औलाद के लिए दुआ

हर शादीशुदा जोड़े की दिली ख्वाहिश होती है कि अल्लाह उन्हें नेक, सेहतमंद और उनकी आँखों की ठंडक बनने वाली औलाद अता फ़रमाए। इस्लाम में औलाद को अल्लाह की बड़ी नेमत माना गया है और अपनी ज़रूरत के लिए अल्लाह से दुआ करना मोमिन के लिए बहुत अहम अमल है।
कुरआन में हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की औलाद के लिए की गई दुआ का खास तौर पर ज़िक्र मिलता है। उन्होंने अपनी उम्र बढ़ जाने और अपनी बीवी के बांझ होने के बावजूद अल्लाह की रहमत से मायूस होकर दुआ छोड़ नहीं दी। अल्लाह ने उनकी दुआ कबूल फ़रमाई और उन्हें हज़रत याह्या अलैहिस्सलाम की खुशखबरी दी।
इसलिए अगर कोई शख्स औलाद के लिए दुआ करना चाहता है तो इन कुरआनी दुआओं को समझकर, यक़ीन और सब्र के साथ अल्लाह से मांग सकता है।
औलाद के लिए दुआ – सबसे मशहूर कुरआनी दुआ
अरबी –
رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ
हिंदी पढ़ने का तरीका –
रब्बि हब ली मिल्लदुन्का ज़ुर्रिय्यतन तय्यिबतन इन्नका समीउद्दुआ
Hinglish:
Rabbi hab li mil-ladunka zurriyyatan tayyibatan innaka samee’ud-dua.
हिंदी मतलब –
ऐ मेरे रब! मुझे अपनी तरफ़ से नेक और पाकीज़ा औलाद अता फ़रमा। बेशक तू दुआ सुनने वाला है।
English मीनिंग –
“My Lord, grant me from Yourself righteous offspring. Surely, You are the Hearer of supplication.”
यह दुआ सूरह आले-इमरान की आयत 38 में हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की दुआ के तौर पर मौजूद है। इसके तुरंत बाद अगली आयत में फ़रिश्तों द्वारा उन्हें हज़रत याह्या अलैहिस्सलाम की खुशखबरी दिए जाने का ज़िक्र आता है।
कुरआन – सूरह आले-इमरान, 3:38-39
हज़रत ज़करिया की दूसरी दुआ
औलाद के लिए कुरआन में हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की एक और बहुत मशहूर दुआ सूरह अल-अंबिया में आती है।
अरबी –
رَبِّ لَا تَذَرْنِي فَرْدًا وَأَنتَ خَيْرُ الْوَارِثِينَ
हिंदी पढ़ने का तरीका –
रब्बि ला तज़रनी फ़र्दन व अंता ख़ैरुल वारिसीन
हिंगलिश –
Rabbi la tazarni fardan wa anta khairul waaritheen.
हिंदी मतलब-
ऐ मेरे रब! मुझे अकेला और बेऔलाद न छोड़ और तू सबसे बेहतर वारिस है।
English Meaning-
“My Lord, do not leave me childless, while You are the best of inheritors.”
यह दुआ सूरह अल-अंबिया, आयत 89 में दर्ज है। इसके बाद आयत 90 में बताया गया है कि अल्लाह ने उनकी दुआ कबूल की और उन्हें याह्या अलैहिस्सलाम अता किए।
कुरआन – सूरह अल-अंबिया, 21:89-90
हज़रत ज़करिया की दिल से की गई दुआ
सूरह मरयम में हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की दुआ का और अधिक तफ़सीली ज़िक्र मिलता है।
अरबी-
رَبِّ إِنِّي وَهَنَ الْعَظْمُ مِنِّي وَاشْتَعَلَ الرَّأْسُ شَيْبًا وَلَمْ أَكُن بِدُعَائِكَ رَبِّ شَقِيًّا
हिंदी पढ़ने का तरीका-
रब्बि इन्नी वहनल-अज़्मु मिन्नी वश्तअलर-रअ्सु शैयबन व लम अकुम बिदुआइका रब्बि शक़िय्या
Hinglish:
Rabbi inni wahanal-‘azmu minni washta’alar-ra’su shayban wa lam akun bidu’aika rabbi shaqiyya.
