Juma Namaz Ka Tarika – जुमा की नमाज़
जुमा की नमाज़ क्या है?
जुमा की नमाज़ यानी सलातुल-जुमा मुसलमानों के लिए हफ़्ते की एक ख़ास इबादत है। यह शुक्रवार को ज़ुहर के वक़्त जमाअत के साथ अदा की जाती है। इसमें फ़र्ज़ नमाज़ से पहले इमाम ख़ुत्बा देते है और उसके बाद जमाअत के साथ 2 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ी जाती है।
जुमा की नमाज़ का मक़सद सिर्फ़ नमाज़ अदा करना नहीं, बल्कि अल्लाह का ज़िक्र करना, दीन की बातें सुनना और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाना भी है।
इस लेख में हम Juma Namaz Ka Tarika आसान स्टेप्स में सीखेंगे, ताकि नए लोग भी नमाज़ की तरतीब और हर मुक़ाम पर पढ़े जाने वाले अल्फ़ाज़ को समझ सकें।
जुमा की नमाज़ में कितनी रकअतें होती हैं?
जुमा की नमाज़ की फ़र्ज़ रकअतें 2 होती हैं, जो इमाम के पीछे जमाअत के साथ अदा की जाती हैं।
जुमा से पहले और बाद में सुन्नत और नफ़्ल नमाज़ें भी पढ़ी जाती हैं। उनकी तफ़सील में अमल और रिवायतों के मुताबिक़ फ़र्क़ पाया जाता है, इसलिए यहाँ हम ख़ास तौर पर 2 रकअत फ़र्ज़ का तरीक़ा सीखेंगे।
नमाज़ से पहले की तैयारी
जुमा की नमाज़ के लिए जाने से पहले इन बातों का ख़याल रखें:
- ग़ुस्ल करें, साफ़ कपड़े पहनें और ख़ुशबू लगाएँ, अगर मुमकिन हो।
- बदन, कपड़ों और नमाज़ की जगह की पाकीज़गी का ख़याल रखें।
- वुज़ू करके मस्जिद जाएँ।
- क़िबला यानी ख़ाना-ए-काबा की तरफ़ रुख़ करके सफ़ में खड़े हों।
- ख़ुत्बा शुरू होने से पहले पहुँचने की कोशिश करें।
- ख़ुत्बे के दौरान ख़ामोशी से बैठकर ध्यान से सुनें।
- दिल में इरादा करें कि आप अल्लाह के लिए जुमा की 2 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ इमाम के पीछे अदा कर रहे हैं।
नियत: नियत दिल के इरादे का नाम है। किसी ख़ास अरबी जुमले को ज़ुबान से कहना ज़रूरी नहीं है। जैसे ” नियत करता / करती हूँ मैं , 2 रकअत नमाज़ फर्ज पड़ने की , वास्ते अल्लाह ताला के , पीछे इस इमाम के, मुँह मेरा काबे शरीफ की तरफ ”
जुमा की नमाज़ के 10 आसान स्टेप्स
1. ख़ुत्बा सुनें
जुमा की फ़र्ज़ नमाज़ से पहले इमाम ख़ुत्बा देता है। आम तौर पर इसमें दो ख़ुत्बे होते हैं, जिनके बीच इमाम थोड़ी देर बैठता है।
इस दौरान:
- ख़ामोशी से बैठें।
- ख़ुत्बे पर ध्यान दें।
- बातचीत, मोबाइल इस्तेमाल करने और दूसरों को परेशान करने से बचें।
- ख़ुत्बे के दौरान इमाम की बात सुनें और नमाज़ के लिए तैयार रहें।
हदीस का हवाला- सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 934 और सहीह मुस्लिम, हदीस 851 में ख़ुत्बे के दौरान किसी को ख़ामोश रहने के लिए कहने तक को बेकार बात में शामिल बताया गया है।
2. तकबीर-ए-तहरीमा कहें
ख़ुत्बा पूरा होने के बाद इक़ामत कही जाती है और इमाम नमाज़ शुरू कराता है।
इमाम के साथ नमाज़ शुरू करते हुए तकबीर कहें।
अरबी-
اللّٰهُ أَكْبَرُ
हिंदी में पढ़ें-
अल्लाहु अकबर।
Hinglish-
Allahu Akbar.
