Asar Ki Namaz Ka Tarika
असर की नमाज़ क्या है?
असर इस्लाम की पाँच वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ों में से एक है। यह ज़ुहर के बाद और मग़रिब से पहले अदा की जाती है। असर की नमाज़ की ख़ास अहमियत है, इसलिए मुसलमान को इसकी अदायगी में सुस्ती नहीं करनी चाहिए।
अगर आप पहली बार नमाज़ सीख रहे हैं और जानना चाहते हैं कि Asar ki namaz ka tarika क्या है, तो इस लेख में हर रकअत, हर मुक़ाम और उसमें पढ़ी जाने वाली दुआ को आसान तरीक़े से समझाया गया है।
असर की नमाज़ में कितनी रकअत होती हैं?
असर की नमाज़ में आम तौर पर 4 रकअत सुन्नत-ए-ग़ैर-मुअक्कदा और 4 रकअत फ़र्ज़ पढ़ी जाती हैं।
| रकअत | नमाज़ की क़िस्म |
|---|---|
| पहली 4 रकअत | सुन्नत-ए-ग़ैर-मुअक्कदा |
| अगली 4 रकअत | फ़र्ज़ |
| कुल | 8 रकअत |
ज़रूरी बात- असर की 4 रकअत फ़र्ज़ हैं। फ़र्ज़ से पहले की 4 रकअत सुन्नत-ए-ग़ैर-मुअक्कदा हैं, जिन्हें पढ़ना मुस्तहब है। इनकी अहमियत के बारे में हदीस भी मिलती है। अगर आप असर की फ़र्ज़ नमाज़ सीखना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए 10 स्टेप्स पर ध्यान दें।
हदीस का हवाला- जामे तिर्मिज़ी, हदीस 430; सुनन अबू दाऊद, हदीस 1271।
असर की नमाज़ से पहले की तैयारी
नमाज़ शुरू करने से पहले इन बातों का ख़याल रखें-
- बदन, कपड़े और नमाज़ की जगह पाक-साफ़ हों।
- सही तरीक़े से वुज़ू करें।
- नमाज़ के लिए ज़रूरी बदन ढका हुआ हो।
- क़िबला यानी ख़ाना-ए-काबा की तरफ़ रुख़ करें।
- असर का वक़्त शुरू हो चुका हो।
- दिल में नियत करें कि आप अल्लाह के लिए असर की 4 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ रहे हैं।
नियत- नियत दिल के इरादे का नाम है। इसके लिए किसी ख़ास अरबी जुमले को ज़ुबान से कहना ज़रूरी नहीं है।
असर की नमाज़ पढ़ने के 10 स्टेप्स
1. तकबीर-ए-तहरीमा कहें
क़िबला रुख़ खड़े होकर नमाज़ शुरू करें। हाथ उठाकर कहें-
अरबी-
اللّٰهُ أَكْبَرُ
हिंदी में पढ़ें- अल्लाहु अकबर।
Hinglish- Allahu Akbar.
मतलब- अल्लाह सबसे बड़ा है।
इसके बाद क़ियाम यानी खड़े होने की हालत में हाथ बाँध लें। हाथ बाँधने की जगह और हाथ उठाने के कुछ तरीक़ों में फ़िक़्ही मसलकों के मुताबिक़ फ़र्क़ पाया जाता है।
2. सना पढ़ें
पहली रकअत में तकबीर के बाद सना पढ़ें।
अरबी-
سُبْحَانَكَ اللّٰهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ وَلَا إِلٰهَ غَيْرُكَ
हिंदी में पढ़ें-
सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबा-रकस्मुका व तआला जद्दुका व ला इलाहा ग़ैरुक।
Hinglish-
Subhanakallahumma wa bihamdika wa tabarakasmuka wa ta’ala jadduka wa la ilaha ghairuk.
मतलब- ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही हम्द है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।
इसके बाद पढ़ें-
अरबी-
أَعُوذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
हिंदी में पढ़ें- अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम।
Hinglish- A’uzu billahi minash-shaitanir-rajim.
मतलब- मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ शैतान मर्दूद से।
फिर पढ़ें-
अरबी-
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी में पढ़ें- बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
Hinglish- Bismillahir-Rahmanir-Raheem.
