फ़ज्र की नमाज़ पढ़ने का तरीका (Fajr Namaz Ka Tarika)

फ़ज्र की नमाज़ क्या है?
फ़ज्र मुसलमानों की पाँच वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ों में से पहली नमाज़ है। इसे सुबह सादिक़ होने के बाद और सूरज निकलने से पहले अदा किया जाता है।
फ़ज्र की नमाज़ में कुल 4 रकअतें पढ़ी जाती हैं-
- 2 रकअत सुन्नत-ए-मुअक्कदा
- 2 रकअत फ़र्ज़
फ़ज्र की 2 सुन्नतों की बहुत फ़ज़ीलत है। हज़रत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम फ़ज्र की सुन्नतों का ख़ास एहतिमाम फ़रमाते थे। (सहीह अल-बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में रिवायत)
इस लेख में हम ख़ास तौर पर फ़ज्र की 2 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ का तरीक़ा सीखेंगे।
नमाज़ से पहले की तैयारी
नमाज़ शुरू करने से पहले इन बातों का ख़याल रखें-
- बदन, कपड़े और नमाज़ की जगह पाक-साफ़ हों।
- वुज़ू किया हुआ हो।
- बदन का ज़रूरी हिस्सा ढका हुआ हो।
- क़िबला यानी ख़ाना-ए-काबा की तरफ़ रुख़ करें।
- फ़ज्र का वक़्त शुरू हो चुका हो।
- दिल में नियत करें कि आप अल्लाह के लिए फ़ज्र की 2 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ रहे हैं।
नियत- नियत दिल के इरादे का नाम है। इसे ज़ुबान से किसी ख़ास अरबी जुमले में कहना ज़रूरी नहीं है। जैसे – ” नियत करता / करती हूँ मैं , 2 रकअत नमाज़ फर्ज पड़ने की , वास्ते अल्लाह ताला के , मुँह मेरा काबे शरीफ की तरफ ”
फ़ज्र की नमाज़ के 10 स्टेप्स (Fajr Namaz Ka Tarika)
1. तकबीर-ए-तहरीमा
क़िबला रुख़ खड़े होकर नमाज़ शुरू करें। तकबीर कहते वक़्त हाथ उठाने का तरीक़ा आपके फ़िक़्ही मसलक के मुताबिक़ हो सकता है।
अरबी-
اللّٰهُ أَكْبَرُ
हिंदी में पढ़ें- अल्लाहु अकबर
Hinglish- Allahu Akbar
मतलब- अल्लाह सबसे बड़ा है।
इसके बाद क़ियाम यानी खड़े होने की हालत में हाथ बाँध लें। हाथ बाँधने की जगह में मसलकों के मुताबिक़ फ़र्क़ पाया जाता है।
2. सना पढ़ें
तकबीर के बाद सना पढ़ें।
अरबी-
سُبْحَانَكَ اللّٰهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ وَلَا إِلٰهَ غَيْرُكَ
हिंदी में पढ़ें-
सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबा-रकस्मुका व तआला जद्दुका व ला इलाहा ग़ैरुक।
Hinglish-
Subhanakallahumma wa bihamdika wa tabarakasmuka wa ta’ala jadduka wa la ilaha ghairuk.
मतलब- ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही हम्द है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।
इसके बाद पढ़ें-
अरबी-
أَعُوذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
हिंदी में पढ़ें- अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम।
Hinglish- A’uzu billahi minash-shaitanir-rajim.
मतलब- मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ शैतान मर्दूद से।
फिर बिस्मिल्लाह पढ़ें।
अरबी-
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी में पढ़ें- बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
Hinglish- Bismillahir-Rahmanir-Raheem.
