हलाल करने की दुआ – halal karne ki dua
हलाल करने की दुआ क्या है?
इस्लाम में किसी जानवर को ज़बीहा करते समय अल्लाह सुब्हानवा तआला का नाम लेना बहुत अहम है। आम तौर पर ज़बीहा करते समय यह कहा जाता है- बिस्मिल्लाहि, अल्लाहु अकबर।
इसका मतलब है कि अल्लाह के नाम से ज़बीहा किया जा रहा है और अल्लाह सबसे बड़ा है। सिर्फ़ दुआ पढ़ लेना किसी जानवर के गोश्त को हलाल नहीं बनाता। जानवर का हलाल होना, ज़बीहा का सही तरीक़े से होना और दूसरी शरई शर्तों का पूरा होना भी ज़रूरी है।
1. हलाल करने की दुआ अरबी में – halal karne ki dua
अरबी-
بِسْمِ اللَّهِ، اللَّهُ أَكْبَرُ
हिंदी में-
बिस्मिल्लाहि, अल्लाहु अकबर।
Hinglish-
Bismillahi, Allahu Akbar.
हिंदी में मायने-
अल्लाह के नाम से, अल्लाह सबसे बड़ा है।
English Meaning-
In the name of Allah, Allah is the Greatest.
ज़बीहा करने वाला शख़्स जानवर को ज़बीहा करते वक़्त अल्लाह का नाम ले। यह छोटा-सा ज़िक्र इस बात की याद दिलाता है कि जान और रिज़्क़ का असल मालिक अल्लाह तआला है।
2. क्या ज़बीहा के लिए कोई लंबी दुआ भी है?
आम खाने के लिए जानवर ज़बीहा करते समय बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर कहना मुख्य ज़िक्र है। इसके अलावा कोई लंबी दुआ हर ज़बीहा के लिए लाज़िमी नहीं है।
क़ुर्बानी के वक़्त अल्लाह से क़ुर्बानी क़ुबूल करने की दुआ भी की जा सकती है।
अरबी-
بِسْمِ اللَّهِ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُمَّ تَقَبَّلْ مِنِّي
हिंदी में-
बिस्मिल्लाहि, वल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्मा तक़ब्बल मिन्नी।
Hinglish-
Bismillahi, Wallahu Akbar, Allahumma taqabbal minni.
हिंदी में मायने-
अल्लाह के नाम से, और अल्लाह सबसे बड़ा है। ऐ अल्लाह! मेरी तरफ़ से इसे क़ुबूल फ़रमा।
English Meaning-
In the name of Allah, Allah is the Greatest. O Allah, accept this from me.
ज़रूरी बात- क़ुबूलियत की यह दुआ एक आम दुआ के तौर पर पढ़ी जा सकती है। इसे हर रोज़ के ज़बीहा के लिए अनिवार्य या एकमात्र साबित दुआ न समझें। क़ुर्बानी के लिए हदीस में आए अल्फ़ाज़ और आम ज़बीहा के मसले में फ़र्क़ है।
3. ज़बीहा के बारे में क़ुरआन क्या कहता है?