मतलब- अल्लाह के नाम से शुरू, जो बहुत मेहरबान और निहायत रहम करने वाला है।
3. सूरह फ़ातिहा पढ़ें
हर रकअत के क़ियाम में सूरह फ़ातिहा पढ़ी जाती है। चार रकअत फ़र्ज़ असर में पहली दो रकअतों में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह या क़ुरआन की कुछ आयतें भी पढ़ें।
अरबी-
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
الْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ
हिंदी में पढ़ें-
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।
अर्रहमानिर्रहीम।
मालिकि यौमिद्दीन।
इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन।
इहदिनस्सिरातल मुस्तक़ीम।
सिरातल्लज़ीना अनअम्ता अलैहिम, ग़ैरिल मग़दूबि अलैहिम व लद्दाल्लीन।
Hinglish-
Bismillahir-Rahmanir-Raheem.
Alhamdu lillahi Rabbil Aalameen.
Ar-Rahmanir-Raheem.
Maliki Yawmid-Deen.
Iyyaka na’budu wa iyyaka nasta’een.
Ihdinas-siratal-mustaqeem.
Siratal-lazeena an’amta alaihim, ghairil-maghdubi alaihim wa lad-dalleen.
मतलब- तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जो सारे जहानों का रब है। वह बहुत मेहरबान और रहम करने वाला है। बदले के दिन का मालिक है। हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं। हमें सीधा रास्ता दिखा, उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम फ़रमाया, न कि उनका जिन पर ग़ज़ब हुआ और न गुमराहों का।
हवाला- सूरह अल-फ़ातिहा, 1:1–7।
सूरह फ़ातिहा के आख़िर में आमीन कहें।
अरबी- آمِين
हिंदी में पढ़ें- आमीन।
Hinglish- Aameen.
मतलब- ऐ अल्लाह! हमारी दुआ क़बूल फ़रमा।
4. पहली और दूसरी रकअत में दूसरी सूरह पढ़ें
सूरह फ़ातिहा के बाद कोई छोटी सूरह पढ़ सकते हैं। मिसाल के तौर पर सूरह इख़लास-
अरबी-
قُلْ هُوَ اللّٰهُ أَحَدٌ
اللّٰهُ الصَّمَدُ
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
हिंदी में पढ़ें-
क़ुल हुवल्लाहु अहद।
अल्लाहुस्समद।
लम यलिद व लम यूलद।
व लम यकुल्लहू कुफुवन अहद।
Hinglish-
Qul huwallahu ahad.
Allahus-samad.
Lam yalid wa lam yoolad.
Wa lam yakun lahu kufuwan ahad.
मतलब- कह दीजिए कि अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है। और कोई उसके बराबर नहीं।
हवाला- सूरह अल-इख़लास, 112:1–4।
ध्यान दें– असर की 4 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ की तीसरी और चौथी रकअत में आम तौर पर सिर्फ़ सूरह फ़ातिहा पढ़ी जाती है। इमाम के पीछे क़िरअत और कुछ दूसरे मसलों में फ़िक़्ही मसलकों के मुताबिक़ फ़र्क़ है।
5. रुकू करें
सूरह पढ़ने के बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाएँ। दोनों हाथ घुटनों पर रखें और पीठ को जहाँ तक मुमकिन हो सीधा रखें।
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
हिंदी में पढ़ें- सुब्हाना रब्बियल अज़ीम।
Hinglish- Subhana Rabbiyal Azeem.
मतलब- मेरा अज़मत वाला रब हर ऐब से पाक है।
रुकू में इत्मीनान से ठहरें। यह तस्बीह तीन बार पढ़ना आम तरीक़ा है।
6. रुकू से उठें
रुकू से उठते हुए पढ़ें-
अरबी-
سَمِعَ اللّٰهُ لِمَنْ حَمِدَهُ
हिंदी में पढ़ें- समिअल्लाहु लिमन हमिदह।
Hinglish- Sami’Allahu liman hamidah.
मतलब- अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी हम्द की।
सीधे खड़े होकर पढ़ें-
अरबी-
رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ
हिंदी में पढ़ें- रब्बना व लकल हम्द।
Hinglish- Rabbana wa lakal hamd.