मतलब- अल्लाह के नाम से शुरू, जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम करने वाला है।
3. सूरह फ़ातिहा पढ़ें
क़ियाम में सूरह फ़ातिहा पढ़ें। इसके बाद कोई दूसरी सूरह या क़ुरआन की कुछ आयतें पढ़ें।
सूरह फ़ातिहा — अरबी-
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
الْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ
हिंदी में पढ़ें-
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।
अर्रहमानिर्रहीम।
मालिकि यौमिद्दीन।
इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन।
इहदिनस्सिरातल मुस्तक़ीम।
सिरातल्लज़ीना अनअम्ता अलैहिम, ग़ैरिल मग़दूबि अलैहिम व लद्दाल्लीन।
Hinglish-
Bismillahir-Rahmanir-Raheem.
Alhamdu lillahi Rabbil Aalameen.
Ar-Rahmanir-Raheem.
Maliki Yawmid-Deen.
Iyyaka na’budu wa iyyaka nasta’een.
Ihdinas-siratal-mustaqeem.
Siratal-lazeena an’amta alaihim, ghairil-maghdubi alaihim wa lad-dalleen.
मतलब- तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जो सारे जहानों का रब है। वह बहुत मेहरबान और रहम करने वाला है। बदले के दिन का मालिक है। हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं। हमें सीधा रास्ता दिखा, उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम फ़रमाया, न कि उनका जिन पर ग़ज़ब हुआ और न गुमराहों का।
ध्यान दें- सूरह फ़ातिहा क़ुरआन की पहली सूरह है। सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 756–757 में नमाज़ में सूरह फ़ातिहा की अहमियत बयान हुई है। इमाम के पीछे पढ़ने के कुछ मसलों में फ़िक़्ही इख़्तिलाफ़ है।
सूरह फ़ातिहा के आख़िर में आमीन कहें
सूरह फ़ातिहा की आख़िरी आयत “व लद्दाल्लीन” पढ़ने के बाद “आमीन” कहें।
अरबी- آمِين
हिंदी में पढ़ें: आमीन
Hinglish: Aameen
मतलब: ऐ अल्लाह! हमारी दुआ क़बूल फ़रमा।
नोट – “आमीन” सूरह फ़ातिहा की आयत नहीं है, बल्कि फ़ातिहा के बाद कही जाने वाली दुआ है। इसे कहने का तरीक़ा—आवाज़ से या धीमे—नमाज़ के तरीक़े और फ़िक़्ही मसलक के मुताबिक़ अलग हो सकता है।
4. एक छोटी सूरह पढ़ें
सूरह फ़ातिहा के बाद मिसाल के तौर पर सूरह इख़लास पढ़ सकते हैं।
अरबी-
قُلْ هُوَ اللّٰهُ أَحَدٌ
اللّٰهُ الصَّمَدُ
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
हिंदी में पढ़ें-
क़ुल हुवल्लाहु अहद।
अल्लाहुस्समद।
लम यलिद व लम यूलद।
व लम यकुल्लहू कुफुवन अहद।
Hinglish-
Qul huwallahu ahad.
Allahus-samad.
Lam yalid wa lam yoolad.
Wa lam yakun lahu kufuwan ahad.
मतलब- कह दीजिए कि अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है। और कोई उसके बराबर नहीं।
क़ुरआन का हवाला- सूरह अल-इख़लास, 112:1–4।
5. रुकू करें
अब अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाएँ। दोनों हाथ घुटनों पर रखें और पीठ को जहाँ तक मुमकिन हो सीधा रखें।
रुकू में कम से कम तीन बार यह तस्बीह पढ़ना आम तरीक़ा है।
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
हिंदी में पढ़ें- सुब्हाना रब्बियल अज़ीम।
Hinglish- Subhana Rabbiyal Azeem.
मतलब- मेरा अज़मत वाला रब हर ऐब से पाक है।
6. रुकू से उठें
रुकू से उठते हुए यह पढ़ें-
अरबी:
سَمِعَ اللّٰهُ لِمَنْ حَمِدَهُ
हिंदी में पढ़ें- समिअल्लाहु लिमन हमिदह।
Hinglish- Sami’Allahu liman hamidah.
मतलब- अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी हम्द की।
फिर सीधे खड़े होकर पढ़ें-
अरबी-
رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ
हिंदी में पढ़ें- रब्बना व लकल हम्द।
Hinglish- Rabbana wa lakal hamd.