हिंदी मतलब-
ऐ मेरे रब! मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गई हैं और सिर सफेद बालों से भर गया है, लेकिन ऐ मेरे रब! मैं तुझसे दुआ करके कभी महरूम नहीं रहा।
इसके बाद हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम ने अपनी औलाद की ज़रूरत बयान की और अल्लाह से अपने लिए एक वारिस की दुआ की।
कुरआन – सूरह मरयम, 19:4-5
औलाद के लिए एक और खूबसूरत कुरआनी दुआ
कुरआन में नेक बीवी-बच्चों और परिवार को आँखों की ठंडक बनाने की यह दुआ भी मौजूद है।
अरबी-
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
हिंदी पढ़ने का तरीका-
रब्बना हब लना मिन अज़्वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्रता अयुनिन वजअलना लिल-मुत्तक़ीना इमामा
Hinglish:
Rabbana hab lana min azwajina wa zurriyyatina qurrata a’yunin waj’alna lil-muttaqeena imama.
हिंदी मतलब-
ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और हमारी औलाद की तरफ़ से आँखों की ठंडक अता फ़रमा और हमें परहेज़गारों का पेशवा बना।
English Meaning-
“Our Lord! Grant us from our spouses and offspring comfort to our eyes and make us an example for the righteous.”
कुरआन- सूरह अल-फ़ुरक़ान, 25:74
यह दुआ सिर्फ़ औलाद मिलने की मांग नहीं है, बल्कि ऐसी औलाद और ऐसा परिवार मांगने की दुआ है जो इंसान के लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में खुशी और सुकून का सबब बने।
हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की दुआ का ख़ास सबक
हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम के वाक़ये में उन लोगों के लिए बहुत बड़ा सबक है जो औलाद की ख्वाहिश रखते हैं लेकिन लंबे समय से इंतज़ार कर रहे हैं।
कुरआन बताता है कि उन्होंने अपनी कमज़ोरी और अपनी बीवी की हालत का ज़िक्र अल्लाह के सामने किया, फिर भी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं हुए। सूरह मरयम में उनके अल्फ़ाज़ से यह बात साफ़ होती है कि उन्होंने पहले भी अल्लाह से दुआ की थी और अपने रब से दुआ करने को कभी नाकामी नहीं समझा।
फिर अल्लाह ने उनकी दुआ कबूल की और उन्हें याह्या अलैहिस्सलाम की खुशखबरी दी। सूरह आले-इमरान में भी इस दुआ के बाद याह्या अलैहिस्सलाम की बशारत का ज़िक्र है।
इससे यह समझ आता है कि दुआ करते समय इंसान को अल्लाह की कुदरत और रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।
औलाद के लिए दुआ कैसे करें?
औलाद के लिए दुआ करते समय ऊपर दी गई कुरआनी दुआएँ पढ़ी जा सकती हैं। इसके साथ अपनी ज़बान में भी अल्लाह से अपनी ज़रूरत मांगना जायज़ है।
मसलन आप कह सकते हैं –
“ऐ अल्लाह! मुझे नेक, सेहतमंद और मेरे लिए दुनिया और आख़िरत में खैर का सबब बनने वाली औलाद अता फ़रमा।”
दुआ करते समय दिल में यह यक़ीन रखें कि अल्लाह आपकी बात सुनता है। साथ ही दुआ को किसी ऐसी निश्चित संख्या, दिन या नतीजे से न जोड़ें जिसकी दलील कुरआन या सहीह हदीस में मौजूद न हो।
क्या औलाद के लिए कोई खास संख्या में दुआ पढ़नी चाहिए?
इन कुरआनी दुआओं के लिए ऐसी कोई खास संख्या यहां तय नहीं की गई है कि इन्हें जरुरी तौर से 11, 41, 100 या किसी और खाश संख्या में पढ़ना ही होगा।
इसलिए इन्हें समझकर और दिल से पढ़ना बेहतर है, साथ ही अपनी ज़रूरत के मुताबिक अल्लाह से दुआ करना चाहिए।
क्या सिर्फ़ दुआ करना ही काफी है?
