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घर से निकलने की दुआ ( Ghar se nikalne ki dua in hindi – 1 Powerful Authentic dua)

घर से निकलने की दुआ – Ghar se nikalne ki dua in hindi

घर से निकलना हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है। कोई नौकरी के लिए निकलता है, कोई कारोबार के लिए, कोई सफर पर और कोई किसी ज़रूरी काम से बाहर जाता है। लेकिन एक मोमिन के लिए घर से निकलना सिर्फ़ दरवाज़े से बाहर जाना नहीं, बल्कि अल्लाह सुबहाना व तआला पर भरोसा करके अपने दिन की शुरुआत करना भी है।

घर से निकलने की दुआ हमें याद दिलाती है कि हमारी ताक़त, हमारी कोशिश और हमारी हिफाज़त आखिरकार अल्लाह सुबहाना व तआला के हाथ में है।

अरबी में दुआ

بِسْمِ اللَّهِ، تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ

हिंदी में दुआ

बिस्मिल्लाहि, तवक्कल्तु अलल्लाहि, व ला हौला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह।

Hinglish में दुआ

Bismillahi, Tawakkaltu ‘Alallah, Wa La Hawla Wa La Quwwata Illa Billah.

दुआ के मायने

हिंदी मायने

अल्लाह के नाम से मैं निकलता हूँ, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया और किसी बुराई से बचने और कोई जुर्रत या क़ुव्वत रखने की ताक़त अल्लाह के बिना नहीं है।

इस दुआ में इंसान अपने रब के सामने यह इकरार करता है कि वह अपनी ताक़त पर घमंड नहीं करता, बल्कि हर मामले में अल्लाह सुबहाना व तआला पर तवक्कुल करता है।

English Meaning

In the name of Allah, I place my trust in Allah, and there is no power and no strength except through Allah.

घर से निकलने की दुआ की हदीस (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

हज़रत अनस बिन मालिक रदिअल्लाहु ताला अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फरमाया कि जब कोई शख्स अपने घर से निकलते हुए कहता है –

“बिस्मिल्लाह, तवक्कल्तु अलल्लाह, ला हौला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह”

तो उससे कहा जाता है –

“तुम्हें हिदायत दी गई, तुम्हारे लिए काफी कर दिया गया और तुम्हारी हिफाज़त की गई।”

इसके बाद शैतान उससे दूर हो जाता है। –  सुनन अबू दाऊद, हदीस 5095

यह रिवायत घर से निकलते वक्त पढ़ी जाने वाली इस दुआ की मशहूर और बेहद खाश रिवायतों में से है।

इस दुआ की 3 बड़ी फ़ज़ीलतें (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

इस छोटी सी दुआ में मोमिन के लिए बहुत बड़ी बरकत और रूहानी तालीम मौजूद है।

1. हिदायत

हदीस में बताया गया है कि दुआ पढ़ने वाले के लिए हिदायत की बात कही जाती है।

यानी इंसान अपने फैसलों और रास्तों में अल्लाह से सही राह की मदद मांगता है। दुनिया में बाहर निकलते हुए हमें सिर्फ़ रास्ते की नहीं, बल्कि सही फैसलों और सही कामों की भी ज़रूरत होती है।

2. अल्लाह की किफ़ायत

इस दुआ के जरिए बंदा अल्लाह पर भरोसा करता है। हदीस में उसके लिए किफ़ायत किए जाने का ज़िक्र आता है।

इसका मतलब यह है कि बंदा अपने मामलों को अल्लाह के हवाले करता है और यक़ीन रखता है कि अल्लाह उसके लिए सबसे बेहतर मददगार है।

3. हिफाज़त

हदीस में इस दुआ के साथ हिफाज़त का भी ज़िक्र है और शैतान के दूर होने का बयान मिलता है।

इसलिए घर से निकलते वक्त यह दुआ पढ़ना एक खूबसूरत सुन्नत और अल्लाह की पनाह मांगने का ज़रिया है।

कुरआन में तवक्कुल की अहमियत (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

घर से निकलने की इस दुआ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है –

تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ — Tawakkaltu ‘Alallah

यानी:

“मैंने अल्लाह पर भरोसा किया।”

कुरआन मजीद में अल्लाह सुब्हानवा तआला फरमाते है कि जब इंसान फैसला कर ले तो उसे अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए, और अल्लाह तवक्कुल करने वालों से मोहब्बत करता है। – सूरह आले इमरान — 3:159

इसी तरह अल्लाह सुब्हानवा तआला फरमाते है कि जो अल्लाह पर भरोसा करता है, उसके लिए अल्लाह काफी है। – सूरह अत-तलाक — 65:3

यह हमें सिखाता है कि तवक्कुल का मतलब कोशिश छोड़ देना नहीं है। हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, सही कदम उठाने चाहिए और फिर नतीजे के लिए अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए।

