घर में दाख़िल होने की दुआ – 1 ख़ूबसूरत सुन्नत, अरबी, हिंदी और English में

घर में दाख़िल होने की दुआ 

घर में दाख़िल होने की दुआ

इस्लाम में घर में दाख़िल होते वक़्त अल्लाह को याद करना और घरवालों को सलाम करना अहम इस्लामी आदाब में शामिल है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपने घर में दाख़िल होते समय अल्लाह का नाम ले और घरवालों को सलाम करे।

इस लेख में हम घर में दाख़िल होने की दुआ अरबी, हिंदी में पढ़ने का तरीका और Hinglish के साथ-साथ इसका हिंदी और English मतलब, हदीस का हवाला और घर में आने के इस्लामी आदाब जानेंगे।

घर में दाख़िल होने की दुआ अरबी में

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ الْمَوْلِجِ وَخَيْرَ الْمَخْرَجِ

بِسْمِ اللَّهِ وَلَجْنَا، وَبِسْمِ اللَّهِ خَرَجْنَا، وَعَلَى اللَّهِ رَبِّنَا تَوَكَّلْنَا

ज़रूरी नोट –  यह दुआ सुनन अबी दाऊद, हदीस नंबर 5096 में रिवायत हुई है। इस रिवायत को शैख़ अल्बानी ने ज़ईफ़ दर्जा दिया है। इसलिए इसे सहीह हदीस कहकर पेश नहीं करना चाहिए।

घर में दाख़िल होने की दुआ हिंदी में

हिंदी में पढ़ने का तरीका (तर्जुमा नहीं):

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका ख़ैरल मौलिजि व ख़ैरल मख़रिजि।

बिस्मिल्लाहि वलज्ना, व बिस्मिल्लाहि ख़रज्ना, व अलल्लाहि रब्बिना तवक्कल्ना।

Ghar Mein Dakhil Hone Ki Dua in Hinglish

Allahumma inni as’aluka khairal mauliji wa khairal makhriji.

Bismillahi walajna, wa bismillahi kharajna, wa ‘alallahi rabbina tawakkalna.

आसान याद रखने का तरीका: दुआ को धीरे-धीरे पढ़ें और अरबी मत्न से मिलाकर उच्चारण सीखें। रोमन लिखावट अरबी उच्चारण का पूरी तरह विकल्प नहीं है।

घर में दाख़िल होने की दुआ का हिंदी मतलब

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दाख़िल होने और निकलने की ख़ैर माँगता हूँ। अल्लाह के नाम से हम दाख़िल हुए और अल्लाह के नाम से हम निकले, और हमने अपने रब अल्लाह पर भरोसा किया।

Meaning of Dua in English

O Allah, I ask You for the goodness of entering and the goodness of leaving. In the name of Allah, we enter, and in the name of Allah, we leave, and upon Allah, our Lord, we place our trust.

घर में दाख़िल होने का सुन्नत तरीका

घर में आने के वक़्त कुछ अहम इस्लामी आदाब का ख़याल रखना चाहिए।

1. अल्लाह का नाम लेना

घर में दाख़िल होते वक़्त बिस्मिल्लाह कहना और अल्लाह को याद करना।

2. घरवालों को सलाम करना

घर में मौजूद लोगों को “अस्सलामु अलैकुम” कहना। सुनन अबी दाऊद 5096 की रिवायत में घरवालों को सलाम करने का ज़िक्र मिलता है।

3. अल्लाह पर भरोसा रखना

घर में दाख़िल होते और बाहर निकलते वक़्त अल्लाह से ख़ैर माँगना और उस पर तवक्कुल करना।

4. दूसरे के घर में इजाज़त लेना

किसी दूसरे के घर में दाख़िल होने से पहले सलाम करना और इजाज़त माँगना। इस्लाम में दूसरे के घर में दाख़िल होने के लिए इजाज़त लेने की हिदायत दी गई है।

घर में दाख़िल होते समय दाहिना पैर रखना

घर में दाख़िल होते समय दाहिना पैर रखने की बात आम तौर पर बताई जाती है। लेकिन इस खास दुआ के सिलसिले में इसे साबित करने वाली सहीह हदीस का स्पष्ट हवाला मौजूद नहीं है।

इसलिए इसे नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की प्रमाणित ख़ास सुन्नत के रूप में पेश करने से बचना चाहिए।

घर में दाख़िल होने की दुआ की हदीस

सुनन अबी दाऊद – हदीस नंबर 5096

हज़रत अबू मालिक अल-अशअरी रदियल्लाहुताला अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने घर में दाख़िल होते वक़्त यह दुआ पढ़ने और फिर अपने घरवालों को सलाम करने का ज़िक्र फ़रमाया।

