खाना खाने की दुआ
इस्लाम में खाना खाने से पहले अल्लाह का नाम लेना एक अहम सुन्नत है। खाना अल्लाह सुब्हानवा तआला की नेमत है, इसलिए खाने की शुरुआत अल्लाह को याद करके करनी चाहिए।
बहुत से लोग खाना खाने की दुआ के तौर पर “बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह” पढ़ते हैं। इस आर्टिकल में हम इस मशहूर wording के साथ सहीह हदीस से साबित “बिस्मिल्लाह” के बारे में भी जानेंगे।
यहाँ आपको खाना खाने की दुआ अरबी, हिंदी में पढ़ने का तरीका, Hinglish, हिंदी और English meaning, हदीस के हवाले, कुरआन की हिदायत, फ़ज़ीलत और खाने के सुन्नत आदाब मिलेंगे।
खाना खाने की दुआ
खाना शुरू करते समय अल्लाह का नाम लेना चाहिए। इसके लिए सबसे छोटी और सहीह हदीस से साबित wording है:
1. बिस्मिल्लाह
अरबी-
بِسْمِ اللَّهِ
हिंदी में पढ़ने का तरीका-
बिस्मिल्लाह
Hinglish-
Bismillah
हिंदी में मतलब-
अल्लाह के नाम से।
English Meaning-
In the name of Allah.
यह खाना शुरू करने के लिए सबसे आसान wording है और इसे हर बार खाना खाने से पहले पढ़ने की आदत बनानी चाहिए।
2. बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह
यह खाना खाने से पहले पढ़ी जाने वाली मशहूर wording है, जिसे कई दुआ की किताबों में शामिल किया गया है।
अरबी-
بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى بَرَكَةِ اللَّهِ
हिंदी में पढ़ने का तरीका-
बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह
Hinglish-
Bismillahi wa ala barakatillah
हिंदी में मतलब-
अल्लाह के नाम से और अल्लाह की बरकत के साथ।
English Meaning-
In the name of Allah and with the blessings of Allah.
इस wording की हदीस के बारे में ज़रूरी बात-
“बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह” का ज़िक्र बाद के दस्तावेज़ों में मिलता है। कुछ आलिमों ने इसे हज़रत इब्ने अब्बास रदिअल्लाहुताला अन्हु से मंसूब रिवायतों के साथ जोड़ा है।
लेकिन इस खास wording को नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सहीह और साफ़ तौर पर साबित की गई मसनून दुआ के रूप में पेश करने में एहतियात ज़रूरी है। कुछ किताबों में بِسْمِ اللَّهِ وَبَرَكَةِ اللَّهِ के अल्फ़ाज़ मिलते हैं, जबकि “وَعَلَى” वाली wording के लिए अलग किताबों में जिक्र मिलता है।
- बिस्मिल्लाह: खाना शुरू करते समय सहीह हदीस से साबित अल्लाह का नाम।
- बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह: मशहूर दुआ wording, लेकिन इसे नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से तय रूप से सहीह सनद वाली दुआ कहने से बचना चाहिए।
जो लोग केवल “बिस्मिल्लाह” पढ़ते हैं, वे सहीह हदीस की हिदायत पर अमल कर रहे हैं।
खाना खाने से पहले बिस्मिल्लाह की सही हदीस
हज़रत उमर बिन अबी सलमा रदिअल्लाहुताला अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फ़रमाया –
“ऐ लड़के! अल्लाह का नाम लो, दाहिने हाथ से खाओ और अपने सामने से खाओ।”
हवाला – सहीह अल-बुखारी, हदीस 5376; सहीह मुस्लिम, हदीस 2022।
इस हदीस में नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने खाना खाने के तीन अहम आदाब बताए –
- अल्लाह का नाम लेना।
- दाहिने हाथ से खाना।
- अपने सामने से खाना।
इससे मालूम होता है कि खाना शुरू करते समय बिस्मिल्लाह कहना नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की हिदायत है।
अगर खाना शुरू करते समय बिस्मिल्लाह भूल जाएँ
इंसान कभी-कभी जल्दबाज़ी में खाना शुरू कर देता है और बिस्मिल्लाह पढ़ना भूल जाता है। जब याद आए, तो यह दुआ पढ़ सकता है-
अरबी-
بِسْمِ اللَّهِ أَوَّلَهُ وَآخِرَهُ
हिंदी में पढ़ने का तरीका-
बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आख़िरहू
Hinglish-
Bismillahi awwalahu wa akhirahu
हिंदी में मतलब-
अल्लाह के नाम से, इसकी शुरुआत में भी और इसके आख़िर में भी।
English Meaning-
In the name of Allah, at its beginning and at its end.
