ज़बानियाँ फरिश्ते जहन्नम के पहरेदार ( Guardians of Hell Zabaniyah Angels Hindi)

इस्लामिक तफसीर (interpretation) के मुताबिक़, ज़बानियाँ फ़रिश्ते अल्लाह सुब्हानवताला के नौक़र‑ए‑अज़ाब (punishment angels) हैं जिनका मक़सद सज़ा देना है। इन्हे अज़ाब देने वाले फ़रिश्ते , जहन्नम के मुहाफ़िज़ , जहन्नम के रखवाले या जहन्नम के पहरेदार कहा जाता है । इंग्लिश में “Angels of Punishment”, “Guardians of Hell”, या “Wardens of Jahannam” भी कहा जाता है।
ज़बानियाँ फरिश्ते कितने है ? ( Guardians of Hell Zabaniyah Angels Hindi)
कुरआन की सुरह अल-मुद्दथिर (74:30‑31) में इनकी संख्या उन्नीस (19) बताई गई है। इन उन्नीस फरिश्तों के सरदार (leader) मालिक अलैहिस्सलाम (Maalik) है , जो जहन्नम के ख़ज़ानेदार (chief guardian) भी है । रसूलुल्लाह सल्लाहु अलय्हि वसल्लम जब मिराज के सफर में थे , तो मालिक अलैहिस्सलाम सरदार ए अम्बिया की बारगाह में हाज़िर हुए थे । ताकि जहन्नम की तमाम चीज़ो के बारे में तफ्सील के साथ आपके सामने अर्ज कर सके ।
ज़बानियाँ फ़रिश्तो को कैसे पैदा किया गया ?
कुछ मुफ़सिरों के मुताबिक़ ये फरिश्ते नूर (रौशनी) से बनाए गए फरिश्ते नहीं हैं, बल्कि ऐसा माना जाता है कि इन्हें नार‑ए‑ग़ज़ब (anger/fire) या ग़ुस्से की आग से बनाया गया है।
इनका वज़न बहुत भारी, आकार बहुत बड़ा और चेहरे खौफनाक बताए गए हैं –
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ये इतने बड़े है की , अगर दुनिया में हो तो इनके सिर आसमान में, और पैर ज़मीन की निचली परत तक होते हैं ।
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आँखें बिजली की तरह तेज़, दांत गाय के सींग जैसे सफेद और होंठ पैरों तक लटके हुए। हदीश में आता है की इनकी शक्ल मुर्गे के मानिंद होती है ।
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आग के शोलो से दहकते हुए , इनके मुंह से जलती चिंगारियाँ निकलती हैं ।
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इनके कन्धों की चौड़ाई इतनी होती है जितनी कि “100 साल का सफर” तय हो सके। कुछ रिवायतों में इनके कंधो की लम्बाई 500 साल के सफर के बराबर भी कही गयी है ।
ज़बानियाँ फ़रिश्तो के औज़ार और ताक़त
ज़बानियाह फ़रिश्तो के पास अलग-अलग सज़ा देने वाले औज़ार हैं –
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हुक्स , मिरजाबबा ( काँटों वाला लोहे का औज़ार ), आग की चाबुकें, और गरम ज़नज़ीरे ।
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ये बेहद ताक़तवर हैं — एक ज़बानियाह फरिश्ता अकेले 70,000 लोगों को एक झटके में ज़िहन्नम में धकेल सकता है।
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उनकी मज़बूती ऐसी है कि इंसानों की सारी क़ौम भी उन्हें हरा नहीं सकती।
तस्कीन‑ए‑फ़रिश्ता और इबादत की हिदायत
ज़बानियाह फ़रिश्तो का वजूद कुरआनी हिदायत है कि इंसान को अपने अमल सुधारने की चेतावनी दे। ये नरम फरिश्तों जैसे नहीं हैं, बल्कि कड़ी, गख़्तर वाले फरिश्ते हैं। ये एलाह की हुक्मरानी बिना किसी सवाल के अंजाम देते हैं।
ज़बानियाह फरिश्ते आख़िरत के एक खौफनाक लेकिन इंसाफ और तहफ़्फ़ुज़ (justice mechanism) के लिए पैदा किये गए हैं। जिनके होने का वज़ूद, इंसानों को अज़ाब से बचने , अमल सही करने का इल्म , और इबादत और तौबा की तरफ़ जाने का मौका देता है ।
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जज़ाकल्लाह खैर।
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