हदीस का दर्जा – ज़ईफ़ (कमज़ोर), शैख़ अल्बानी की ग्रेडिंग के अनुसार।

Reference-

  • किताब – सुनन अबी दाऊद
  • किताबुल अदब
  • हदीस – 5096
  • बाब – घर में दाख़िल होने पर क्या कहा जाए

Sunan Abi Dawud 5096

ज़रूरी बात –  इस रिवायत को कमज़ोर दर्जा दिए जाने के कारण इसके आधार पर किसी ख़ास फ़ज़ीलत या पक्के सवाब का दावा नहीं करना चाहिए।

कुरआन में घर में दाख़िल होने के आदाब

कुरआन मजीद में सलाम के बारे में साफ़ हिदायत मिलती है।

सूरह अन-नूर, आयत 61

فَإِذَا دَخَلْتُم بُيُوتًا فَسَلِّمُوا عَلَىٰ أَنفُسِكُمْ تَحِيَّةً مِّنْ عِندِ اللَّهِ مُبَارَكَةً طَيِّبَةً

आसान हिंदी मतलब –

जब तुम घरों में दाख़िल हो, तो एक-दूसरे को सलाम करो। यह अल्लाह की तरफ़ से मुबारक और पाकीज़ा सलाम है।

Reference: सूरह अन-नूर (24:61)

इस आयत से घर में सलाम के आदाब की अहमियत समझ आती है।

घर में दाख़िल होने की दुआ की फ़ज़ीलत

घर में दाख़िल होते समय अल्लाह को याद करना और घरवालों को सलाम करना एक अच्छा इस्लामी अमल है। इससे इंसान अपने रोज़मर्रा के काम में अल्लाह की याद को शामिल करता है।

इस खास दुआ की फ़ज़ीलत के बारे में कोई निश्चित सहीह हदीस या ख़ास सवाब का दावा करने से पहले साबित करना ज़रूरी है, क्योंकि अबू दाऊद 5096 की रिवायत को ज़ईफ़ दर्जा दिया गया है।

इस अमल से मिलने वाली अहम सीख – 

  • हर काम में अल्लाह को याद करना।
  • घर में सलाम को आम करना।
  • घर में दाख़िल होते समय ख़ैर और बरकत की दुआ करना।
  • अल्लाह पर तवक्कुल रखना।

घर में दाख़िल होने की दुआ से जुड़े 5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. घर में दाख़िल होने की दुआ कौन-सी है?

घर में दाख़िल होने की दुआ में अल्लाह से दाख़िल होने और निकलने की ख़ैर माँगी जाती है। इसमें अल्लाह का नाम लेने और उस पर भरोसा करने का ज़िक्र है। यह दुआ सुनन अबी दाऊद 5096 में रिवायत हुई है।

2. क्या घर में दाख़िल होने की दुआ सहीह हदीस से साबित है?

इस दुआ की पूरी रिवायत सुनन अबी दाऊद 5096 में मौजूद है, लेकिन शैख़ अल्बानी ने इसे ज़ईफ़ दर्जा दिया है। इसलिए इसे सहीह हदीस कहना सही नहीं होगा।

3. क्या घर में दाख़िल होते समय सलाम करना ज़रूरी है?

कुरआन की सूरह अन-नूर (24:61) में घरों में दाख़िल होने के समय सलाम का ज़िक्र मिलता है। सलाम इस्लामी आदाब का अहम हिस्सा है।

4. क्या यह दुआ घर से बाहर निकलते समय भी पढ़ सकते हैं?

इस रिवायत में दाख़िल होने और बाहर निकलने दोनों के लिए ख़ैर माँगने का ज़िक्र है। हालांकि, रिवायत का दर्जा ज़ईफ़ है, इसलिए इसे सहीह हदीस के रूप में पेश नहीं करना चाहिए।

5. क्या खाली घर में दाख़िल होते समय भी सलाम करना चाहिए?

घर में दाख़िल होने के आदाब में सलाम का ख़याल रखना चाहिए। कुरआन में घरों में दाख़िल होने के समय सलाम का ज़िक्र है (सूरह अन-नूर 24:61)। खाली घर के लिए किसी खास सलाम को जरुरी बताने से पहले प्रमाण देखना चाहिए।

नतीजा

घर में दाख़िल होते समय अल्लाह को याद करना, सलाम करना और अच्छे आदाब अपनाना मुसलमान की ज़िंदगी का हिस्सा होना चाहिए।

घर में दाख़िल होने की मशहूर दुआ सुनन अबी दाऊद 5096 में मिलती है, लेकिन उसकी रिवायत को ज़ईफ़ दर्जा दिया गया है। इसलिए दुआ का हवाला देते समय हदीस की स्थिति स्पष्ट रखना ज़रूरी है।

अल्लाह सुब्हानवा तआला हमें अपने घरों में सलाम, बरकत और अल्लाह की याद को आम करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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