मतलब: अल्लाह सबसे बड़ा है।
इसके बाद क़ियाम यानी खड़े होने की हालत में रहें और इमाम की पैरवी करें।
3. पहली रकअत में क़ियाम
क़ियाम का मतलब नमाज़ में खड़े होना है। जुमा की फ़र्ज़ नमाज़ जमाअत के साथ होती है, इसलिए इमाम की क़िरअत को ध्यान से सुनें।
इमाम पहली रकअत में सूरह फ़ातिहा और क़ुरआन की दूसरी सूरह या आयतें पढ़ता है। जुमा की नमाज़ में क़िरअत आवाज़ से होती है।
सूरह फ़ातिहा की शुरुआत-
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी में पढ़ें-
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
Hinglish-
Bismillahir-Rahmanir-Raheem.
मतलब- अल्लाह के नाम से शुरू, जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम करने वाला है।
ज़रूरी बात- इमाम के पीछे सूरह फ़ातिहा पढ़ने या ख़ामोश रहने के बारे में फ़िक़्ही इख़्तिलाफ़ है। इसलिए अपनी जमाअत में अमल के तरीक़े के लिए भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई लें। इमाम की क़िरअत के दौरान अपनी तरफ़ से ऊँची आवाज़ में न पढ़ें।
4. रुकू करें
इमाम के रुकू में जाने पर उसके पीछे रुकू करें। रुकू में दोनों हाथ घुटनों पर रखें और जहाँ तक मुमकिन हो पीठ सीधी रखें।
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
हिंदी में पढ़ें-
सुब्हाना रब्बियल अज़ीम।
Hinglish-
Subhana Rabbiyal Azeem.
मतलब: मेरा अज़मत वाला रब हर ऐब से पाक है।
यह तस्बीह रुकू में पढ़ी जाती है। इमाम से पहले रुकू या सज्दे में न जाएँ।
5. रुकू से उठें
इमाम के रुकू से उठने पर उसके साथ सीधे खड़े हों। इस हालत को क़ौमा कहते हैं।
अरबी-
سَمِعَ اللّٰهُ لِمَنْ حَمِدَهُ
हिंदी में पढ़ें-
समिअल्लाहु लिमन हमिदह।
Hinglish-
Sami’Allahu liman hamidah.
मतलब- अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी हम्द की।
इसके बाद पढ़ें-
अरबी-
رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ
हिंदी में पढ़ें-
रब्बना व लकल हम्द।
Hinglish-
Rabbana wa lakal hamd.
मतलब- ऐ हमारे रब! तमाम हम्द तेरे ही लिए है।
इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने वाले के लिए इन अल्फ़ाज़ को कहने के तरीक़े में फ़र्क़ पाया जाता है। अपनी जमाअत में सीखे हुए सही तरीक़े पर अमल करें।
6. पहला सज्दा करें
इमाम के साथ अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे में जाएँ। सज्दे में पेशानी और नाक ज़मीन पर रखें, दोनों हथेलियाँ, दोनों घुटने और पैरों की उँगलियाँ भी ज़मीन पर हों।
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
हिंदी में पढ़ें-
सुब्हाना रब्बियल आला।
Hinglish-
Subhana Rabbiyal A’la.
मतलब- मेरा सबसे बुलंद रब हर ऐब से पाक है।
सज्दे में इत्मीनान से ठहरें और इमाम की पैरवी करें।
7. दोनों सज्दों के बीच बैठें
पहले सज्दे के बाद इमाम के साथ बैठें। इस बैठने को जलसा कहते हैं।
इस दौरान यह दुआ पढ़ सकते हैं-
अरबी-
رَبِّ اغْفِرْ لِي
हिंदी में पढ़ें-
रब्बिग़फ़िर ली।
Hinglish-
Rabbighfir li.
मतलब- ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ फ़रमा।
इसके बाद इमाम के साथ दूसरा सज्दा करें और उसमें भी पढ़ें:
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
हिंदी में पढ़ें-
सुब्हाना रब्बियल आला।
Hinglish-
Subhana Rabbiyal A’la.
