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दर्द से राहत की दुआ (Dua for pain relief in Hindi – 1 Powerful Authentic dua)

दर्द से राहत की दुआ (Dua for pain relief in Hindi)

दर्द और तकलीफ़ इंसान की ज़िंदगी का हिस्सा हैं। कभी सिर में दर्द होता है, कभी पेट में, कभी कमर या जिस्म के किसी दूसरे हिस्से में तकलीफ़ महसूस होती है। ऐसे मुश्किल वक़्त में एक मुसलमान इलाज और दवा के साथ-साथ अल्लाह सुब्हानवा तआला से शिफ़ा की दुआ भी करता है।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने जिस्म में दर्द महसूस होने पर एक खास दुआ सिखाई है। यह दुआ सहीह हदीस से साबित है और इसे दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर पढ़ने की तालीम दी गई है।

दर्द से राहत की दुआ (Dua for pain relief in Hindi)

Arabic

بِسْمِ اللَّهِ

इसे 3 बार पढ़ें।

फिर 7 बार पढ़ें –

أَعُوذُ بِاللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِرُ

हिंदी में दुआ

बिस्मिल्लाह

इसे 3 बार पढ़ें।

फिर 7 बार पढ़ें –

अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िरु।

Hinglish

Bismillah

Isko 3 baar padhein.

Phir 7 baar पढ़ें –

A’udhu Billahi wa Qudratihi min sharri ma ajidu wa uhadhiru.

दुआ का मतलब

हिंदी तर्जुमा

मैं अल्लाह और उसकी क़ुदरत की पनाह मांगता हूँ उस तकलीफ़ और बुराई से जो मैं महसूस कर रहा हूँ और जिससे मुझे डर है।

English Meaning

I seek refuge in Allah and in His Power from the evil of what I feel and what I fear.

यह दुआ पढ़ने का सही तरीका (Dua for pain relief in Hindi)

जब जिस्म के किसी हिस्से में दर्द या तकलीफ़ महसूस हो, तो –

  1. दर्द वाली जगह पर अपना हाथ रखें।
  2. बिस्मिल्लाह 3 बार पढ़ें।
  3. इसके बाद ऊपर दी गई दुआ 7 बार पढ़ें।
  4. अल्लाह सुब्हानवा तआला से शिफ़ा और राहत की उम्मीद रखें।
  5. ज़रूरत होने पर डॉक्टर और इलाज का सहारा भी लें।

यह तरीका रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की तालीम से हासिल है।

हदीस का हवाला (Dua for pain relief in Hindi)

हज़रत उस्मान बिन अबुल आस अस-सक़फ़ी रदिअल्लाहु ताला अन्हु  ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से अपने जिस्म में महसूस होने वाले दर्द की शिकायत की।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने उन्हें तालीम दी कि दर्द वाली जगह पर हाथ रखें, बिस्मिल्लाह तीन बार कहें और फिर अल्लाह की पनाह और उसकी क़ुदरत की दुआ सात बार पढ़ें।

– Sahih Muslim, Hadith 2202.

इस हदीस से हमें मालूम होता है कि दर्द और तकलीफ़ के वक़्त अल्लाह से मदद मांगना सुन्नत का हिस्सा है।

इस दुआ का अहम पैग़ाम (Dua for pain relief in Hindi)

यह दुआ हमें सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं सिखाती, बल्कि तवक्कुल का एक खूबसूरत सबक भी देती है।

जब इंसान दर्द महसूस करता है, तो वह अपनी कमज़ोरी को महसूस करता है। ऐसे वक़्त में अल्लाह की क़ुदरत की पनाह मांगना दिल को सुकून देता है और बंदे को अपने रब की तरफ़ मुतवज्जेह करता है।

एक मुसलमान को यह यक़ीन रखना चाहिए कि असली शिफ़ा देने वाला अल्लाह सुब्हानवा तआला है।

कुरआन में शिफ़ा का ज़िक्र (Dua for pain relief in Hindi)

कुरआन में अल्लाह सुब्हानवा तआला ने अपनी रहमत और शिफ़ा का ज़िक्र किया है। अल्लाह की किताब मोमिनों के लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया है।

बीमारी या दर्द के दौरान कुरआन की तिलावत, दुआ और अल्लाह से मदद मांगना एक मोमिन के लिए रूहानी ताक़त और सुकून का ज़रिया बन सकता है।

