Dua e Qunoot in Hindi : दुआ-ए-कुनूत का सही तरीका, अरबी, हिंदी और मतलब
दुआ-ए-कुनूत क्या है?
दुआ-ए-कुनूत एक खास दुआ है, जिसे वित्र नमाज़ में पढ़ा जाता है। इस दुआ में अल्लाह सुब्हानवा तआला से हिदायत, आफियत, रहमत, बरकत और अपनी हिफाज़त की दुआ मांगी जाती है।
भारत में आम तौर पर दो तरह के अल्फाज़ से कुनूत की दुआ पढ़ी जाती है। एक दुआ “अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका” से शुरू होती है, जबकि हदीस में हज़रत हसन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने उन्हें “अल्लाहुम्मा इह्दिनी फीमन हदैत” वाली दुआ सिखाई थी।
दोनों के अल्फाज़ अलग हैं। नीचे पहले हदीस में बयान की गई दुआ दी गई है, फिर आम तौर पर भारत में पढ़ी जाने वाली दुआ का ज़िक्र किया गया है।
1. दुआ-ए-कुनूत अरबी में
اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَ، وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَ، وَتَوَلَّنِي فِيمَنْ تَوَلَّيْتَ، وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَ، وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَ، إِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَى عَلَيْكَ، وَإِنَّهُ لَا يَذِلُّ مَنْ وَالَيْتَ، وَلَا يَعِزُّ مَنْ عَادَيْتَ، تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَ۔
2. दुआ-ए-कुनूत हिंदी में पढ़ने का तरीका
अल्लाहुम्मा इह्दिनी फीमन हदैत, व आफिनी फीमन आफैत, व तवल्लनी फीमन तवल्लैत, व बारिक ली फीमा आतैत, व क़िनी शर्रा मा क़ज़ैत, इन्नका तक़ज़ी व ला युक़ज़ा अलैक, व इन्नहू ला यज़िल्लु मन वालैत, व ला यइज़्ज़ु मन आदैत, तबारकता रब्बना व तआलैत।
नोट- हिंदी में लिखे अल्फाज़ अरबी का केवल उच्चारण समझने में मदद करते हैं। सही मख़ारिज़ और तलफ़्फ़ुज़ के लिए किसी जानकार क़ारी से सुनकर सीखना बेहतर है।
3. Dua e Qunoot in Hinglish
Allahumma ihdini fiman hadayt, wa aafini fiman aafayt, wa tawallani fiman tawallayt, wa baarik li fima aatayt, wa qini sharra ma qadayt, innaka taqdi wa la yuqda alayk, wa innahu la yadhillu man walayt, wa la ya’izzu man adayt, tabarakta Rabbana wa ta’alayt.
4. दुआ-ए-कुनूत का हिंदी मतलब
ऐ अल्लाह! मुझे भी उन लोगों में शामिल करके हिदायत दे, जिन्हें तूने हिदायत दी है। मुझे भी उन लोगों में आफियत अता फरमा, जिन्हें तूने आफियत दी है। मेरी सरपरस्ती फरमा, उन लोगों की तरह जिनकी तूने सरपरस्ती फरमाई है।
तूने मुझे जो कुछ अता किया है, उसमें बरकत दे और मुझे उस बुराई से महफूज़ रख, जिसका तूने फैसला फरमाया है। बेशक, फैसला तू ही फरमाता है और तेरे खिलाफ कोई फैसला नहीं कर सकता।
जिसका तू मददगार और सरपरस्त हो, वह ज़लील नहीं होता और जिसका तू मुखालिफ हो, वह इज़्ज़त नहीं पा सकता। ऐ हमारे रब! तू बहुत बरकत वाला और बुलंदो-बाला है।
5. Dua e Qunoot Meaning in English
O Allah, guide me among those You have guided, grant me well-being among those You have granted well-being, and take me under Your care among those You have taken under Your care.