सूरह अल-अनआम, आयत 118
अरबी-
فَكُلُوا مِمَّا ذُكِرَ اسْمُ اللَّهِ عَلَيْهِ إِنْ كُنْتُمْ بِآيَاتِهِ مُؤْمِنِينَ
हिंदी में-
फ़कुलू मिम्मा ज़ुकिरस्मुल्लाहि अलैहि इन कुन्तुम बि-आयातिही मोमिनीन।
हिंदी में मायने-
जिस जानवर पर अल्लाह का नाम लिया गया हो, उसमें से खाओ, अगर तुम उसकी आयतों पर ईमान रखते हो।
हवाला- क़ुरआन, सूरह अल-अनआम 6:118।
आयत में अल्लाह सुब्हानवा तआला के नाम की अहमियत बयान की गई है। मुसलमान को खाने-पीने के मामले में हलाल और हराम का ख़याल रखना चाहिए।
सूरह अल-अनआम, आयत 121
अरबी-
وَلَا تَأْكُلُوا مِمَّا لَمْ يُذْكَرِ اسْمُ اللَّهِ عَلَيْهِ وَإِنَّهُ لَفِسْقٌ
हिंदी में-
वला ताकुलू मिम्मा लम युज़करिस्मुल्लाहि अलैहि व इन्नहू लफ़िस्क़।
हिंदी में मायने-
और उस जानवर में से न खाओ जिस पर अल्लाह का नाम नहीं लिया गया, और बेशक ऐसा करना नाफ़रमानी है।
हवाला- क़ुरआन, सूरह अल-अनआम 6:121।
इस आयत की तफ़सीर और इसे अमली तौर पर लागू करने के मसले में उलमा ने ज़बीहा की दूसरी शर्तों के साथ चर्चा की है। इसलिए आयत को उसके पूरे शरई संदर्भ में समझना चाहिए।
सूरह अल-माइदा, आयत 3
इस आयत में मुर्दार, ख़ून, सूअर का गोश्त और ग़ैर-अल्लाह के नाम पर ज़बह किए गए जानवर समेत कई हराम चीज़ों का बयान है।
हवाला- क़ुरआन, सूरह अल-माइदा 5:3।
4. ज़बीहा के बारे में सही हदीस
हदीस 1- नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम का क़ुर्बानी करते समय अल्लाह का नाम लेना
हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने दो सींग वाले मेंढों की क़ुर्बानी की। उन्होंने अपने हाथ से ज़बीहा किया और अल्लाह का नाम लिया तथा तकबीर कही।
हवाला- सहीह अल-बुख़ारी 5558; सहीह मुस्लिम 1966।
इस हदीस से ज़बीहा के वक़्त अल्लाह का नाम लेने और तकबीर कहने की अहमियत मालूम होती है।
हदीस 2- ज़बीहा के वक़्त अल्लाह का नाम
हदीस में आता है कि जिस चीज़ से ख़ून बहाया जाए और उस पर अल्लाह का नाम लिया जाए, उसे खाया जा सकता है।
हवाला- सहीह अल-बुख़ारी और सहीह मुस्लिम में ज़बीहा से संबंधित रिवायतें।
इस हदीस को ज़बीहा की दूसरी शरई शर्तों से अलग करके नहीं समझना चाहिए। जानवर, ज़बीहा करने वाले और ज़बीहा के तरीक़े से संबंधित अहकाम भी लागू होते हैं।
5. सुन्नी तरीक़े से ज़बीहा कैसे किया जाता है?
ज़बीहा के लिए इन बातों का ख़याल रखें-
- हलाल जानवर- जानवर ऐसी क़िस्म का हो जिसे इस्लाम में खाना जायज़ है।
- ज़बीहा करने वाला- वह शरई अहकाम और ज़बीहा की शर्तों से वाक़िफ़ हो।
- अल्लाह का नाम- ज़बीहा करते वक़्त बिस्मिल्लाह कहा जाए। तकबीर के साथ कहना आम और मशहूर तरीक़ा है।
- सही तरीक़ा- धारदार चाक़ू से ज़बीहा किया जाए और जानवर को बेवजह तकलीफ़ न पहुँचाई जाए।
- ज़बीहा से पहले मौत न हो- जानवर ज़बीहा से पहले मर चुका हो तो केवल दुआ पढ़ने से उसका गोश्त हलाल नहीं हो जाता।
- दूसरे शरई अहकाम- ख़ून बहने, ज़बीहा की जगह और दूसरे ज़रूरी मसाइल का भी ख़याल रखा जाए।
भूली हुई बिस्मिल्लाह का मसला- अगर ज़बीहा करते वक़्त भूल से अल्लाह का नाम लेना छूट जाए, तो इस बारे में सुन्नी फ़ुक़हा के बीच कुछ इख़्तिलाफ़ है। जान-बूझकर छोड़ने और भूल से छूटने का हुक्म एक जैसा नहीं माना जाता। अपने मस्लक के भरोसेमंद मुफ़्ती से इस बारे में पूछना बेहतर है।
6. इस दुआ की फ़ज़ीलत क्या है?