मतलब- ऐ हमारे रब! तमाम हम्द तेरे ही लिए है।
इस हालत को क़ौमा कहते हैं। सीधे खड़े होकर इत्मीनान से ठहरें, फिर सज्दे में जाएँ।
7. पहला सज्दा करें
अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे में जाएँ। पेशानी और नाक ज़मीन पर रखें। दोनों हथेलियाँ, दोनों घुटने और पैरों की उँगलियाँ भी ज़मीन पर हों।
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
हिंदी में पढ़ें- सुब्हाना रब्बियल आला।
Hinglish- Subhana Rabbiyal A’la.
मतलब- मेरा सबसे बुलंद रब हर ऐब से पाक है।
इसे तीन बार पढ़ना आम तरीक़ा है।
8. दोनों सज्दों के बीच बैठें और दूसरा सज्दा करें
पहले सज्दे से अल्लाहु अकबर कहते हुए उठें और इत्मीनान से बैठें। इस बैठने को जलसा कहते हैं।
इस दौरान यह दुआ पढ़ सकते हैं-
अरबी-
رَبِّ اغْفِرْ لِي
हिंदी में पढ़ें- रब्बिग़फ़िर ली।
Hinglish- Rabbighfir li.
मतलब- ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ फ़रमा।
इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए दूसरा सज्दा करें और फिर पढ़ें-
अरबी- سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
हिंदी में पढ़ें- सुब्हाना रब्बियल आला।
Hinglish- Subhana Rabbiyal A’la.
इस तरह पहली रकअत पूरी हो गई। अब दूसरी रकअत के लिए खड़े हो जाएँ।
9. दूसरी, तीसरी और चौथी रकअत पूरी करें
दूसरी रकअत-
- बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़ें।
- सूरह फ़ातिहा पढ़ें।
- कोई दूसरी सूरह या कुछ आयतें पढ़ें।
- रुकू करें और तस्बीह पढ़ें।
- रुकू से उठकर सीधे खड़े हों।
- पहला सज्दा करें।
- दोनों सज्दों के बीच बैठें।
- दूसरा सज्दा करें।
अब दूसरी रकअत के बाद बैठकर अत्तहिय्यात पढ़ें।
तीसरी रकअत-
- अत्तहिय्यात के बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाएँ।
- बिस्मिल्लाह और सूरह फ़ातिहा पढ़ें।
- रुकू करें।
- रुकू से उठकर सीधे खड़े हों।
- दोनों सज्दे पूरे करें।
चौथी रकअत-
- खड़े होकर बिस्मिल्लाह और सूरह फ़ातिहा पढ़ें।
- रुकू करें और फिर सीधे खड़े हों।
- दोनों सज्दे पूरे करें।
- अब आख़िरी क़ायदे में बैठ जाएँ।
असर की चार रकअत फ़र्ज़ नमाज़ में तीसरी और चौथी रकअत के बाद दूसरी सूरह पढ़ना आम तरीक़े में शामिल नहीं है। इस बारे में अपने मसलक के मुताबिक़ अमल करें।
10. आख़िरी क़ायदा, दुरूद और सलाम
चौथी रकअत के दूसरे सज्दे के बाद बैठें। इस आख़िरी बैठक को क़ायदा कहते हैं।
अत्तहिय्यात पढ़ें
अरबी-
التَّحِيَّاتُ لِلّٰهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللّٰهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
हिंदी में पढ़ें-
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबात। अस्सलामु अलैका अय्युहन्नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुह। अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन। अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।
Hinglish-
At-tahiyyatu lillahi was-salawatu wat-tayyibat. Assalamu alaika ayyuhan-nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuh. Assalamu alaina wa ala ibadillahis-saliheen. Ashhadu alla ilaha illallah wa ashhadu anna Muhammadan abduhu wa rasuluh.
मतलब- तमाम इबादतें, नमाज़ें और पाकीज़ा बातें अल्लाह ही के लिए हैं। ऐ नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम! आप पर सलाम, अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हों। हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलाम हो। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम उसके बंदे और रसूल हैं।
दुरूद-ए-इब्राहीमी पढ़ें
अरबी-
اللّٰهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
اللّٰهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
हिंदी में पढ़ें-
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।
अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मद, कमा बारकता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।
Hinglish-
Allahumma salli ala Muhammadin wa ala aali Muhammad, kama sallaita ala Ibrahima wa ala aali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed.