Bless me in what You have given me and protect me from the evil of what You have decreed. Indeed, You decree, and none can decree against You. The one whom You support is never humiliated, and the one who opposes You cannot attain true honor. Blessed are You, our Lord, and Exalted are You.
6. हदीस का हवाला
हज़रत हसन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने उन्हें कुछ अल्फाज़ सिखाए, जिन्हें वह वित्र नमाज़ में पढ़ते थे। उनमें दुआ के ये अल्फाज़ शामिल हैं-
اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَ
इस रिवायत में हिदायत, आफियत, बरकत और अल्लाह की पनाह मांगने की तालीम मिलती है।
हदीस का हवाला –
- किताब- सुनन अबू दाऊद
- हदीस नंबर- 1425
- रावी- हज़रत हसन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा)
- दर्जा- शेख अल्बानी ने इसे सहीह कहा है।
हवाला – https://sunnah.com/abudawud:1425
इमाम तिर्मिज़ी की जामिअ और सुनन नसाई में भी इस दुआ से जुडी रिवायतें मिलती हैं।
7. कुरआन से क्या रहनुमाई मिलती है?
कुरआन में वित्र नमाज़ के लिए पूरी दुआ-ए-कुनूत को इसी क्रम में बयान नहीं किया गया है। हालांकि, कुरआन में दुआ करने, हिदायत मांगने और अल्लाह से मदद तलब करने की तालीम मौजूद है।
सूरह अल-फ़ातिहा, आयत 6
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
हिंदी में पढ़ें- इहदिनस सिरातल मुस्तक़ीम।
मतलब- हमें सीधे रास्ते की हिदायत दे।
यह आयत दुआ-ए-कुनूत के उस मज़मून से मेल खाती है, जिसमें अल्लाह से हिदायत मांगी जाती है। लेकिन इसे दुआ-ए-कुनूत का पूरा कुरआनी पाठ नहीं समझना चाहिए।
हवाला – कुरआन, सूरह अल-फ़ातिहा 1:6।
कुरआन में अल्लाह सुब्हानवा तआला फरमाते है कि उससे दुआ करो, वह तुम्हारी दुआ का जवाब देगा।
सूरह ग़ाफ़िर, आयत 60
ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ
मतलब- मुझसे दुआ करो, मैं तुम्हारी दुआ क़बूल करूंगा।
हवाला – कुरआन, सूरह ग़ाफ़िर 40:60।
8. दुआ-ए-कुनूत की फज़ीलत
1. हिदायत की दुआ
इस दुआ में बंदा अल्लाह से सीधे रास्ते पर चलने और हिदायत पाने की दरख्वास्त करता है।
2. आफियत की दरख्वास्त
दुआ में आफियत मांगी जाती है। इसमें भलाई, सलामती और अल्लाह की तरफ से हिफाज़त की उम्मीद शामिल है।
3. रिज़्क़ और नेमतों में बरकत
बंदा अल्लाह से अपनी दी हुई नेमतों में बरकत मांगता है। यह इंसान को शुक्रगुज़ार बनने की याद दिलाता है।
4. तक़दीर के फैसलों में पनाह
दुआ में अल्लाह से उन फैसलों के बुरे असर से हिफाज़त मांगी जाती है, जो बंदे के लिए तकलीफ का सबब बन सकते हैं।
5. अल्लाह पर भरोसा
इसके अल्फाज़ इंसान को याद दिलाते हैं कि असल इख्तियार अल्लाह सुब्हानवा तआला के पास है और बंदे को उसी से मदद मांगनी चाहिए।
इन फज़ीलतों को दुआ के अर्थ और हदीस में बयान किए गए मज़मून के तौर पर समझना चाहिए। इस दुआ को पढ़ने के लिए कोई खास दुनियावी नतीजा या तयशुदा इनाम हासिल होने का दावा बगैर दलील नहीं करना चाहिए।
9. वित्र में दुआ-ए-कुनूत कब पढ़ें?
