़िरत में भी भलाई अता फरमा और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।

हवाला: सूरह अल-बक़रा, 2:201।

3. ज़मज़म का पानी क्या है?

ज़मज़म मक्का मुकर्रमा में मस्जिद अल-हरम और काबा शरीफ के पास मौजूद एक मुबारक कुएं का पानी है।

इसका ताल्लुक हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम, उनकी बीवी हज़रत हाजरा अलैहस्सलाम और उनके बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम से है।

इस्लामी तारीख़ के मुताबिक, जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अल्लाह के हुक्म से हज़रत हाजरा और नन्हे हज़रत इस्माईल को मक्का की बंजर वादी में छोड़कर गए, उस समय वहां आबादी और पानी का कोई ज़रिया नहीं था।

जब पानी खत्म हो गया तो हज़रत हाजरा अपने बेटे की प्यास की वजह से परेशान हुईं। वह पानी की तलाश में सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच सात बार दौड़ीं।

अल्लाह के हुक्म से फरिश्ते जिब्रील अलैहिस्सलाम के ज़रिए ज़मीन से पानी का चश्मा जारी हुआ। यही ज़मज़म का पानी है।

इस वाक़िये की तफसील सहीह बुखारी में बयान हुई है।

4. ज़मज़म के बारे में कुरआन की आयत

कुरआन मजीद में सूरह इब्राहीम की आयत 37 में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की दुआ का ज़िक्र मिलता है।

सूरह इब्राहीम (14:37)

رَبَّنَا إِنِّي أَسْكَنْتُ مِنْ ذُرِّيَّتِي بِوَادٍ غَيْرِ ذِي زَرْعٍ عِنْدَ بَيْتِكَ الْمُحَرَّمِ

हिंदी मतलब:

ऐ हमारे रब! मैंने अपनी कुछ औलाद को तेरे इज़्ज़त वाले घर के पास एक ऐसी वादी में बसाया है जहां खेती-बाड़ी नहीं होती।

यह आयत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की उस दुआ का हिस्सा है जिसमें उन्होंने अपनी औलाद के लिए नमाज़ कायम करने, लोगों के दिलों में उनके लिए मोहब्बत पैदा होने और रिज़्क मिलने की दुआ की थी।

ज़रूरी बात: इस आयत में ज़मज़म का नाम सीधे तौर पर नहीं आया है, बल्कि उस बंजर वादी का ज़िक्र है जहां हज़रत इस्माईल और हज़रत हाजरा को छोड़ा गया था।

5. ज़मज़म पीने की फज़ीलत और हदीस

ज़मज़म के पानी की फज़ीलत कई हदीसों में बयान हुई है।

हदीस 1: ज़मज़म जिस नीयत से पिया जाए

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फरमाया-

مَاءُ زَمْزَمَ لِمَا شُرِبَ لَهُ

हिंदी मतलब:

ज़मज़म का पानी जिस मकसद के लिए पिया जाए, उसके लिए है।

हवाला: सुनन इब्न माजा, हदीस 3062।

इस रिवायत को दारुस्सलाम ने हसन दर्जा दिया है।

इस हदीस से हमें यह सीख मिलती है कि ज़मज़म पीते समय अच्छी नीयत रखें और अल्लाह से अपनी जायज़ ज़रूरतों के लिए दुआ करें।

हदीस 2: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने ज़मज़म खड़े होकर पिया

हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है:

उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम को ज़मज़म का पानी पिलाया और आपने खड़े होकर उसे पिया।

हवाला: सहीह बुखारी, हदीस 1637 और 5617।

इससे मालूम होता है कि ज़मज़म का पानी खड़े होकर पीना भी जायज़ है।

हदीस 3: ज़मज़म में खाना और शिफा की खूबी

हज़रत अबू ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु के वाक़िये में आता है कि उन्होंने लंबे समय तक मक्का में रहते हुए ज़मज़म के पानी पर गुज़ारा किया।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने ज़मज़म के बारे में फरमाया कि यह मुबारक पानी है और इसमें खाने जैसी सैराबी की खूबी है।

हवाला: सहीह मुस्लिम, हदीस 2473।

इन रिवायतों से ज़मज़म की खास फज़ीलत का पता चलता है।

6. ज़मज़म पीने का सुन्नत तरीका

ज़मज़म पीते समय कुछ आदाब का ख्याल रखना चाहिए।

  1. अल्लाह का नाम लें: पानी पीने से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ें।
  2. किबला रुख होना: हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मंसूब रिवायत में किबला रुख होने का ज़िक्र है।
  3. अच्छी नीयत करें: अल्लाह से इल्म, सेहत, रिज़्क, मग़फिरत और दूसरी जायज़ हाजतों के लिए दुआ करें।
  4. तीन सांस में पिएं: पानी पीते समय बर्तन से अलग होकर सांस लें। एक ही सांस में पूरा पानी पीने से बचें।
  5. पेट भरकर पिएं: ज़मज़म से सैराब होना मुस्तहब बताया गया है।
  6. अल्हम्दुलिल्लाह कहें: पानी पीने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करें।