Allahumma barik ala Muhammadin wa ala aali Muhammad, kama barakta ala Ibrahima wa ala aali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed.
मतलब- ऐ अल्लाह! मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा, जिस तरह तूने इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमाई। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह! मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जिस तरह तूने इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फ़रमाई।
क़ुरआनी दुआ पढ़ें
दुरूद के बाद यह दुआ पढ़ सकते हैं-
अरबी-
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
हिंदी में पढ़ें-
रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतंव व फ़िल आख़िरति हसनतंव व क़िना अज़ाबन्नार।
Hinglish-
Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina azaban-nar.
मतलब- ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई अता फ़रमा और आख़िरत में भी भलाई अता फ़रमा और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।
हवाला- सूरह अल-बक़रह, 2:201।
सलाम फेरें
पहले दाईं तरफ़ चेहरा फेरकर सलाम कहें, फिर बाईं तरफ़ चेहरा फेरकर सलाम कहें।
अरबी-
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ
हिंदी में पढ़ें- अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह।
Hinglish- Assalamu alaikum wa rahmatullah.
मतलब- तुम पर सलामती हो और अल्लाह की रहमत हो।
इस तरह असर की 4 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ पूरी हो जाती है।
असर की नमाज़ का आसान चार्ट
| रकअत | क़ियाम में क्या पढ़ें? | आगे क्या करें? |
|---|---|---|
| पहली | सना, तअव्वुज़, बिस्मिल्लाह, फ़ातिहा और दूसरी सूरह | रुकू और दो सज्दे |
| दूसरी | बिस्मिल्लाह, फ़ातिहा और दूसरी सूरह | रुकू, दो सज्दे और अत्तहिय्यात |
| तीसरी | बिस्मिल्लाह और फ़ातिहा | रुकू और दो सज्दे |
| चौथी | बिस्मिल्लाह और फ़ातिहा | रुकू, दो सज्दे, अत्तहिय्यात, दुरूद और सलाम |
यह चार्ट चार रकअत फ़र्ज़ नमाज़ का आसान ख़ुलासा है। इमाम के पीछे क़िरअत और कुछ दूसरे फ़िक़्ही मसलों में अपने मसलक के मुताबिक़ अमल करें।
असर की नमाज़ की फ़ज़ीलत
असर की नमाज़ की अहमियत क़ुरआन और सहीह हदीस से साबित है।
क़ुरआन में असर की नमाज़ की अहमियत
अल्लाह सुब्हानवा तआला फरमाते है-
अरबी-
حَافِظُوا عَلَى الصَّلَوَاتِ وَالصَّلَاةِ الْوُسْطَىٰ وَقُومُوا لِلَّهِ قَانِتِينَ
हिंदी में पढ़ें-
हाफ़िज़ू अलस्सलवाति वस्सलातिल वुस्ता व क़ूमू लिल्लाहि क़ानितीन।
Hinglish-
Hafizu alas-salawati was-salatil-wusta wa qumu lillahi qaniteen.
मतलब- तमाम नमाज़ों की हिफ़ाज़त करो, ख़ास तौर पर बीच की नमाज़ की, और अल्लाह के सामने अदब से खड़े रहो।
हवाला- सूरह अल-बक़रह, 2:238। कई मुफ़स्सिरीन ने इस आयत में “सलातुल वुस्ता” से असर की नमाज़ मुराद ली है।
असर की नमाज़ छोड़ने पर सख़्त चेतावनी
हज़रत बुरैदा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने असर की नमाज़ के बारे में सख़्त चेतावनी दी।
हदीस का अरबी हिस्सा-
مَنْ تَرَكَ صَلَاةَ الْعَصْرِ فَقَدْ حَبِطَ عَمَلُهُ
हिंदी में पढ़ें-
मन तरका सलातल अस्रि फ़क़द हबिता अमलुहू।
Hinglish-
Man taraka salatal-asri faqad habita amaluhu.
