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अल्कोहल वाला परफ्यूम हलाल है या हराम? अल्कोहल वाले इत्र से नमाज़ पढ़ सकते हैं? 7 ज़रूरी बातें

अल्कोहल वाला परफ्यूम हलाल है या हराम?

क्या हर परफ्यूम हलाल है?

इस्लाम में ख़ुशबू लगाना पसंदीदा अमल है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम को ख़ुशबू पसंद थी और आप रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम अच्छे इत्र का इस्तेमाल फ़रमाते थे।

लेकिन आजकल बाज़ार में मिलने वाले कई परफ्यूम, डियोडरेंट और बॉडी स्प्रे में अल्कोहल मिला होता है। इसी वजह से बहुत से मुसलमानों के दिल में यह सवाल पैदा होता है कि क्या अल्कोहल वाला परफ्यूम लगाना जायज़ है? क्या इसे लगाकर नमाज़ पढ़ सकते हैं?

इस मसले को समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि हर अल्कोहल एक जैसा नहीं होता और इस बारे में उलमा के दरमियान इख़्तिलाफ़ भी पाया जाता है।

परफ्यूम में अल्कोहल क्यों मिलाया जाता है?

परफ्यूम में अल्कोहल का इस्तेमाल ख़ुशबू को घोलने और उसे आसानी से जिस्म या कपड़ों पर लगाने के लिए किया जाता है।

परफ्यूम में आम तौर पर इन चीज़ों का इस्तेमाल हो सकता है:

यह बात समझना ज़रूरी है कि किसी परफ्यूम पर Alcohol Denat लिखा होने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि वह नापाक है या उसे लगाकर नमाज़ नहीं हो सकती।

अल्कोहल वाला परफ्यूम हलाल है या हराम?

इस मसले पर उलमा की अलग-अलग राय है।

पहली राय – कुछ अल्कोहल वाले परफ्यूम का इस्तेमाल जायज़ है

कई उलमा के मुताबिक़ हर तरह का अल्कोहल नापाक नहीं होता। उनके नज़दीक परफ्यूम में इस्तेमाल होने वाला अल्कोहल अगर नशीली शराब के हुक्म में नहीं आता या उसे नापाक नहीं माना जाता, तो ऐसे परफ्यूम का इस्तेमाल जायज़ है।

मिस्र के दारुल इफ़्ता ने भी अल्कोहल वाले परफ्यूम के इस्तेमाल को जायज़ माना है और ऐसे परफ्यूम लगाकर नमाज़ को दुरुस्त बताया है।

हवाला – Egypt’s Dar Al-Ifta, Fatwa No. 5922.

दूसरी राय – नशीले अल्कोहल वाले परफ्यूम से बचना चाहिए

कुछ उलमा का कहना है कि अगर परफ्यूम में ऐसा अल्कोहल मौजूद है जिसे नशीली शराब के हुक्म में माना जाता है, तो उससे बचना चाहिए।

इस राय के मुताबिक़ अगर अल्कोहल नापाक है और वह कपड़ों या बदन पर लगा हुआ है, तो नमाज़ से पहले उसे पाक करना ज़रूरी है।

हवाला- IslamWeb, Fatwa No. 86377; स्थायी फ़तवा कमेटी की राय।

हनफ़ी फ़िक़्ह में क्या हुक्म है?

दारुल उलूम देवबंद के फ़तवों के मुताबिक़ अंगूर, खजूर या किशमिश से बने अल्कोहल और दूसरे जरियों से बने अल्कोहल के हुक्म में फ़र्क़ किया गया है।

उनके फ़तवे के मुताबिक़ आम तौर पर दूसरे जरियों से बने अल्कोहल वाले परफ्यूम को नापाक नहीं माना जाता, लेकिन शक की वजह से उससे बचने और इत्र इस्तेमाल करने को बेहतर बताया गया है।

हवाला – Darul Uloom Deoband, Fatwa No. 666/662=N और 662/658/N.

क्या अल्कोहल वाला परफ्यूम लगाकर नमाज़ पढ़ सकते हैं?

इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस फ़िक़्ही राय पर अमल करते हैं और परफ्यूम में किस तरह का अल्कोहल इस्तेमाल हुआ है।

एक ज़रूरी बात – सिर्फ़ अल्कोहल वाला परफ्यूम लगाने से वुज़ू नहीं टूटता। वुज़ू टूटने और कपड़ों के पाक या नापाक होने के मसले अलग-अलग हैं।

क़ुरआन में शराब और नशीली चीज़ों के बारे में क्या कहा गया है?

अल्लाह सुब्हानवा तआला क़ुरआन में इरशाद फरमाते है-

अरबी-

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنْصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ

हिंदी में पढ़ें-

या अय्युहल्लज़ीना आमनू इन्नमल ख़म्रु वल मैसिरु वल अंसाबु वल अज़लामु रिज्सुम मिन अमलिश शैतानि फ़ज्तनिबूहु लअल्लकुम तुफ़लिहून।

हिंदी मतलब-

ऐ ईमान वालो! बेशक शराब, जुआ, बुत और पाँसे शैतान के गंदे कामों में से हैं। लिहाज़ा इनसे बचो, ताकि तुम कामयाब हो जाओ।

हवाला- सूरह अल-माइदा, 5:90.

