जागने की दुआ – 1 ख़ास सुन्नत जो हर मुसलमान को ज़रूर जाननी चाहिए
जब कोई मुसलमान नींद से जागता है, तो अल्लाह सुब्हानवा तआला का शुक्र अदा करने के लिए एक ख़ास दुआ पढ़ना सुन्नत है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम नींद से जागने के बाद अल्लाह की तारीफ़ करते हुए यह दुआ पढ़ते थे।
इस दुआ में अल्लाह की नेमत, ज़िंदगी और आख़िरत की याद शामिल है। इस आर्टिकल में हम जागने की दुआ अरबी, हिंदी पढ़ने के तरीके, Hinglish और हिंदी व English मतलब के साथ जानेंगे।
जागने की दुआ अरबी में
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
जागने की दुआ हिंदी में
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अहयाना बअ्दा मा अमातना व इलैहिन-नुशूर।
जागने की दुआ Hinglish में
Alhamdu lillahil-ladhi ahyana ba’da ma amatana wa ilaihin-nushur.
जागने की दुआ का हिंदी मतलब
सारी तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें नींद के बाद ज़िंदगी दी और उसी की तरफ़ दोबारा उठकर जाना है।
Waking Up Dua Meaning in English
All praise is for Allah, who gave us life after causing us to die (sleep), and to Him is the resurrection.
जागने की दुआ की हदीस
हज़रत हुज़ैफ़ा बिन यमान रदिअल्लहु ताला अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम जब सोने के लिए बिस्तर पर जाते, तो यह दुआ पढ़ते –
بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا
और जब नींद से जागते, तो पढ़ते –
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
हदीस रेफरेंस – सहीह अल-बुखारी, हदीस नंबर 6324, किताबुद्दआत, हदीस 21।
इस हदीस में नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम के सोने और जागने के वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ का ज़िक्र मिलता है।
जागने की दुआ का बैकग्राउंड
इस दुआ में नींद और जागने के बीच अल्लाह की कुदरत और इंसान की ज़िंदगी की हक़ीक़त की याद मिलती है।
अल्लाह सुब्हानवा तआला क़ुरआन में फरमाते है-
اللَّهُ يَتَوَفَّى الْأَنْفُسَ حِينَ مَوْتِهَا وَالَّتِي لَمْ تَمُتْ فِي مَنَامِهَا
सूरह अज़-ज़ुमर, 39:42
मतलब – अल्लाह मौत के वक़्त जानों को अपने क़ब्ज़े में लेता है और जो नहीं मरीं, उन्हें उनकी नींद में (अपने क़ब्ज़े में लेता है)। फिर जिनके लिए मौत का फ़ैसला कर चुका होता है, उन्हें रोक लेता है और बाक़ी को एक तय वक़्त तक वापस भेज देता है।
इस आयत से नींद और मौत के बीच एक ताल्लुक़ समझ में आता है। जागने की दुआ में मुसलमान अल्लाह का शुक्र अदा करता है कि उसने उसे फिर से जागने और ज़िंदगी में लौटने का मौक़ा दिया।
ख्याल रहे कि जागने की यह ख़ास दुआ क़ुरआन की आयत नहीं, बल्कि सहीह हदीस में बताई गई नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की दुआ है।
जागने की दुआ की फ़ज़ीलत
1. अल्लाह का शुक्र अदा करना
दुआ की शुरुआत “अल्हम्दु लिल्लाह” से होती है। इसमें अल्लाह की तारीफ़ और उसका शुक्र शामिल है। मुसलमान को अपनी ज़िंदगी और अल्लाह की नेमतों पर शुक्र अदा करना चाहिए।
2. नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत पर अमल
रसूलुल्लाह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम नींद से जागने के बाद यह दुआ पढ़ते थे। इसे पढ़ना उनकी सुन्नत को अपनी ज़िंदगी में शामिल करने का एक तरीक़ा है।
3. आख़िरत की याद
दुआ के आख़िरी अल्फ़ाज़ हैं-
وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
इसका मतलब है कि उसी की तरफ़ दोबारा उठकर जाना है। यह अल्फ़ाज़ मुसलमान को आख़िरत और क़यामत की याद दिलाते हैं।
4. दिन की अच्छी शुरुआत
नींद से जागने के बाद अल्लाह का ज़िक्र करना दिल में उसकी याद को ताज़ा करता है। यह दुआ छोटी और आसान है, इसलिए इसे बच्चों को भी सिखाया जा सकता है।
जागने की दुआ कब पढ़नी चाहिए?
जागने की दुआ नींद से जागने के बाद पढ़ी जाती है।
पढ़ने का आसान तरीक़ा-
- नींद से जागें।
- जागने की दुआ पढ़ें।
- अल्लाह का शुक्र अदा करें।
- अपने दिन की शुरुआत अच्छे अमल से करें।
इस दुआ को पढ़ने के लिए किसी ख़ास दिन या महीने का इंतज़ार ज़रूरी नहीं है। इसे रोज़ाना नींद से जागने के बाद पढ़ा जा सकता है।
क्या जागने की दुआ हर मुसलमान पढ़ सकता है?
जी हाँ। मर्द और औरत दोनों यह दुआ पढ़ सकते हैं। बच्चे भी इसे सीख सकते हैं। इस दुआ को पढ़ने के लिए किसी ख़ास उम्र की शर्त नहीं है। कोशिश करें कि इसे याद करके रोज़ाना पढ़ें।
जागने की दुआ से जुड़े 5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. जागने की दुआ कौन सी है?
जागने की दुआ है:
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अहयाना बअ्दा मा अमातना व इलैहिन-नुशूर।
यह दुआ सहीह हदीस में रिवायत हुई है।
2. क्या जागने की दुआ सोने से पहले पढ़ी जाती है?
नहीं। यह दुआ नींद से जागने के बाद पढ़ी जाती है।
सोने से पहले पढ़ी जाने वाली मस्नून दुआ है:
بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا
हिंदी पढ़ने का तरीक़ा-
बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व अह्या।
3. क्या जागने की दुआ पढ़ना सुन्नत है?
जी हाँ। नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से नींद से जागने के बाद यह दुआ पढ़ना सहीह हदीस में साबित है।
4. क्या जागने की दुआ हिंदी में पढ़ सकते हैं?
हिंदी में उच्चारण देखकर दुआ सीख सकते हैं। बेहतर है कि अरबी अल्फ़ाज़ सही तरीके से पढ़ने की कोशिश करें। अगर अरबी पढ़ने में परेशानी हो, तो धीरे-धीरे सही उच्चारण सीखें।
5. जागने की दुआ का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि सारी तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जिसने हमें नींद के बाद ज़िंदगी दी और उसी की तरफ़ दोबारा उठकर जाना है।
नतीजा
जागने की दुआ एक छोटी लेकिन अहम मस्नून दुआ है। इसमें अल्लाह का शुक्र, उसकी नेमतों की याद और आख़िरत का ज़िक्र मिलता है।
हमें कोशिश करनी चाहिए कि नींद से जागने के बाद यह दुआ पढ़ें और अपने बच्चों को भी सिखाएँ।
अल्लाह तआला हमें नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नतों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
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