मतलब- ऐ हमारे रब! तमाम हम्द तेरे ही लिए है।
इस हालत को क़ौमा कहा जाता है। रुकू से उठकर इत्मीनान से सीधे खड़े हों, फिर सज्दे में जाएँ।
7. पहला सज्दा करें
अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे में जाएँ। पेशानी और नाक ज़मीन पर रखें, दोनों हथेलियाँ, दोनों घुटने और पैरों की उँगलियाँ भी ज़मीन पर हों।
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
हिंदी में पढ़ें- सुब्हाना रब्बियल आला।
Hinglish- Subhana Rabbiyal A’la.
मतलब- मेरा सबसे बुलंद रब हर ऐब से पाक है।
इसे तीन बार पढ़ सकते हैं।
8. दोनों सज्दों के बीच बैठें
अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे से उठकर इत्मीनान से बैठें। इस बैठने को जलसा कहते हैं।
इस दौरान यह दुआ पढ़ सकते हैं-
अरबी-
رَبِّ اغْفِرْ لِي
हिंदी में पढ़ें- रब्बिग़फ़िर ली।
Hinglish- Rabbighfir li.
मतलब- ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ फ़रमा।
इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए दूसरा सज्दा करें और उसमें फिर पढ़ें-
अरबी- سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
हिंदी में पढ़ें- सुब्हाना रब्बियल आला।
Hinglish- Subhana Rabbiyal A’la.
इस तरह पहली रकअत पूरी हो गई।
9. दूसरी रकअत पढ़ें
दूसरे सज्दे से उठकर दूसरी रकअत के लिए खड़े हो जाएँ।
दूसरी रकअत में-
- बिस्मिल्लाह पढ़ें।
- सूरह फ़ातिहा पढ़ें।
- कोई दूसरी सूरह या क़ुरआन की कुछ आयतें पढ़ें।
- रुकू करें और तस्बीह पढ़ें।
- रुकू से उठकर क़ौमा में सीधे खड़े हों।
- पहला सज्दा करें।
- दोनों सज्दों के बीच बैठें।
- दूसरा सज्दा करें।
अब दूसरी रकअत के दोनों सज्दे पूरे हो गए। इस बार सज्दे से उठकर खड़े होने के बजाय बैठ जाएँ। अब आख़िरी क़ायदा होगा।
10. क़ायदा, दुरूद और सलाम
अत्तहिय्यात पढ़ें
अरबी-
التَّحِيَّاتُ لِلّٰهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللّٰهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
हिंदी में पढ़ें-
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबात। अस्सलामु अलैका अय्युहन्नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुह। अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन। अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।
Hinglish-
At-tahiyyatu lillahi was-salawatu wat-tayyibat. Assalamu alaika ayyuhan-nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuh. Assalamu alaina wa ala ibadillahis-saliheen. Ashhadu alla ilaha illallah wa ashhadu anna Muhammadan abduhu wa rasooluh.
मतलब- तमाम इबादतें, नमाज़ें और पाकीज़ा बातें अल्लाह ही के लिए हैं। ऐ नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ! आप पर सलाम, अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हों। हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलाम हो। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम उसके बंदे और रसूल हैं।
अत्तहिय्यात में उँगली का इशारा कैसे करें?
अत्तहिय्यात पढ़ते वक़्त तर्जनी यानी शहादत वाली उँगली से इशारा करने का अमल कई मुसलमान करते हैं। यह इशारा अल्लाह की वहदानियत की गवाही से जुड़ा है।
- अत्तहिय्यात में जब “अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह” पढ़ें, तो अपने मसलक के मुताबिक़ तर्जनी से इशारा करें।
- उँगली कब उठानी है, कब नीचे करनी है और उसे हिलाना है या नहीं—इसमें फ़िक़्ही मसलकों के मुताबिक़ फ़र्क़ पाया जाता है।
- इसलिए वही तरीक़ा अपनाएँ जो आपने अपने भरोसेमंद आलिम या नमाज़ सिखाने वाले उस्ताद से सीखा हो।
याद रखें- उँगली का इशारा अत्तहिय्यात के दौरान होता है। दुरूद-ए-इब्राहीमी और सलाम के लिए कोई अलग उँगली का इशारा आम तौर पर नहीं किया जाता।
दुरूद-ए-इब्राहीमी पढ़ें
अरबी-
اللّٰهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
اللّٰهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
हिंदी में पढ़ें-
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।
अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मद, कमा बारकता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।
Hinglish-
Allahumma salli ala Muhammadin wa ala aali Muhammad, kama sallaita ala Ibrahima wa ala aali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed.