मतलब- जिसने असर की नमाज़ छोड़ दी, उसका अमल बर्बाद हो गया।
हवाला- सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 553।
इस हदीस से असर की नमाज़ की अहमियत और उसे जान-बूझकर छोड़ने की संजीदगी मालूम होती है। इसलिए कोशिश करें कि असर की नमाज़ उसके वक़्त में अदा हो।
असर की नमाज़ के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
1. असर की नमाज़ में कितनी रकअत होती हैं?
असर की 4 रकअत फ़र्ज़ हैं। आम तौर पर इनसे पहले 4 रकअत सुन्नत-ए-ग़ैर-मुअक्कदा भी पढ़ी जाती हैं। इस तरह कुल 8 रकअत पढ़ी जा सकती हैं।
2. असर की 4 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ कैसे पढ़ें?
पहली दो रकअतों में सूरह फ़ातिहा के बाद दूसरी सूरह पढ़ें। तीसरी और चौथी रकअत में आम तौर पर सूरह फ़ातिहा पढ़ें। हर रकअत में रुकू और दो सज्दे करें। दूसरी रकअत के बाद अत्तहिय्यात पढ़ें और चौथी के बाद अत्तहिय्यात, दुरूद, दुआ और सलाम के साथ नमाज़ पूरी करें।
3. क्या असर की नमाज़ में आवाज़ से क़िरअत की जाती है?
असर की फ़र्ज़ नमाज़ आम तौर पर सिर्री नमाज़ है, यानी क़िरअत धीमी आवाज़ में की जाती है। जमाअत में इमाम के पीछे क़िरअत से जुड़े मसलों में फ़िक़्ही मसलकों के मुताबिक़ रहनुमाई लें।
4. क्या असर से पहले 4 सुन्नत पढ़ना ज़रूरी है?
असर से पहले 4 रकअत सुन्नत-ए-ग़ैर-मुअक्कदा पढ़ना मुस्तहब है। यह 4 रकअत फ़र्ज़ के बराबर नहीं हैं। फ़र्ज़ नमाज़ की अदायगी ज़रूरी है।
5. असर की नमाज़ का वक़्त कब तक रहता है?
असर का वक़्त ज़ुहर के बाद शुरू होता है और सूरज डूबने से पहले तक रहता है। वक़्त के शुरू होने की सही गणना में फ़िक़्ही मसलक और स्थानीय नमाज़ टाइमटेबल के मुताबिक़ फ़र्क़ हो सकता है। नमाज़ को इतना देर न करें कि सूरज डूबने के क़रीब पहुँच जाए।
असर की नमाज़ के बारे में भरोसेमंद हवाले-
- क़ुरआन: सूरह अल-बक़रह, आयत 238 — नमाज़ों की हिफ़ाज़त की हिदायत।
- सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 552–553 — असर की नमाज़ छोड़ने के बारे में चेतावनी।
- जामे तिर्मिज़ी, हदीस 430 — असर से पहले चार रकअत पढ़ने की फ़ज़ीलत।
- सुनन अबू दाऊद, हदीस 1271 — असर से पहले चार रकअत के बारे में रिवायत।
- सूरह अल-बक़रह, आयत 201 — दुनिया और आख़िरत की भलाई की दुआ।
ऑनलाइन संदर्भ-
- क़ुरआन 2:238: https://quran.com/2/238
- सहीह अल-बुख़ारी 553: https://sunnah.com/bukhari:553
- असर से पहले चार रकअत की रिवायत: https://sunnah.com/abudawud:1271
आख़िरी बात – नमाज़ सीखते समय अरबी इबारत और उसका सही तलफ़्फ़ुज़ किसी भरोसेमंद क़ारी या नमाज़ सिखाने वाले से सुनकर सीखना बेहतर है। हिंदी और Hinglish में लिखे अल्फ़ाज़ शुरुआती लोगों की मदद के लिए हैं; वे अरबी तिलावत का पूरी तरह बदल नहीं हैं। कुछ तरीक़ों में फ़िक़्ही मसलकों के मुताबिक़ फ़र्क़ हो सकता है।
अल्लाह हमें पाँचों वक़्त की नमाज़ पाबंदी से अदा करने और सही तरीक़े से इबादत करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
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