First mosque in India भारत की पहली मस्जिद : 7 हैरान करने वाली बातें और पुरानी तारीख़

भारत की पहली मस्जिद : First mosque in India

First mosque in India

हिंदुस्तान में इस्लाम की आमद की तारीख़ बहुत पुरानी है। अरब के ताजिरों और हिंदुस्तान के समुद्री इलाक़ों के बीच सदियों से तिजारत के रिश्ते रहे हैं। केरल का मालाबार इलाक़ा इन्हीं पुराने समुद्री रास्तों का एक अहम हिस्सा था।

जब भी भारत की पहली मस्जिद का ज़िक्र आता है, तो सबसे पहले चेरामन जुमा मस्जिद (Cheraman Juma Masjid) का नाम सामने आता है। यह मस्जिद केरल के कोडुंगल्लूर इलाक़े में मौजूद है और इसे आम तौर पर हिंदुस्तान की सबसे पुरानी मस्जिद माना जाता है।

इस मस्जिद की पुरानी तारीख़, इसकी बनावट और इससे जुड़ी मशहूर रवायतें इसे हिंदुस्तान की इस्लामिक विरासत का एक अहम हिस्सा बनाती हैं।

1. भारत की पहली मस्जिद कौन सी है?

भारत की पहली मस्जिद के तौर पर चेरामन जुमा मस्जिद को जाना जाता है।

केरल टूरिज़्म के मुताबिक, इस मस्जिद की तामीर 629 ईस्वी में मलिक इब्न दीनार से मंसूब की जाती है। इस तारीख़ के हिसाब से यह मस्जिद नबी मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम के ज़माने में बनाई गई मानी जाती है।

लेकिन इसकी शुरुआती तामीर की सही तारीख़ के बारे में पूरी तरह इत्तिफ़ाक़ नहीं है। इसलिए 629 ईस्वी को मस्जिद से जुड़ी मशहूर ऐतिहासिक रवायत के तौर पर समझना बेहतर है।

मस्जिद की अहम जानकारी

  • नाम- चेरामन जुमा मस्जिद
  • अंग्रेज़ी नाम- Cheraman Juma Masjid
  • जगह- कोडुंगल्लूर, केरल, भारत
  • ज़िला- त्रिशूर
  • तामीर की मशहूर तारीख़- 629 ईस्वी
  • तामीर से मंसूब नाम- मलिक इब्न दीनार

2. चेरामन जुमा मस्जिद कहाँ है?

चेरामन जुमा मस्जिद भारत के केरल राज्य में है। यह कोडुंगल्लूर शहर के क़रीब मौजूद है।

पुराने ज़माने में केरल का यह इलाक़ा समुद्री तिजारत के लिए मशहूर था। अरब के ताजिर यहाँ मसालों और दूसरी चीज़ों के कारोबार के लिए आते थे। इन व्यापारिक रिश्तों की वजह से अरब और मालाबार के लोगों के बीच मेल-जोल बढ़ा और मज़हबी व सांस्कृतिक ताल्लुक़ात भी क़ायम हुए।

India ki pehli masjid

जगह से जुड़ी जानकारी

  • शहर- कोडुंगल्लूर (Kodungallur)
  • ज़िला- त्रिशूर (Thrissur)
  • राज्य- केरल (Kerala)
  • नज़दीकी बड़ा हवाई अड्डा- कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट
  • पहचान- हिंदुस्तान की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक

 

अगर आप इस मस्जिद की ज़ियारत का इरादा रखते हैं, तो सफ़र से पहले वहाँ जाने के रास्ते और खुलने के वक़्त की जानकारी ज़रूर हासिल कर लें।

3. मलिक इब्न दीनार कौन थे?