Allahumma barik ala Muhammadin wa ala aali Muhammad, kama barakta ala Ibrahima wa ala aali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed.
मतलब- ऐ अल्लाह! मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा, जिस तरह तूने इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमाई। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह! मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जिस तरह तूने इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फ़रमाई।
दुआ पढ़ें
दुरूद के बाद यह क़ुरआनी दुआ पढ़ सकते हैं-
अरबी-
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
हिंदी में पढ़ें-
रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतंव व फ़िल आख़िरति हसनतंव व क़िना अज़ाबन्नार।
Hinglish-
Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina azaban-nar.
मतलब- ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई अता फ़रमा और आख़िरत में भी भलाई अता फ़रमा और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।
क़ुरआन का हवाला- सूरह अल-बक़रह, 2:201।
सलाम फेरें
पहले दाईं तरफ़ चेहरा फेरकर सलाम कहें, फिर बाईं तरफ़ चेहरा फेरकर सलाम कहें।
अरबी-
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ
हिंदी में पढ़ें- अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह।
Hinglish- Assalamu alaikum wa rahmatullah.
मतलब- तुम पर सलामती हो और अल्लाह की रहमत हो।
सलाम के बाद दुआ माँगें
सलाम फेरने के बाद अल्लाह का ज़िक्र करें, मस्नून अज़कार पढ़ें और अल्लाह से अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ माँगें। आप अल्लाह से मग़फ़िरत, सेहत, रिज़्क़, घरवालों की सलामती और आख़िरत की भलाई माँग सकते हैं।
सलाम के बाद हाथ उठाकर दुआ करने के बारे में उलमा के दरमियान फ़िक़्ही इख़्तिलाफ़ है। इसलिए इसे नमाज़ के अंदर की दुआ से अलग समझें और अपने मसलक के भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई लें।
इस तरह फ़ज्र की 2 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ पूरी हो जाती है।
फ़ज्र की नमाज़ का आसान तरीका
| रकअत | पढ़ने और करने का तरीक़ा |
|---|---|
| पहली रकअत | तकबीर, सना, तअव्वुज़, बिस्मिल्लाह, फ़ातिहा, दूसरी सूरह, रुकू और दो सज्दे |
| दूसरी रकअत | बिस्मिल्लाह, फ़ातिहा, दूसरी सूरह, रुकू और दो सज्दे |
| आख़िरी क़ायदा | अत्तहिय्यात, दुरूद-ए-इब्राहीमी, दुआ और सलाम |
यह आसान तरीका याद रखने के लिए है। नमाज़ के दौरान हर मुक़ाम पर इत्मीनान से ठहरना भी ज़रूरी है।
फ़ज्र की नमाज़ की फ़ज़ीलत
फ़ज्र की नमाज़ की अहमियत क़ुरआन और सहीह अहादीस से साबित है।
1. फ़ज्र की तिलावत की गवाही
अल्लाह सुब्हानवा तआला फरमाते है –
وَقُرْآنَ الْفَجْرِ إِنَّ قُرْآنَ الْفَجْرِ كَانَ مَشْهُودًا
हिंदी में पढ़ें- व क़ुरआनल फ़ज्रि इन्ना क़ुरआनल फ़ज्रि काना मशहूदा।
हवाला- सूरह बनी इसराईल (अल-इसरा), 17:78।
इस आयत में फ़ज्र के वक़्त की क़िरअत की अहमियत बयान हुई है।
2. फ़ज्र और ईशा की जमाअत
सहीह अल-बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में फ़ज्र और ईशा की नमाज़ जमाअत के साथ अदा करने की बड़ी फ़ज़ीलत बयान हुई है। मर्दों के लिए जमाअत से नमाज़ की अहमियत को समझना चाहिए।
3. फ़ज्र की दो सुन्नतों की अहमियत
सहीह मुस्लिम, हदीस 725 में फ़ज्र की दो रकअत सुन्नत की ख़ास फ़ज़ीलत बयान हुई है। इसलिए फ़र्ज़ के साथ इन सुन्नतों का भी एहतिमाम करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. फ़ज्र में कितनी रकअतें होती हैं?