घर से निकलते समय यह दुआ कब पढ़ें? (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

आप यह दुआ उस वक्त पढ़ सकते हैं जब आप अपने घर से बाहर निकल रहे हों।

जैसे –

बेहतर यह है कि घर से निकलते हुए या दरवाज़े से बाहर कदम रखते समय अल्लाह को याद करके यह दुआ पढ़ी जाए।

दुआ पढ़ने का सही तरीका (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

इस दुआ को पढ़ने के लिए कोई मुश्किल तरीका नहीं है।

दिल में अल्लाह पर भरोसा रखते हुए घर से निकलते समय पढ़ें:

بِسْمِ اللَّهِ، تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ

इसे जल्दी-जल्दी सिर्फ़ ज़बान से पढ़ने के बजाय इसके मतलब को समझकर पढ़ना ज्यादा बेहतर है।

जब आप कहते हैं “तवक्कल्तु अलल्लाह”, तो आप अपने रब पर भरोसा जाहिर करते हैं।

और जब कहते हैं “ला हौला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह”, तो आप यह मानते हैं कि असली ताक़त और क़ुदरत सिर्फ़ अल्लाह सुब्हानवा तआला के पास है।

इस दुआ से हमें क्या सीख मिलती है? (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

घर से निकलने की यह छोटी सी दुआ हमें तीन महत्वपूर्ण बातें सिखाती है:

पहली – हर काम अल्लाह के नाम से शुरू करना।

दूसरी –  अपनी ताक़त के बजाय अल्लाह पर भरोसा रखना।

तीसरी –  हिफाज़त और मदद के लिए हमेशा अल्लाह की तरफ रुजू करना।

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हम घर से निकलते ही फोन, काम, ट्रैफिक और परेशानियों में मशगूल हो जाते हैं। लेकिन सिर्फ़ कुछ सेकंड की यह दुआ हमारे दिल को यह याद दिलाती है कि हम अकेले नहीं हैं।

हम कोशिश करते हैं, लेकिन कामयाबी और हिफाज़त अल्लाह सुब्हानवा तआला के हुक्म से होती है।

घर से निकलने की दुआ को अपनी रोज़ाना आदत बनाएं (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

इस दुआ को अपनी daily routine का हिस्सा बनाना बहुत आसान है।

दरवाज़े से निकलने से पहले एक पल रुकें और पढ़ें –

बिस्मिल्लाहि, तवक्कल्तु अलल्लाहि, व ला हौला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह।

धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाएगी और हर बार घर से निकलते वक्त आपका दिल अल्लाह की याद से जुड़ जाएगा।

माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को भी छोटी उम्र से यह दुआ सिखाएं, ताकि वे घर से निकलते समय अल्लाह पर भरोसा करना सीखें।

नतीजा (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

घर से निकलने की दुआ एक छोटी लेकिन बहुत खूबसूरत मस्नून दुआ है। इसमें अल्लाह का नाम, तवक्कुल और अपनी कमजोरी का इकरार शामिल है।

एक मोमिन जब घर से निकलते समय यह कहता है –

بِسْمِ اللَّهِ، تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ

तो वह अपने दिन की शुरुआत अल्लाह के नाम और अल्लाह पर भरोसे के साथ करता है।

हमें चाहिए कि हम इस दुआ को सिर्फ़ याद ही न करें, बल्कि इसके मतलब को समझें और अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं।

अल्लाह सुब्हानवा तआला हमें हर हाल में अपना तवक्कुल करने वाला और अपनी हिफाज़त में रहने वाला बंदा बनाए। आमीन।

FAQs (Ghar se nikalne ki dua in hindi)

1. घर से निकलने की दुआ क्या है?

घर से निकलते समय पढ़ी जाने वाली दुआ है –

बिस्मिल्लाहि, तवक्कल्तु अलल्लाहि, व ला हौला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह।

2. घर से निकलने की दुआ कब पढ़नी चाहिए?

जब आप अपने घर से बाहर किसी काम, ऑफिस, सफर या दूसरी ज़रूरत के लिए निकलें, उस समय यह दुआ पढ़ सकते हैं।

3. क्या यह दुआ बच्चों को सिखाई जा सकती है?

जी हाँ, यह एक छोटी और आसान दुआ है। बच्चों को छोटी उम्र से इसे सिखाना अच्छी आदत है।

4. इस दुआ में “तवक्कुल” का क्या मतलब है?

तवक्कुल का मतलब है अपनी कोशिश करने के बाद अल्लाह सुब्हानवा तआला पर पूरा भरोसा रखना।

5. क्या सिर्फ़ दुआ पढ़ना काफी है या सावधानी भी जरूरी है?

दुआ के साथ सही कोशिश और जरूरी सावधानी भी जरूरी है। तवक्कुल का मतलब लापरवाही करना नहीं, बल्कि जरूरी कदम उठाकर नतीजा अल्लाह के हवाले करना है।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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