वित्र नमाज़ में कुनूत पढ़ने के तरीके में फिक़्ही इख्तिलाफ़ पाया जाता है। कुछ फिक़्ही तरीकों में इसे तीसरी रकअत में रुकू से पहले पढ़ा जाता है, जबकि दूसरे तरीकों में रुकू के बाद पढ़ा जाता है।
भारत में आम तौर पर प्रचलित तरीके के अनुसार –
- वित्र की तीसरी रकअत में सूरह फ़ातिहा और दूसरी सूरह पढ़ें।
- तकबीर कहकर हाथ उठाएं और फिर हाथ बांध लें।
- दुआ-ए-कुनूत पढ़ें।
- इसके बाद रुकू और बाकी नमाज़ पूरी करें।
अपने घर या मस्जिद में जिस तरीके से नमाज़ पढ़ते हैं, उसके सही अमल के लिए भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई ले सकते हैं।
हवाला – मिस्र के दार अल-इफ्ता ने वित्र में कुनूत के बारे में अलग-अलग फिक़्ही राय का ज़िक्र किया है।
https://www.dar-alifta.org/en/fatwa/details/23880/juristic-views-on-qunut-in-witr-and-fajr-prayers
10. भारत में पढ़ी जाने वाली दूसरी दुआ
भारत में बहुत से लोग वित्र नमाज़ में यह दुआ पढ़ते हैं, जो “अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका” से शुरू होती है।
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ يَفْجُرُكَ۔
हिंदी में पढ़ें-
अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका व नस्तग़फिरुका व नुमिनु बिका व नतवक्कलु अलैका व नुस्नी अलैकल खैर, व नश्कुरुका व ला नक्फुरुका व नख़्लउ व नतरुकु मय्यफजुरुक।
यह मशहूर दुआ हदीस में हज़रत हसन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत की गई दुआ के अल्फाज़ से अलग है। इसलिए दोनों को एक ही पाठ या एक ही हदीस के अल्फाज़ बताना सही नहीं होगा।
11. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. दुआ-ए-कुनूत क्या है?
दुआ-ए-कुनूत वित्र नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दुआ है। इसमें अल्लाह से हिदायत, आफियत, बरकत और हिफाज़त मांगी जाती है।
2. Dua e Qunoot in Hindi कैसे पढ़ें?
आप ऊपर दिए गए हिंदी तलफ़्फ़ुज़ को देखकर पढ़ सकते हैं। बेहतर तलफ़्फ़ुज़ के लिए अरबी पाठ को किसी क़ारी या जानकार से सुनकर सीखें।
3. क्या दुआ-ए-कुनूत कुरआन में है?
दुआ-ए-कुनूत का पूरा मशहूर पाठ कुरआन की किसी एक आयत के रूप में मौजूद नहीं है। हज़रत हसन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) को सिखाई गई दुआ का हवाला हदीस में मिलता है।
4. दुआ-ए-कुनूत वित्र में कब पढ़ते हैं?
इस बारे में फिक़्ही तरीके अलग हैं। भारत में प्रचलित हनफ़ी तरीके में तीसरी रकअत में सूरह पढ़ने के बाद, रुकू से पहले कुनूत पढ़ी जाती है।
5. क्या “अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका” और “अल्लाहुम्मा इह्दिनी” एक ही दुआ हैं?
नहीं। दोनों के अल्फाज़ अलग हैं। “अल्लाहुम्मा इह्दिनी फीमन हदैत” वाली दुआ हज़रत हसन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत की गई है और सुनन अबू दाऊद 1425 में दर्ज है। “अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका” भारत में पढ़ी जाने वाली दूसरी मशहूर दुआ है।
नतीजा
दुआ-ए-कुनूत बंदे को अल्लाह सुब्हानवा तआला से हिदायत, आफियत, बरकत और हिफाज़त मांगने की तालीम देती है। इसे सही अल्फाज़ और समझ के साथ सीखना बेहतर है। अरबी पाठ, हिंदी उच्चारण और हदीस के हवाले की मदद से आप इस दुआ को याद कर सकते हैं और अपनी नमाज़ में सही तरीके से पढ़ना सीख सकते हैं।
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