फ़ज्र में 2 रकअत सुन्नत-ए-मुअक्कदा और 2 रकअत फ़र्ज़ होती हैं।
2. क्या फ़ज्र की नमाज़ सूरज निकलने के बाद पढ़ सकते हैं?
फ़ज्र का वक़्त सुबह सादिक़ से शुरू होकर सूरज निकलने तक रहता है। सूरज निकलने के बाद फ़ज्र अपने वक़्त में अदा नहीं होती। अगर नमाज़ छूट जाए तो क़ज़ा के मसले में अपने मसलक के किसी भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई लें।
3. क्या फ़ज्र की नमाज़ में सूरह फ़ातिहा के बाद दूसरी सूरह पढ़ना ज़रूरी है?
फ़ज्र की दोनों रकअतों में सूरह फ़ातिहा के साथ क़ुरआन की दूसरी सूरह या कुछ आयतें पढ़ी जाती हैं। अकेले नमाज़ पढ़ने और इमाम के पीछे पढ़ने के कुछ अहकाम अलग हो सकते हैं।
4. क्या फ़ज्र की नमाज़ हिंदी में पढ़ सकते हैं?
नमाज़ की क़िरअत अरबी में होती है। हिंदी या Hinglish उच्चारण सीखने में मदद दे सकते हैं, लेकिन सही अरबी तलफ़्फ़ुज़ सीखने की कोशिश करें। नमाज़ के अरकान और क़िरअत के मसले में किसी जानकार आलिम से रहनुमाई लें।
5. अगर सूरह फ़ातिहा या दूसरी दुआ याद न हो तो क्या करें?
पहले सूरह फ़ातिहा और नमाज़ में पढ़ी जाने वाली बुनियादी इबारतें याद करें। किसी जानकार से सुनकर सही तलफ़्फ़ुज़ सीखें। अगर कोई ज़रूरी हिस्सा याद नहीं है, तो अपनी हालत के मुताबिक़ सही तरीक़ा जानने के लिए आलिम से पूछें।
आख़िरी बात
फ़ज्र की नमाज़ दिन की शुरुआत अल्लाह की इबादत से करने का बेहतरीन ज़रिया है। अगर आप नमाज़ नए सिरे से सीख रहे हैं, तो एक-एक दुआ को सही तलफ़्फ़ुज़ के साथ याद करें और नमाज़ के हर मुक़ाम पर इत्मीनान रखें।
अल्लाह तआला हमें पाँचों वक़्त की नमाज़ पाबंदी से अदा करने और उसे सही तरीक़े से सीखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
क़ुरआन और हदीस के हवाले- सूरह अल-इसरा 17:78; सूरह अल-बक़रह 2:201; सूरह अल-इख़लास 112:1–4; सहीह अल-बुख़ारी 756–757; सहीह मुस्लिम 725।
नोट- यह लेख नमाज़ सीखने में मदद के लिए है। हाथ बाँधने, इमाम के पीछे क़िरअत और कुछ दूसरे फ़िक़्ही मसलों में मसलकों के मुताबिक़ फ़र्क़ हो सकता है। अपने मसलक के भरोसेमंद आलिम से तस्दीक़ कर लें।
जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे – आमीन ।
होम पेज – https://islamicknowledgehindi.com/
हमारे यूट्यूब पेज को चेक करें ( DoFollow ) – https://www.youtube.com/@DaastanByJafar