हदीस का हवाला: सुनन इब्न माजा, हदीस 3061 में किबला रुख होकर, अल्लाह का नाम लेकर, तीन सांस में पीने, सैराब होने और आखिर में अल्लाह की हम्द करने का ज़िक्र है। इस रिवायत को दारुस्सलाम ने हसन कहा है।

ध्यान रहे कि इन आदाब को अपनाना अच्छा है, लेकिन इन्हें इस तरह लाज़िमी न समझें कि इनके बिना ज़मज़म पीना गलत हो जाएगा।

7. ज़मज़म पीने के फायदे और फज़ीलत

ज़मज़म के पानी की कुछ खास फज़ीलतें इस तरह हैं-

  • मुबारक पानी: ज़मज़म को रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने मुबारक पानी बताया है।
  • दुआ की उम्मीद: ज़मज़म पीते समय नेक नीयत से अल्लाह से दुआ करनी चाहिए।
  • शिफा की उम्मीद: अल्लाह से जिस्मानी और रूहानी शिफा मांग सकते हैं।
  • इल्म की दुआ: फायदेमंद इल्म और समझ के लिए दुआ कर सकते हैं।
  • रिज़्क की दुआ: हलाल और पाक रिज़्क के लिए दुआ कर सकते हैं।
  • आख़िरत की भलाई: मग़फिरत, रहमत और जहन्नम से निजात मांग सकते हैं।

याद रखें कि ज़मज़म को पीना किसी बीमारी के इलाज की गारंटी नहीं है। बीमारी की हालत में दुआ के साथ सही मेडिकल इलाज भी कराना चाहिए। शिफा देने वाला अल्लाह है।

8. क्या ज़मज़म पीने के लिए कोई खास दुआ सुन्नत है?

बहुत से लोग यह सवाल करते हैं कि क्या ज़मज़म पीने के लिए कोई खास दुआ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से साबित है?

इस बारे में सही जानकारी यह है कि ज़मज़म पीने के लिए कोई एक खास दुआ सहीह हदीस से इस तरह साबित नहीं है कि हर मुसलमान के लिए उसी को पढ़ना ज़रूरी हो।

हालांकि, ज़मज़म जिस मकसद के लिए पिया जाए, उसके बारे में हदीस मौजूद है। इसलिए अपनी जायज़ हाजतों के लिए अल्लाह से दुआ करना चाहिए।

आप अरबी में दुआ कर सकते हैं या अपनी भाषा हिंदी, उर्दू और दूसरी भाषाओं में भी अल्लाह से अपनी ज़रूरतें मांग सकते हैं।

9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. ज़मज़म पीने की सबसे अच्छी दुआ कौन सी है?

ज़मज़म पीने के लिए कोई एक खास दुआ सहीह हदीस से लाज़िमी तौर पर साबित नहीं है। आप अल्लाह से इल्म, रिज़्क, सेहत, मग़फिरत और अपनी दूसरी जायज़ हाजतों के लिए दुआ कर सकते हैं।

2. क्या ज़मज़म पीते समय किबला रुख होना ज़रूरी है?

किबला रुख होकर ज़मज़म पीने का ज़िक्र सुनन इब्न माजा की हदीस 3061 में मिलता है। यह अच्छा अदब है, लेकिन इसे ज़रूरी शर्त नहीं समझना चाहिए।

3. क्या ज़मज़म खड़े होकर पी सकते हैं?

जी हां, ज़मज़म खड़े होकर पी सकते हैं। सहीह बुखारी की हदीस 1637 में आता है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने ज़मज़म खड़े होकर पिया था।

4. क्या ज़मज़म पीने से हर बीमारी ठीक हो जाती है?

ज़मज़म की फज़ीलत और शिफा से जुड़ी रिवायतें मौजूद हैं। मुसलमान को अल्लाह से शिफा की उम्मीद रखनी चाहिए, लेकिन किसी बीमारी के ठीक होने की गारंटी नहीं देनी चाहिए। इलाज भी जारी रखना चाहिए।

5. क्या ज़मज़म पीने से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ना चाहिए?

जी हां, पानी पीने से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ना चाहिए। पानी पीने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहना भी इस्लामी आदाब में शामिल है।

आखिरी बात

ज़मज़म का पानी अल्लाह तआला की एक मुबारक नेमत है। इसकी तारीख़ हमें हज़रत हाजरा अलैहस्सलाम के सब्र, भरोसे और अल्लाह पर तवक्कुल की याद दिलाती है।

जब भी ज़मज़म पीने का मौका मिले तो अच्छी नीयत के साथ पिएं और अल्लाह से अपनी दुनिया और आख़िरत की भलाई मांगें।

अल्लाह तआला हमें ज़मज़म की बरकतों से फायदा उठाने, नेक अमल करने और हमारी जायज़ दुआओं को कुबूल फरमाने की तौफीक अता फरमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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