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जनाज़े की नमाज़ का तरीका : 7 आसान बातें, दुआएँ और ज़रूरी जानकारी

जनाज़े की नमाज़ का तरीका 

जनाज़े की नमाज़ क्या है?

जनाज़े की नमाज़ एक मुसलमान के इंतिक़ाल के बाद उसके लिए मग़फ़िरत और रहमत की दुआ करने की नमाज़ है। इसमें अल्लाह तआला की हम्द, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम पर दुरूद और मय्यत के लिए दुआ की जाती है।

आम नमाज़ों की तरह इसमें रुकू और सज्दा नहीं होता। नमाज़ पढ़ने वाले क़िबले की तरफ़ मुँह करके खड़े रहते हैं और इमाम की इक्तिदा में चार तकबीरें कहते हैं।

हदीस का हवाला – सहीह बुख़ारी, हदीस 1333 में नजाशी के जनाज़े की नमाज़ में नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम के चार तकबीरें कहने का ज़िक्र मिलता है।

नमाज़ से पहले की तैयारी

जनाज़े की नमाज़ से पहले इन बातों का ख़याल रखें –

नियत दिल के इरादे का नाम है। इसके लिए कोई ख़ास अरबी जुमला ज़ुबान से कहना ज़रूरी नहीं है।

जनाज़े की नमाज़ का तरीका

जनाज़े की नमाज़ में चार तकबीरें होती हैं। नीचे एक आम तौर पर सिखाए जाने वाले सुन्नी तरीके में हर तकबीर के बाद पढ़ी जाने वाली चीज़ बताई गई है।

पहली तकबीर – सना

इमाम के साथ पहली तकबीर कहते हुए हाथ उठाएँ और फिर हाथ बाँध लें। इसके बाद सना पढ़ें।

अरबी-

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका, व तबा-रकस्मुका, व तआला जद्दुका, व ला इलाहा ग़ैरुक।

Hinglish-

Subhanakallahumma wa bihamdika, wa tabarakasmuka, wa ta’ala jadduka, wa la ilaha ghairuk.

हिंदी में मतलब-

ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही हम्द है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।

दूसरी तकबीर- दुरूद शरीफ़

दूसरी तकबीर इमाम के साथ कहें। इसके बाद दुरूद-ए-इब्राहीमी पढ़ें।

अरबी-

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिं व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।

अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिं व अला आलि मुहम्मद, कमा बारकता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।

Hinglish-

Allahumma salli ‘ala Muhammadin wa ‘ala aali Muhammad, kama sallaita ‘ala Ibrahima wa ‘ala aali Ibrahim, innaka Hamidum Majid.

Allahumma barik ‘ala Muhammadin wa ‘ala aali Muhammad, kama barakta ‘ala Ibrahima wa ‘ala aali Ibrahim, innaka Hamidum Majid.

हिंदी में मतलब-

ऐ अल्लाह! मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमाई। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बुज़ुर्गी वाला है।

ऐ अल्लाह! मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फ़रमाई।

तीसरी तकबीर- मय्यत के लिए दुआ

तीसरी तकबीर कहने के बाद मय्यत की मग़फ़िरत के लिए दुआ करें। नीचे एक मशहूर दुआ दी गई है जो जनाज़े की नमाज़ में पढ़ी जाती है।

अरबी –

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِحَيِّنَا وَمَيِّتِنَا وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا وَصَغِيرِنَا وَكَبِيرِنَا وَذَكَرِنَا وَأُنْثَانَا

اللَّهُمَّ مَنْ أَحْيَيْتَهُ مِنَّا فَأَحْيِهِ عَلَى الْإِسْلَامِ وَمَنْ تَوَفَّيْتَهُ مِنَّا فَتَوَفَّهُ عَلَى الْإِيمَانِ

हिंदी में पढ़ने का तरीका –

अल्लाहुम्मग़फ़िर लिहय्यिना व मय्यितिना, व शाहिदिना व ग़ाइबिना, व सग़ीरिना व कबीरिना, व ज़करिना व उन्साना।

अल्लाहुम्मा मन अह्यैतहू मिन्ना फ़अह्यिही अलल इस्लाम, व मन तवफ़्फ़ैतहू मिन्ना फ़तवफ़्फ़हू अलल ईमान।

Hinglish-

Allahummaghfir lihayyina wa mayyitina, wa shahidina wa ghaibina, wa saghirina wa kabirina, wa dhakarina wa unthana.