दुआ बहुत अहम इबादत है, लेकिन अगर किसी शादीशुदा जोड़े को औलाद हासिल करने में परेशानी हो रही हो तो दुआ के साथ जायज़ और मुनासिब इलाज तथा डॉक्टर से मशवरा भी किया जा सकता है।
इलाज करवाना दुआ और तवक्कुल के खिलाफ़ नहीं है। इंसान अल्लाह से मदद मांगते हुए जायज़ असबाब भी अपना सकता है।
औलाद के लिए दुआ की फ़ज़ीलत
औलाद के लिए दुआ की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि कुरआन खुद हमें अल्लाह के नेक बंदों और पैग़म्बरों की दुआएँ सिखाता है।
हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम ने औलाद के लिए दुआ की और अल्लाह ने उनकी दुआ को कुबूल करके उन्हें याह्या अलैहिस्सलाम की खुशखबरी दी।
इस वाक़ये से कई अहम बातें सीखने को मिलती हैं –
- अल्लाह से अपनी ज़रूरत मांगनी चाहिए।
- दुआ करते हुए अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।
- सिर्फ़ औलाद नहीं, बल्कि नेक और अच्छी औलाद की दुआ करनी चाहिए।
- दुआ के साथ सब्र और जायज़ असबाब अपनाने चाहिए।
- दुआ के नतीजे का फैसला अल्लाह की हिकमत पर छोड़ना चाहिए।
औलाद के लिए दुआ में क्या मांगना चाहिए?
सिर्फ़ बच्चे की तादाद या जल्द औलाद मिलने की दुआ करने के बजाय यह भी मांगना चाहिए कि या अल्लाह –
- नेक औलाद अता फ़रमाए।
- औलाद को सेहत और सलामती दे।
- औलाद को ईमान और अच्छा अख़लाक़ दे।
- औलाद को माँ-बाप के लिए आँखों की ठंडक बनाए।
- माँ और बच्चे दोनों के लिए आसानी और आफ़ियत अता फ़रमाए।
- औलाद को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी दे।
कुरआन में भी “नेक औलाद” और ऐसी औलाद की दुआ मिलती है जो आँखों की ठंडक बने।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. औलाद के लिए सबसे मशहूर दुआ कौन सी है?
औलाद के लिए सबसे मशहूर कुरआनी दुआओं में हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की यह दुआ शामिल है-
“रब्बि हब ली मिल्लदुन्का ज़ुर्रिय्यतन तय्यिबतन इन्नका समीउद्दुआ।”
यह सूरह आले-इमरान, आयत 38 में है।
2. क्या बच्चा होने के लिए हज़रत ज़करिया की दुआ पढ़ सकते हैं?
जी हाँ। यह कुरआन में हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की दुआ के तौर पर मौजूद है। इसे पढ़कर अल्लाह से नेक औलाद की दुआ की जा सकती है।
3. क्या औलाद के लिए दुआ की कोई खास गिनती है?
इन दुआओं के लिए कोई खास संख्या इस लेख में तय नहीं की जा रही है, क्योंकि इसके लिए स्पष्ट दलील ज़रूरी है। आप इन्हें अपनी सहूलियत के मुताबिक पढ़कर अल्लाह से दुआ कर सकते हैं।
4. क्या सिर्फ़ दुआ से बच्चा होना तय है?
दुआ अल्लाह से मदद मांगने का अहम ज़रिया है, लेकिन किसी दुआ के बारे में यह दावा नहीं करना चाहिए कि उसे पढ़ने से निश्चित समय में या निश्चित रूप से बच्चा पैदा होगा। नतीजा अल्लाह की मशीयत और हिकमत पर है।
5. क्या औलाद के लिए दुआ के साथ इलाज करवाया जा सकता है?
जी हाँ। अगर गर्भधारण में परेशानी हो तो दुआ के साथ जायज़ मेडिकल सलाह और इलाज लेना भी किया जा सकता है। इंसान अल्लाह पर भरोसा रखते हुए जायज़ असबाब अपनाता है।
आख़िरी बात
औलाद अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। अगर कोई शख्स औलाद की ख्वाहिश रखता है तो उसे अल्लाह से बार-बार दुआ करनी चाहिए और उसकी रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।
हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम की दुआ हमें यही सबक देती है कि हालात मुश्किल होने के बावजूद बंदा अपने रब के सामने अपनी ज़रूरत रखता रहे।
رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ
“ऐ मेरे रब! मुझे अपनी तरफ़ से नेक औलाद अता फ़रमा। बेशक तू दुआ सुनने वाला है।”
अल्लाह तआला हर उस शख्स की जायज़ दुआ कबूल फ़रमाए जो नेक और सलामत औलाद की ख्वाहिश रखता है, और हर परिवार को नेक, सेहतमंद और आँखों की ठंडक बनने वाली औलाद अता फ़रमाए। आमीन।
कुरआन के मुख्य रेफरेंस:
सूरह आले-इमरान 3:38-40
सूरह मरयम 19:4-7
सूरह अल-अंबिया 21:89-90
सूरह अल-फ़ुरक़ान 25:74
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