साथ ही, इस्लाम इलाज से मना नहीं करता। इसलिए अगर दर्द ज़्यादा हो, लगातार बना रहे या गंभीर हो, तो डॉक्टर से मशवरा करना भी ज़रूरी है।

दुआ और इलाज दोनों ज़रूरी हैं (Dua for pain relief in Hindi)

इस्लाम हमें सिर्फ़ दुआ करने या सिर्फ़ दुनियावी असबाब अपनाने तक सीमित नहीं करता। एक मुसलमान अल्लाह पर भरोसा रखते हुए जायज़ इलाज भी करता है।

इसलिए सिर दर्द, पेट दर्द, कमर दर्द या किसी भी लगातार और गंभीर तकलीफ़ की हालत में –

दुआ को मेडिकल इलाज का विकल्प समझना सही नहीं है। दुआ और इलाज दोनों अपने-अपने तौर पर अपनाए जा सकते हैं।

दर्द की दुआ की फ़ज़ीलत (Dua for pain relief in Hindi)

इस सुन्नत दुआ की सबसे बड़ी फ़ज़ीलत यह है कि इसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने दर्द महसूस करने वाले व्यक्ति को खुद सिखाया।

इस दुआ में बंदा –

दुआ पढ़ते समय सच्चे दिल से अल्लाह से राहत और शिफ़ा की उम्मीद रखनी चाहिए।

दर्द के वक़्त मुसलमान क्या करे? (Dua for pain relief in Hindi)

दर्द और बीमारी के वक़्त सब्र करना और अल्लाह की तरफ़ रुजू करना एक मोमिन की खूबसूरत आदत है।

आप यह कर सकते हैं –

1. अल्लाह को याद करें
घबराने के बजाय अल्लाह से मदद मांगें।

2. सुन्नत दुआ पढ़ें
दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर यह दुआ पढ़ें।

3. इलाज कराएं
अगर दर्द गंभीर या लगातार है तो डॉक्टर से सलाह लें।

4. सब्र रखें
मुश्किल और बीमारी के वक़्त अल्लाह से अच्छा गुमान रखें।

5. शिफ़ा की उम्मीद रखें
हर चीज़ अल्लाह के हुक्म से होती है और उसी के पास शिफ़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Dua for pain relief in Hindi)

1. दर्द होने पर कौन सी दुआ पढ़ें?

दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर पहले बिस्मिल्लाह 3 बार पढ़ें। फिर –

अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िरु

इसे 7 बार पढ़ें।

2. क्या यह दुआ सिर दर्द के लिए पढ़ सकते हैं?

जी हाँ। यह हदीस जिस्म में महसूस होने वाले दर्द के बारे में है। सिर सहित जिस्म के किसी दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर इसे पढ़ा जा सकता है।

3. क्या पेट दर्द में भी यह दुआ पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, जिस्म में दर्द महसूस होने पर यह सुन्नत दुआ पढ़ी जा सकती है। लेकिन अगर पेट दर्द गंभीर या लगातार हो तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

4. इस दुआ को कितनी बार पढ़ना चाहिए?

हदीस के मुताबिक बिस्मिल्लाह 3 बार और उसके बाद मुख्य दुआ 7 बार पढ़ी जाती है।

5. क्या सिर्फ़ दुआ पढ़ना काफी है?

दुआ एक मोमिन के लिए बहुत अहम है, लेकिन इस्लाम इलाज और जायज़ असबाब अपनाने की भी तालीम देता है। इसलिए गंभीर या लगातार दर्द में मेडिकल सलाह लेना ज़रूरी है।

नतीजा (Dua for pain relief in Hindi)

दर्द और तकलीफ़ के वक़्त एक मुसलमान का सबसे बड़ा सहारा अल्लाह सुब्हानवा तआला है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने हमें दर्द महसूस होने पर एक आसान और खूबसूरत दुआ सिखाई है।

दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर बिस्मिल्लाह 3 बार और फिर अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िरु 7 बार पढ़ें और अल्लाह से राहत और शिफ़ा की दुआ करें।

अल्लाह सुब्हानवा तआला हम सभी को हर बीमारी, दर्द और तकलीफ़ से शिफ़ा और आफ़ियत अता फरमाए। आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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