इस तरह पहली रकअत के दोनों सज्दे पूरे हो जाएँगे।
8. दूसरी रकअत अदा करें
दूसरे सज्दे के बाद इमाम के साथ दूसरी रकअत के लिए खड़े हों।
दूसरी रकअत में भी इमाम क़िरअत करेगा और उसके बाद रुकू, क़ौमा, पहला सज्दा, जलसा और दूसरा सज्दा होगा।
हर मुक़ाम पर इमाम की पैरवी करें और इत्मीनान से नमाज़ अदा करें।
दूसरी रकअत के दोनों सज्दे पूरे होने के बाद इमाम के साथ आख़िरी क़ायदे में बैठ जाएँ।
9. अत्तहिय्यात और दुरूद-ए-इब्राहीमी पढ़ें
आख़िरी क़ायदे में अत्तहिय्यात पढ़ें।
अरबी-
التَّحِيَّاتُ لِلّٰهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللّٰهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
हिंदी में पढ़ें-
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबात। अस्सलामु अलैका अय्युहन्नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुह। अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन। अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।
Hinglish-
At-tahiyyatu lillahi was-salawatu wat-tayyibat. Assalamu alaika ayyuhan-nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuh. Assalamu alaina wa ala ibadillahis-saliheen. Ashhadu alla ilaha illallah wa ashhadu anna Muhammadan abduhu wa rasooluh.
अत्तहिय्यात में उँगली का इशारा कैसे करें?
अत्तहिय्यात पढ़ते वक़्त तर्जनी उँगली (शहादत वाली उँगली) के इशारे का तरीक़ा यह है:
- जब आप “अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह” पढ़ें, तो तर्जनी उँगली से इशारा करें।
- उँगली उठाने और नीचे करने या उसे किस तरह रखने का तरीक़ा अलग-अलग फ़िक़्ही राय में अलग मिलता है।
- इसलिए अपने भरोसेमंद आलिम से सही तरीक़ा सीखें।
Hinglish- Ashhadu alla ilaha illallah पढ़ते वक़्त shahadat wali ungli se ishara karein.
ज़रूरी बात- उँगली के इशारे की ठीक शुरुआत, हरकत और उसे नीचे रखने के तरीक़े के बारे में हदीसों की व्याख्या में मतभेद है।
इसके बाद दुरूद-ए-इब्राहीमी पढ़ें।
अरबी-
اللّٰهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
اللّٰهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
हिंदी में पढ़ें-
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।
अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मद, कमा बारकता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।
Hinglish-
Allahumma salli ala Muhammadin wa ala aali Muhammad, kama sallaita ala Ibrahima wa ala aali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed.
Allahumma barik ala Muhammadin wa ala aali Muhammad, kama barakta ala Ibrahima wa ala aali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed.
10. दुआ पढ़ें और सलाम फेरें
दुरूद-ए-इब्राहीमी के बाद यह क़ुरआनी दुआ पढ़ सकते हैं।
अरबी-
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
हिंदी में पढ़ें-
रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतंव व फ़िल आख़िरति हसनतंव व क़िना अज़ाबन्नार।
Hinglish-
Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina azaban-nar.
मतलब- ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई अता फ़रमा और आख़िरत में भी भलाई अता फ़रमा और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।
क़ुरआन का हवाला- सूरह अल-बक़रह, 2:201।
अब इमाम के साथ सलाम फेरें।
अरबी-
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ
हिंदी में पढ़ें-
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह।
Hinglish-
Assalamu alaikum wa rahmatullah.
पहले दाईं तरफ़ और फिर बाईं तरफ़ चेहरा फेरकर सलाम कहें। इस तरह जुमा की 2 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ पूरी हो जाती है।
जुमा की नमाज़ का आसान ख़ुलासा
| नमाज़ का मुक़ाम | क्या करना है? |
|---|---|
| ख़ुत्बा | ख़ामोशी से सुनें |
| तकबीर | इमाम के साथ नमाज़ शुरू करें |
| पहली रकअत | क़ियाम, रुकू और दो सज्दे |
| दूसरी रकअत | क़ियाम, रुकू और दो सज्दे |
| आख़िरी क़ायदा | अत्तहिय्यात, दुरूद और दुआ |
| सलाम | दाईं और बाईं तरफ़ सलाम फेरें |
याद रखें कि जुमा की फ़र्ज़ नमाज़ इमाम के पीछे जमाअत के साथ अदा की जाती है। यह आम तौर पर अकेले पढ़ी जाने वाली ज़ुहर की नमाज़ की तरह नहीं है।
जुमा की नमाज़ की फ़ज़ीलत
1. क़ुरआन में जुमा का हुक्म
अल्लाह सुब्हानवा तआला सूरह अल-जुमुआ में फरमाते है-
अरबी-
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نُودِيَ لِلصَّلَاةِ مِن يَوْمِ الْجُمُعَةِ فَاسْعَوْا إِلَىٰ ذِكْرِ اللَّهِ وَذَرُوا الْبَيْعَ
हिंदी में पढ़ें-
या अय्युहल्लज़ीना आमनू इज़ा नूदिया लिस्सलाति मिं यौमिल-जुमुआति फस्ओ इला ज़िक्रिल्लाहि व ज़रुल-बैअ।
Hinglish-
Ya ayyuhal-ladhina amanu idha nudiya lis-salati min yawmil-jumu’ati fas’aw ila dhikrillahi wa dharul-bay’.