Allahumma man ahyaytahu minna fa-ahyihi ‘alal-Islam, wa man tawaffaytahu minna fatawaffahu ‘alal-Iman.

हिंदी में मतलब-

ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदा और फ़ौत हो चुके लोगों, यहाँ मौजूद और ग़ैर-मौजूद लोगों, छोटे और बड़े लोगों, मर्दों और औरतों की मग़फ़िरत फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हममें से जिसे तू ज़िंदा रखे, उसे इस्लाम पर ज़िंदा रख और जिसे वफ़ात दे, उसे ईमान पर वफ़ात दे।

हदीस का हवाला: जामे तिर्मिज़ी, हदीस 1024 में इस दुआ का ज़िक्र मिलता है। हदीस नंबर अलग-अलग संस्करणों में बदल सकता है।

चौथी तकबीर- सलाम

चौथी तकबीर इमाम के साथ कहें। इसके बाद सलाम फेरकर नमाज़ पूरी करें।

अरबी-

السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह।

Hinglish-

Assalamu alaikum wa rahmatullah.

आम तौर पर सलाम दाईं और बाईं तरफ़ फेरा जाता है। सलाम के तरीक़े में कुछ फ़िक़्ही फ़र्क़ पाए जाते हैं, इसलिए अपने इमाम की इक्तिदा करें।

जनाज़े की नमाज़ में क्या नहीं होता?

जनाज़े की नमाज़ में आम नमाज़ की तरह रुकू, सज्दा और बैठकर अत्तहिय्यात पढ़ना नहीं होता। इसमें चार तकबीरें, दुरूद, मय्यत के लिए दुआ और सलाम शामिल हैं।

इस नमाज़ में अज़ान और इक़ामत भी नहीं होती।

बच्चे के जनाज़े की दुआ

अगर मय्यत छोटा बच्चा हो, तो उसके लिए भी दुआ की जाती है। नीचे लड़के के लिए एक मशहूर दुआ दी गई है।

अरबी-

اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ لَنَا فَرَطًا وَاجْعَلْهُ لَنَا أَجْرًا وَذُخْرًا وَاجْعَلْهُ لَنَا شَافِعًا وَمُشَفَّعًا

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

अल्लाहुम्मजअल्हु लना फ़रतन, वजअल्हु लना अजरन व ज़ुख़रन, वजअल्हु लना शाफ़िअन व मुशफ़्फ़आ।

Hinglish-

Allahummaj’alhu lana faratan, waj’alhu lana ajran wa zukhran, waj’alhu lana shafi’an wa mushaffa’an.

हिंदी में मतलब-

ऐ अल्लाह! इस बच्चे को हमारे लिए आगे पहुँचने वाला, सवाब और आख़िरत का ज़ख़ीरा बना, और इसे हमारे हक़ में सिफ़ारिश करने वाला बना जिसकी सिफ़ारिश क़बूल की जाए।

बच्ची के लिए दुआ के अरबी अल्फ़ाज़ में ज़रूरत के मुताबिक़ बदलाव होता है। बच्चे के जनाज़े के मसले में इमाम से रहनुमाई लेना बेहतर है।

जनाज़े की नमाज़ की फ़ज़ीलत

जनाज़े की नमाज़ में शरीक होना मय्यत के लिए दुआ और मुसलमान के हक़ को अदा करने का अहम ज़रिया है।