मलिक इब्न दीनार को केरल में इस्लाम की शुरुआती तब्लीग़ से जुड़ी अहम शख्सियतों में गिना जाता है।

केरल की पुरानी रवायतों के मुताबिक, मलिक इब्न दीनार और उनके साथियों ने मालाबार के इलाक़े में इस्लाम का पैग़ाम पहुँचाने में अहम किरदार अदा किया। चेरामन जुमा मस्जिद की शुरुआती तामीर भी उन्हीं से मंसूब की जाती है।

पुराने ज़माने में अरब के लोग समुद्री रास्तों से हिंदुस्तान आते थे। उनके ताल्लुक़ात सिर्फ़ कारोबार तक महदूद नहीं थे, बल्कि इल्म, तहज़ीब और मज़हबी विचारों का आदान-प्रदान भी होता था।

यह बात ध्यान में रखना ज़रूरी है कि मलिक इब्न दीनार से जुड़ी हर मशहूर कहानी की तस्दीक़ एक जैसी नहीं है। इसीलिए ऐतिहासिक जानकारी और पुरानी रवायतों में फ़र्क़ रखना चाहिए।

4. राजा चेरामन पेरुमाल और मस्जिद की मशहूर कहानी

चेरामन जुमा मस्जिद से जुड़ी सबसे मशहूर रवायत केरल के राजा चेरामन पेरुमाल के बारे में है।

इस रवायत के मुताबिक, राजा ने एक रात चाँद के दो हिस्से होने का एक अजीब मंज़र देखा। बाद में अरब के ताजिरों से उन्हें मालूम हुआ कि इस्लामी रवायत में चाँद के दो हिस्से होने का वाक़िआ नबी मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम के मोजिज़े से जुड़ा है।

कहानी के मुताबिक, राजा इस वाक़िआ के बारे में और जानने के लिए अरब गए और वहाँ इस्लाम क़ुबूल किया। इसके बाद उन्होंने अपने इलाक़े के लोगों के नाम पैग़ाम भेजे और मलिक इब्न दीनार और  उनके साथियों को केरल आने में मदद की।

इस रवायत में आगे बताया जाता है कि मलिक इब्न दीनार ने स्थानीय हुक्मरानों की मदद से मस्जिद की तामीर कराई।

क्या इस कहानी की पूरी तस्दीक़ होती है?

यह कहानी केरल की मशहूर मौखिक रवायत का हिस्सा है। लेकिन राजा के अरब जाने, नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से मुलाक़ात और इस्लाम क़ुबूल करने की पूरी कहानी को साबित करने वाले उसी ज़माने के दस्तावेज़ काफ़ी नहीं हैं।

इसलिए इसे एक मशहूर रवायत के तौर पर बयान करना चाहिए, न कि ऐसा वाक़िआ जिसके हर हिस्से पर इतिहासकारों का इत्तिफ़ाक़ हो।

5. मस्जिद की बनावट में क्या खास बात है?

चेरामन जुमा मस्जिद की एक खास बात इसकी तामीरी बनावट है। इसमें केरल की पारंपरिक इमारतों और मध्य-पूर्वी इस्लामी तामीर के असर दिखाई देते हैं।

मस्जिद की पुरानी बनावट के कुछ हिस्से केरल की पारंपरिक इमारतों से मिलते-जुलते बताए जाते हैं। इससे पता चलता है कि अलग-अलग इलाक़ों की तामीरी रवायतें स्थानीय माहौल के मुताबिक एक-दूसरे से असर लेती रही हैं।

सदियों के दौरान मस्जिद की कई बार मरम्मत और तौसीअ हुई। 1974 में भी इसमें बड़े बदलाव किए गए। इसी वजह से आज दिखाई देने वाली पूरी इमारत को 629 ईस्वी की असली इमारत समझना सही नहीं होगा।

इसके बावजूद, मस्जिद के पुराने अंदरूनी हिस्सों और लकड़ी के काम को ऐतिहासिक अहमियत हासिल है।

6. मस्जिद का पुराना चिराग

चेरामन जुमा मस्जिद से जुड़ी एक दिलचस्प बात यहाँ मौजूद एक पुराने तेल के चिराग की है।