इस आयत में शराब और नशीली चीज़ों से बचने का हुक्म दिया गया है। हालांकि परफ्यूम में इस्तेमाल होने वाले हर तरह के अल्कोहल पर इस आयत का हुक्म सीधे लागू करने के बारे में उलमा के दरमियान इख़्तिलाफ़ है।

इत्र लगाने के बारे में हदीस

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने ख़ुशबू को पसंद फ़रमाया।

हज़रत अनस बिन मालिक रदिअल्लाहुताला अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फ़रमाया –

अरबी-

حُبِّبَ إِلَيَّ مِنَ الدُّنْيَا النِّسَاءُ وَالطِّيبُ، وَجُعِلَتْ قُرَّةُ عَيْنِي فِي الصَّلَاةِ

हिंदी में पढ़ें-

हुब्बिबा इलय्या मिनद-दुनिया अन-निसाउ वत्तीयिबु, व जु’इलत क़ुर्रतु ऐनी फ़िस्सलाह।

हिंदी मतलब-

दुनिया की चीज़ों में से औरतें और ख़ुशबू मुझे पसंद की गईं, और मेरी आँखों की ठंडक नमाज़ में रखी गई।

हवाला- सुनन अन-नसाई, हदीस 3939; मुस्नद अहमद में भी यह रिवायत आई है। इस रिवायत की सनद के दर्जे के बारे में मुहद्दिसीन के बीच चर्चा है।

इससे ख़ुशबू की अहमियत का पता चलता है, लेकिन इससे हर तरह के अल्कोहल वाले परफ्यूम के जायज़ होने का हुक्म साबित नहीं होता।

अल्कोहल-फ्री परफ्यूम और इत्र का इस्तेमाल

अगर आप इस मसले में एहतियात करना चाहते हैं, तो अल्कोहल-फ्री इत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कुछ आम विकल्प –

हालांकि किसी प्रोडक्ट पर Alcohol-Free लिखा होने से उसके तमाम अजज़ा के हलाल होने की गारंटी नहीं मिलती। अगर आपको किसी ख़ास प्रोडक्ट के बारे में शक हो, तो उसके अजज़ा की तफ़सील देखें और किसी भरोसेमंद मुफ़्ती से पूछें।

नमाज़ से पहले क्या करना चाहिए?

अगर आप अल्कोहल वाले परफ्यूम के बारे में एहतियात करना चाहते हैं, तो इन बातों का ख़याल रखें-

  1. नमाज़ के लिए पाक-साफ़ कपड़े पहनें।
  2. अगर आप ऐसे मुफ़्ती की राय पर अमल करते हैं जो किसी ख़ास परफ्यूम को नापाक मानते हैं, तो नमाज़ से पहले उस जगह को पाक कर लें।
  3. अगर आप इख़्तिलाफ़ से बचना चाहते हैं, तो अल्कोहल-फ्री इत्र इस्तेमाल करें।
  4. सिर्फ़ परफ्यूम लगाने की वजह से वुज़ू दोबारा करना ज़रूरी नहीं है।
  5. किसी ख़ास परफ्यूम के बारे में फ़ैसला करने से पहले उसके अजज़ा और अपने मस्लक के मुताबिक़ किसी भरोसेमंद आलिम से मशवरा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या अल्कोहल वाला परफ्यूम लगाकर नमाज़ पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, कई उलमा के मुताबिक़ ऐसे परफ्यूम लगाकर नमाज़ पढ़ना जायज़ है जिनमें मौजूद अल्कोहल को पाक माना जाता है। लेकिन कुछ उलमा नशीले अल्कोहल वाले परफ्यूम से बचने और उसे नापाक मानने की राय रखते हैं।

2. क्या Alcohol Denat वाला परफ्यूम हलाल है?

Alcohol Denat का मतलब है कि अल्कोहल में दूसरे पदार्थ मिलाए गए हैं। सिर्फ़ इस नाम से परफ्यूम के हलाल या हराम होने का फ़ैसला नहीं किया जा सकता। उसके अजज़ा और अल्कोहल की असलियत को देखना ज़रूरी है।

3. क्या अल्कोहल वाला परफ्यूम लगाने से वुज़ू टूट जाता है?

नहीं, सिर्फ़ परफ्यूम लगाने से वुज़ू नहीं टूटता। हालांकि परफ्यूम के पाक या नापाक होने का मसला अलग है।

4. क्या अल्कोहल-फ्री इत्र लगाकर नमाज़ पढ़ना जायज़ है?

जी हाँ, अगर इत्र में कोई नापाक या हराम चीज़ शामिल नहीं है, तो उसे लगाकर नमाज़ पढ़ना जायज़ है।

5. क्या परफ्यूम में अल्कोहल होने से वह हराम हो जाता है?

नहीं, हर तरह के अल्कोहल का हुक्म एक जैसा नहीं है। उलमा के दरमियान इस मसले पर इख़्तिलाफ़ है। इसलिए सिर्फ़ अल्कोहल का नाम देखकर किसी परफ्यूम को हराम कहना सही नहीं है।

नतीजा

हर परफ्यूम को सिर्फ़ अल्कोहल की मौजूदगी की वजह से हराम नहीं कहा जा सकता। इस मसले में उलमा के दरमियान इख़्तिलाफ़ पाया जाता है।

कई उलमा ऐसे परफ्यूम को पाक और जायज़ मानते हैं, जबकि कुछ उलमा नशीले अल्कोहल वाले परफ्यूम से बचने की सलाह देते हैं।

अगर आप इख़्तिलाफ़ से बचना चाहते हैं, तो अल्कोहल-फ्री इत्र इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने मस्लक के मुताबिक़ किसी भरोसेमंद मुफ़्ती से मशवरा करना भी बेहतर है।

अल्लाह तआला हम सबको दीन की सही समझ अता फ़रमाए। आमीन।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल आम इस्लामी मालूमात के लिए है। किसी ख़ास परफ्यूम के बारे में फ़तवा लेने के लिए भरोसेमंद मुफ़्ती से मशवरा करें।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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