अल्लाह का ज़िक्र- ज़बीहा के वक़्त बिस्मिल्लाह कहना अल्लाह सुब्हानवा तआला की याद और उसके हुक्म की पैरवी है।
हलाल रिज़्क़ की अहमियत- मुसलमान को अपने खाने में हलाल और पाकीज़ा चीज़ों का एहतिमाम करना चाहिए।
सुन्नत पर अमल- नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से क़ुर्बानी के वक़्त अल्लाह का नाम लेना और तकबीर कहना साबित है।
शुक्रगुज़ारी- ज़बीहा करते वक़्त अल्लाह का नाम लेना इस बात की याद दिलाता है कि इंसान को मिलने वाला रिज़्क़ उसी की नेमत है।
ध्यान रहे कि इस ख़ास दुआ को पढ़ने से मिलने वाले किसी निश्चित सवाब या दुनियावी फ़ायदे की ऐसी तादाद बयान नहीं करनी चाहिए जिसका भरोसेमंद हवाला मौजूद न हो।
7. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
1. हलाल करने की दुआ क्या है?
ज़बीहा करते समय आम तौर पर बिस्मिल्लाहि, अल्लाहु अकबर कहा जाता है। इसका मतलब है, अल्लाह के नाम से, अल्लाह सबसे बड़ा है।
2. क्या बिस्मिल्लाह कहे बिना जानवर हलाल हो जाता है?
इस मसले में फ़ुक़हा के बीच इख़्तिलाफ़ है। जान-बूझकर अल्लाह का नाम छोड़ने और भूल जाने के हुक्म में भी फ़र्क़ किया जाता है। इसलिए इसे हर हाल में जायज़ या हर हाल में एक जैसा हराम कहना सही नहीं होगा।
3. क्या ज़बीहा के समय पूरी दुआ पढ़ना ज़रूरी है?
नहीं। आम ज़बीहा के लिए बिस्मिल्लाह कहना बुनियादी ज़िक्र है। अल्लाहु अकबर कहना भी सुन्नत से साबित है। कोई लंबी दुआ हर ज़बीहा के लिए अनिवार्य नहीं है।
4. क्या बिस्मिल्लाह पढ़ने से हर जानवर का गोश्त हलाल हो जाता है?
नहीं। जानवर का हलाल होना, ज़बीहा का सही होना और दूसरी शरई शर्तें पूरी होना भी ज़रूरी है।
5. क्या क़ुर्बानी और आम ज़बीहा की दुआ एक ही है?
दोनों में अल्लाह का नाम लिया जाता है। क़ुर्बानी के वक़्त क़ुबूलियत की दुआ और कुछ अतिरिक्त अल्फ़ाज़ भी पढ़े जा सकते हैं। लेकिन क़ुर्बानी के ख़ास अल्फ़ाज़ को हर आम ज़बीहा के लिए ज़रूरी नहीं समझना चाहिए।
नतीजा
हलाल करने की दुआ के लिए सबसे अहम बात अल्लाह सुब्हानवा तआला का नाम लेना है। आम ज़बीहा करते समय बिस्मिल्लाहि, अल्लाहु अकबर कहें और ज़बीहा के शरई अहकाम का ख़याल रखें। क़ुरआन और सहीह हदीस के हवाले से दीन की बात बयान करते समय एहतियात करें और इख़्तिलाफ़ी मसाइल में भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई लें।
हवाले और आगे पढ़ें
- क़ुरआन 6:118 — अल्लाह का नाम लेकर ज़बीहा
- क़ुरआन 6:121 — ज़बीहा से संबंधित हुक्म
- क़ुरआन 5:3 — हराम खाने की चीज़ें
- ज़बीहा करते समय क्या पढ़ें? — IslamQA
- बिस्मिल्लाह कहने की शर्त और फ़ुक़हा का इख़्तिलाफ़ — IslamQA
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