स्थानीय रवायत के मुताबिक, यह चिराग बहुत पुराना है और इसे लगातार जलता हुआ माना जाता है। केरल की पर्यटन जानकारी में भी इस चिराग का ज़िक्र मिलता है।

यहाँ अलग-अलग मज़हबों के लोग तेल पेश करने आते रहे हैं। इस वजह से यह चिराग मस्जिद की पहचान और स्थानीय सामाजिक रवायत का एक अहम हिस्सा बन गया है।

हालाँकि, चिराग के लगातार सैकड़ों साल से जलते रहने के दावे को स्वतंत्र रूप से साबित की गई तारीख़ नहीं समझना चाहिए।

7. क्या यह दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी मस्जिद है?

 

चेरामन जुमा मस्जिद के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह दुनिया की दूसरी ऐसी मस्जिद है जहाँ जुमा की नमाज़ शुरू हुई।

यह दावा मस्जिद की मशहूर पहचान का हिस्सा है। लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी मस्जिद होना और दुनिया में दूसरी जगह जुमा की नमाज़ शुरू होने का दावा करना, दोनों अलग बातें हैं।

मस्जिदों की उम्र, उनकी शुरुआती तामीर और वहाँ नमाज़ शुरू होने की तारीख़ों का मुक़ाबला करते वक़्त पुराने दस्तावेज़ों को देखना ज़रूरी है। इसलिए इस दावे को पक्के वैश्विक क्रम के बजाय मशहूर रवायत के तौर पर पेश करना बेहतर है।

8. क्या भारत में इससे भी पुरानी मस्जिद होने का दावा है?

Cheraman Juma Masjid

केरल के कासरगोड में मौजूद मलिक दीनार जुमा मस्जिद भी बहुत पुरानी मस्जिदों में गिनी जाती है।

यह थलंगरा इलाक़े में है और मलिक इब्न दीनार से मंसूब की जाती है। केरल टूरिज़्म इसे मालाबार की शुरुआती मस्जिदों में शामिल करता है।

कुछ ऐतिहासिक जानकारियों में इसकी शुरुआती तामीर की तारीख़ 642 ईस्वी बताई जाती है। इसकी बनावट में भी केरल की पारंपरिक तामीर और लकड़ी पर की गई नक्काशी देखने को मिलती है।

इसलिए भारत की पहली मस्जिद के बारे में लिखते वक़्त चेरामन जुमा मस्जिद और मलिक दीनार मस्जिद की तारीख़ को अलग-अलग समझना चाहिए। दोनों की अपनी अहमियत है, लेकिन दोनों के बारे में शुरुआती तामीर और तारीख़ से जुड़ी जानकारियों में फ़र्क़ है।

9. चेरामन जुमा मस्जिद की 7 दिलचस्प बातें

  1. पुरानी पहचान- इसे आम तौर पर हिंदुस्तान की पहली मस्जिद माना जाता है।
  2. 629 ईस्वी की रवायत- इसकी तामीर की मशहूर तारीख़ 629 ईस्वी है।
  3. मलिक इब्न दीनार से ताल्लुक़- मस्जिद की शुरुआती तामीर उन्हीं से मंसूब की जाती है।
  4. केरल की तामीर का असर- इसकी बनावट में स्थानीय तामीरी रवायतों की झलक मिलती है।
  5. पुराना तेल का चिराग: मस्जिद में मौजूद चिराग से जुड़ी मशहूर स्थानीय रवायत है।
  6. राजा चेरामन पेरुमाल की कहानी- मस्जिद की तारीख़ इस राजा से जुड़ी एक मशहूर कहानी के लिए भी जानी जाती है।
  7. इस्लामिक विरासत- यह जगह केरल और अरब के पुराने ताल्लुक़ात को समझने का अहम ज़रिया है।

इनमें से कुछ बातें ऐतिहासिक जानकारियों पर आधारित हैं, जबकि कुछ स्थानीय रवायतों से जुड़ी हैं। दोनों के बीच फ़र्क़ रखना ज़रूरी है।

10. चेरामन जुमा मस्जिद इतनी अहम क्यों है?