मतलब- ऐ ईमान वालो! जब जुमे के दिन नमाज़ के लिए पुकारा जाए, तो अल्लाह के ज़िक्र की तरफ़ बढ़ो और कारोबार छोड़ दो।
हवाला- सूरह अल-जुमुआ, 62:9।
2. जुमा की अहमियत
जुमा मुसलमानों को हर हफ़्ते जमाअत के साथ इबादत करने, ख़ुत्बे से नसीहत हासिल करने और अल्लाह को याद करने का मौक़ा देता है।
3. ख़ुत्बा ध्यान से सुनना
जुमा के दिन ख़ुत्बा सुनना नमाज़ की अहम तरतीब का हिस्सा है। इसलिए देर से पहुँचने और ख़ुत्बे के दौरान बातचीत करने से बचें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. जुमा की नमाज़ में कितनी रकअत फ़र्ज़ हैं?
जुमा की फ़र्ज़ नमाज़ 2 रकअत है, जो ख़ुत्बे के बाद इमाम के पीछे जमाअत के साथ अदा की जाती है।
2. क्या जुमा की नमाज़ के बाद ज़ुहर भी पढ़नी होती है?
अगर जुमा की नमाज़ सही तौर पर अदा हो गई है, तो अलग से ज़ुहर के 4 फ़र्ज़ पढ़ने की ज़रूरत नहीं होती।
3. अगर ख़ुत्बा शुरू हो जाए तो मस्जिद में क्या करना चाहिए?
मस्जिद में पहुँचने पर ख़ुत्बे को ध्यान से सुनें और नमाज़ के बारे में अपनी हालत के मुताबिक़ सही रहनुमाई लें। ख़ुत्बे के दौरान दाख़िल होने वाले की दो रकअत तहिय्यतुल-मस्जिद के बारे में सहीह हदीस मौजूद है (सहीह अल-बुख़ारी 930; सहीह मुस्लिम 875)। इस मसले पर अपने भरोसेमंद आलिम से भी रहनुमाई ले सकते हैं।
4. क्या जुमा की नमाज़ घर पर अकेले पढ़ सकते हैं?
जुमा की नमाज़ जमाअत और ख़ुत्बे के साथ जुड़ी हुई है। इसे आम तौर पर घर पर अकेले पढ़ी जाने वाली नमाज़ का विकल्प नहीं बनाया जाता। अगर किसी वजह से जुमा छूट जाए, तो ज़ुहर और अपनी हालत के मुताबिक़ सही अमल के बारे में जानकार आलिम से पूछें।
5. क्या जुमा की नमाज़ में सूरह फ़ातिहा ख़ुद पढ़नी चाहिए?
इमाम के पीछे क़िरअत करने के बारे में उलमा के बीच फ़िक़्ही इख़्तिलाफ़ है। इसलिए अपनी मस्जिद में अपनाए जाने वाले तरीक़े के मुताबिक़ अमल करें और भरोसेमंद आलिम से इसकी तफ़सील सीखें।
आख़िरी बात
जुमा की नमाज़ मुसलमानों के लिए इबादत, नसीहत और अल्लाह के ज़िक्र का अहम मौक़ा है। कोशिश करें कि मस्जिद वक़्त से पहले पहुँचें, ख़ुत्बा ध्यान से सुनें और इमाम के पीछे इत्मीनान के साथ 2 रकअत फ़र्ज़ नमाज़ अदा करें।
अगर आप नमाज़ सीख रहे हैं, तो अरबी अल्फ़ाज़ को सही तलफ़्फ़ुज़ के साथ सीखने की कोशिश करें। हिंदी और Hinglish पढ़ने में मदद कर सकते हैं, लेकिन सही अरबी क़िरअत के लिए किसी जानकार उस्ताद से सीखना बेहतर है।
नमाज़ के तरीके और मालूमात के लिए नीचे लिखे पोस्ट पढ़े –
ख़ुत्बा अल हजाह – जुमे का अरबी खुत्बा
जुमे के ख़ुत्बे के बाद इक़ामत क्यों होती है? इक़ामत में क्या पढ़ते हैं?
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