हदीस का हवाला – सुनन अबू दाऊद, हदीस 3767।
इस हदीस में बताया गया है कि अगर खाना शुरू करते समय अल्लाह का नाम लेना भूल जाएँ, तो याद आने पर यह दुआ पढ़ें।
खाना खाने की दुआ की फ़ज़ीलत
खाना खाने से पहले बिस्मिल्लाह कहना अल्लाह की याद और सुन्नत पर अमल का एक आसान तरीका है।
1. अल्लाह की याद
बिस्मिल्लाह कहकर खाना शुरू करने से हम अल्लाह का नाम याद करते हैं और उसकी नेमत को पहचानते हैं।
2. नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत पर अमल
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने खाना खाते समय अल्लाह का नाम लेने की हिदायत दी। इसीलिए मुसलमान को इसे अपनी रोज़ाना की आदत बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
3. खाने में बरकत की उम्मीद
अल्लाह सुब्हानवा तआला ही हमें रोज़ी देता है। खाना शुरू करते समय उसका नाम लेना और उसकी बरकत की उम्मीद रखना शुक्र और अल्लाह की याद का एक तरीका है।
यह बात जहन में रखें कि किसी खास दुनियावी फ़ायदे की गारंटी केवल इस wording से नहीं दी जानी चाहिए।
4. बच्चों को सुन्नत सिखाना
वालिदेन अपने बच्चों को छोटी उम्र से खाना शुरू करने से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ना सिखा सकते हैं। यह एक आसान इस्लामी आदत है, जिसे बच्चे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपना सकते हैं।
खाना खाने के बारे में कुरआन की हिदायत
कुरआन मजीद में अल्लाह तआला ने हलाल और पाकीज़ा चीज़ें खाने और उसकी नेमतों पर शुक्र करने की हिदायत दी है।
सूरह अल-बक़रा – आयत 172
अल्लाह तआला ईमान वालों को पाकीज़ा चीज़ें खाने और उसका शुक्र अदा करने की हिदायत देता है।
हवाला- सूरह अल-बक़रा, 2:172
सूरह अन-नहल – आयत 114
इस आयत में अल्लाह की दी हुई हलाल और पाकीज़ा रोज़ी खाने और उसकी नेमत का शुक्र करने का ज़िक्र है।
हवाला- सूरह अन-नहल, 16:114
ज़रूरी बात- इन आयतों में खाने से पहले “बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह” के खास अल्फ़ाज़ नहीं बताए गए हैं। खाने के वक़्त अल्लाह का नाम लेने की खास हिदायत हदीस से मिलती है।
खाना खाने के सुन्नत आदाब
इस्लाम में खाने के कुछ अच्छे आदाब बताए गए हैं। मुसलमान को अपनी हैसियत और सहूलियत के मुताबिक इन पर अमल करना चाहिए।
1. खाना शुरू करते समय बिस्मिल्लाह कहना
खाना शुरू करने से पहले अल्लाह का नाम लें।
2. दाहिने हाथ से खाना
नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने दाहिने हाथ से खाने की हिदायत दी है।
हवाला- सहीह अल-बुखारी 5376 और सहीह मुस्लिम 2022।
3. अपने सामने से खाना
जब सभी लोग एक ही बर्तन में खा रहे हों, तो अपने सामने से खाना चाहिए।
4. खाना बर्बाद न करना
अल्लाह की नेमत की क़द्र करनी चाहिए और ज़रूरत के मुताबिक खाना लेना चाहिए।
5. खाने के बाद अल्लाह का शुक्र करना
खाना खाने के बाद अल्लाह की हम्द करें और मसनून दुआ पढ़ने की कोशिश करें।
खाना खाने के बाद की दुआ
खाना खाने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए यह मसनून दुआ पढ़ी जा सकती है-
अरबी-
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنِي هَذَا وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ
हिंदी में पढ़ने का तरीका-
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिन मिन्नी व ला क़ुव्वह।
Hinglish-
Alhamdu lillahil-ladhi at’amani hadha wa razaqanihi min ghairi hawlin minni wa la quwwah.