चेरामन जुमा मस्जिद सिर्फ़ इबादत की जगह नहीं, बल्कि हिंदुस्तान और अरब के पुराने ताल्लुक़ात की यादगार भी है।

इसकी तारीख़ से मालूम होता है कि हिंदुस्तान के तटीय इलाक़ों में समुद्री तिजारत ने अलग-अलग समाजों को एक-दूसरे के क़रीब लाने में अहम किरदार अदा किया।

यह मस्जिद केरल में इस्लाम की शुरुआती तारीख़, स्थानीय तामीर और पुराने सांस्कृतिक ताल्लुक़ात को समझने का एक अहम ज़रिया है।

इससे जुड़ी कुछ तारीख़ें और कहानियाँ रवायतों पर आधारित हैं, इसलिए उन्हें पुराने दस्तावेज़ों और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारियों के साथ समझना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQs

1. भारत की पहली मस्जिद कौन सी है?

चेरामन जुमा मस्जिद को आम तौर पर भारत की पहली मस्जिद माना जाता है। यह केरल के कोडुंगल्लूर में मौजूद है।

2. भारत की पहली मस्जिद कब बनी थी?

मशहूर रवायत के मुताबिक, चेरामन जुमा मस्जिद 629 ईस्वी में बनाई गई थी। हालाँकि, इस तारीख़ की ऐतिहासिक तस्दीक़ को लेकर बहस मौजूद है।

3. भारत की पहली मस्जिद किसने बनाई थी?

इस मस्जिद की शुरुआती तामीर मलिक इब्न दीनार से मंसूब की जाती है। केरल की रवायतों में राजा चेरामन पेरुमाल का नाम भी आता है।

4. चेरामन जुमा मस्जिद कहाँ मौजूद है?

यह मस्जिद केरल राज्य के त्रिशूर ज़िले में कोडुंगल्लूर शहर के क़रीब मौजूद है।

5. क्या चेरामन जुमा मस्जिद आज भी मौजूद है?

हाँ, यह मस्जिद आज भी मौजूद है। सदियों के दौरान इसकी मरम्मत और तौसीअ हुई है, इसलिए आज की इमारत में पुराने और बाद में बनाए गए हिस्से शामिल हैं।

नतीजा

चेरामन जुमा मस्जिद हिंदुस्तान की इस्लामिक तारीख़ का एक अहम हिस्सा है। इसकी शुरुआती तामीर 629 ईस्वी से मंसूब है और इसे आम तौर पर भारत की पहली मस्जिद माना जाता है।

मलिक इब्न दीनार, राजा चेरामन पेरुमाल की मशहूर रवायत, पुराने तेल के चिराग और केरल की पारंपरिक तामीर इस मस्जिद को एक अलग पहचान देते हैं।

इसकी तारीख़ और इससे जुड़ी कहानियों को समझते वक़्त मशहूर रवायतों और तस्दीक़शुदा ऐतिहासिक जानकारी के बीच फ़र्क़ रखना ज़रूरी है।

भरोसेमंद हवाले

  1. Kerala Tourism — Cheraman Juma Masjid
    https://www.keralatourism.org/destination/cheraman-juma-masjid-kodungalloor/81/
  2. Kerala Tourism — Muziris और Islamic History Museum
    https://www.keralatourism.org/muziris/museums/islamic-history-museum
  3. Kerala Tourism — Malik Dinar Mosque
    https://www.keralatourism.org/islam-in-kerala/pilgrim-centres/malik-dinar-mosque

ज़रूरी नोट- 629 ईस्वी की तारीख़, राजा चेरामन पेरुमाल की कहानी और दुनिया में जुमा की नमाज़ के क्रम से जुड़े दावों को बिना मज़बूत हवाले के पक्की बात की तरह पेश न करें।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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