सहीह मुस्लिम, हदीस 945 के मुताबिक़, जो शख़्स ईमान और सवाब की नियत से किसी मुसलमान के जनाज़े में शामिल होता है और नमाज़ व दफ़न तक साथ रहता है, उसके लिए दो क़ीरात अज्र का ज़िक्र आया है। हर क़ीरात को उहुद पहाड़ के बराबर बताया गया है।

यह फ़ज़ीलत जनाज़े के साथ रहने और दफ़न में शामिल होने के बारे में है; सिर्फ़ नमाज़ पढ़कर लौटने की फ़ज़ीलत का ज़िक्र अलग रिवायत में एक क़ीरात के तौर पर आया है।

क़ुरआन और हदीस के हवाले

जनाज़े की नमाज़ में मय्यत के लिए मग़फ़िरत की दुआ करना बुनियादी अमल है। इससे संबंधित कुछ अहम हवाले-

क़ुरआन में सूरह अल-हश्र (59:10) में पहले ईमान लाने वाले लोगों के लिए मग़फ़िरत की दुआ सिखाई गई है-

अरबी-

رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

रब्बनग़फ़िर लना व लि-इख़वानिनल्लज़ीना सबक़ूना बिल ईमान।

Hinglish-

Rabbana-ghfir lana wa li-ikhwaninalladhina sabaquna bil-iman.

हिंदी में मतलब-

ऐ हमारे रब! हमें और हमारे उन भाइयों को बख़्श दे जो ईमान में हमसे पहले गुज़र चुके हैं।

यह आयत मुसलमानों के लिए मग़फ़िरत की दुआ की रहनुमाई करती है। इसे जनाज़े की नमाज़ की किसी ख़ास तकबीर के बाद पढ़ना ज़रूरी नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQs

1. जनाज़े की नमाज़ में कितनी तकबीरें होती हैं?

जनाज़े की नमाज़ में चार तकबीरें होती हैं। सहीह बुख़ारी में नजाशी के जनाज़े के बारे में इसका ज़िक्र मिलता है।

2. क्या जनाज़े की नमाज़ में रुकू और सज्दा होता है?

नहीं। इसमें रुकू, सज्दा और आम नमाज़ की तरह बैठना नहीं होता। नमाज़ खड़े होकर अदा की जाती है।

3. पहली तकबीर के बाद क्या पढ़ते हैं?

एक आम तौर पर सिखाए जाने वाले तरीके में पहली तकबीर के बाद सना पढ़ी जाती है। कुछ दूसरे मान्य सुन्नी तरीकों में सूरह फ़ातिहा पढ़ी जाती है। अपने इमाम के बताए तरीके की पैरवी करें।

4. तीसरी तकबीर के बाद कौन-सी दुआ पढ़ें?

तीसरी तकबीर के बाद मय्यत की मग़फ़िरत की दुआ पढ़ें। ऊपर दी गई “अल्लाहुम्मग़फ़िर लिहय्यिना व मय्यितिना” वाली दुआ इसके लिए मशहूर है।

5. क्या औरतें भी जनाज़े की नमाज़ पढ़ सकती हैं?

जनाज़े की नमाज़ में औरतों के शरीक होने के बारे में अपने स्थानीय भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई लें। औरतों के जनाज़े की नमाज़ पढ़ने और दफ़न के साथ जाने के मसाइल को एक ही हुक्म न समझें।

आख़िरी बात

जनाज़े की नमाज़ का मक़सद मय्यत के लिए अल्लाह सुब्हानवताला से मग़फ़िरत और रहमत माँगना है। चार तकबीरों का क्रम याद करें, दुरूद शरीफ़ और मय्यत की दुआ सीखें और नमाज़ में इमाम की इक्तिदा करें।

अल्लाह तआला हमारे तमाम मरहूमीन की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्रों को रोशन करे और उनके घर वालों को सब्र अता फ़रमाए। आमीन।

नोट: पहली तकबीर के बाद पढ़ी जाने वाली चीज़ और चौथी तकबीर के बाद सलाम के तरीक़े में मान्य सुन्नी अमल के बीच फ़र्क़ पाया जाता है।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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