हिंदी में मतलब-
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जिसने मुझे यह खाना खिलाया और मेरी किसी ताक़त और क़ुव्वत के बग़ैर इसे मुझे रोज़ी के तौर पर दिया।
English Meaning-
All praise is for Allah who fed me this and provided it for me without any strength or power from me.
हदीस का हवाला: सुनन अबू दाऊद 4023 और जामे अत-तिर्मिज़ी 3458 में खाने के बाद की दुआ से संबंधित रिवायतें मिलती हैं।
नोट: खाने के बाद की दुआ के अलग-अलग मसनून अल्फ़ाज़ भी रिवायतों में मिलते हैं। दुआ पढ़ते समय सही अरबी और हवाले का ध्यान रखना चाहिए।
खाना खाने की दुआ से जुड़े 5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. खाना खाने से पहले कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?
खाना शुरू करने से पहले “बिस्मिल्लाह” कहना चाहिए। यह अल्लाह का नाम लेकर खाना शुरू करने की सुन्नत है।
2. बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह का क्या मतलब है?
इसका मतलब है- “अल्लाह के नाम से और अल्लाह की बरकत के साथ।” यह खाना शुरू करने से पहले पढ़ी जाने वाली मशहूर wording है, लेकिन इसे नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से निश्चित रूप से सहीह सनद वाली मसनून दुआ के रूप में पेश करने में एहतियात ज़रूरी है।
3. अगर खाना खाते समय बिस्मिल्लाह भूल जाएँ तो क्या पढ़ें?
जब याद आए, तो पढ़ें-
بِسْمِ اللَّهِ أَوَّلَهُ وَآخِرَهُ
बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आख़िरहू।
यह हदीस सुनन अबू दाऊद 3767 में रिवायत हुई है।
4. क्या खाना खाने से पहले बिस्मिल्लाह कहना ज़रूरी है?
खाना शुरू करते समय अल्लाह का नाम लेने की हिदायत सही हदीस में आई है। इसके फ़िक़्ही हुक्म की तफ़सील में उलमा के बीच चर्चा मिलती है। इसलिए इसे मामूल बनाना चाहिए और जानबूझकर छोड़ने से बचना चाहिए।
5. क्या खाना खाने के बाद भी कोई दुआ है?
जी हाँ। नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से खाने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करने की दुआएँ रिवायत हुई हैं। ऊपर दी गई दुआ में अल्लाह की हम्द और उसकी नेमत का शुक्र अदा किया जाता है।
नतीजा
खाना खाने से पहले बिस्मिल्लाह कहना एक आसान और अहम सुन्नत है। हमें चाहिए कि हर बार खाना शुरू करते समय अल्लाह का नाम लें और उसकी दी हुई नेमतों का शुक्र अदा करें।
“बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह” एक मशहूर wording है, लेकिन सहीह हदीस से स्पष्ट रूप से साबित मुख्य हिदायत “बिस्मिल्लाह” कहना है।
अल्लाह सुब्हानवा तआला हमें अपने प्यारे नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नतों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
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