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नमाज़ के बाद की दुआ (3 Powerful namaz ke baad ki dua in hindi)

नमाज़ के बाद की दुआ (namaz ke baad ki dua in hindi)

नमाज़ के बाद की दुआ हर मुसलमान के लिए अल्लाह को याद करने, अपनी कमियों की माफ़ी मांगने और उसकी रहमत हासिल करने का खूबसूरत ज़रिया है। बहुत से लोग फ़र्ज़ नमाज़ के बाद अलग-अलग दुआएँ पढ़ते हैं, लेकिन सवाल यह है कि नमाज़ के बाद सबसे authentic और मस्नून दुआ क्या है?

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से साबित है कि आप सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम नमाज़ पूरी करने के बाद पहले तीन बार इस्तिग़फ़ार करते थे और फिर एक बहुत खूबसूरत दुआ पढ़ते थे।

नमाज़ के बाद की मस्नून दुआ (namaz ke baad ki dua in hindi)

फ़र्ज़ नमाज़ खत्म करने और सलाम फेरने के बाद सबसे पहले पढ़ें –

अस्तग़फ़िरुल्लाह – 3 बार

Arabic-

أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ

Hindi Text-

अस्तग़फ़िरुल्लाह
अस्तग़फ़िरुल्लाह
अस्तग़फ़िरुल्लाह

Hinglish-

Astaghfirullah
Astaghfirullah
Astaghfirullah

हिंदी मायने- 

मैं अल्लाह से अपनी मग़फ़िरत और माफ़ी मांगता हूँ।

English Meaning-

I seek forgiveness from Allah.

नमाज़ के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ (namaz ke baad ki dua in hindi)

इस्तिग़फ़ार तीन बार पढ़ने के बाद यह मस्नून दुआ पढ़ें –

Arabic Dua-

اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ

Hindi Text-

अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिन्कस्सलामु, तबारक्ता या ज़ल-जलालि वल-इकराम।

Hinglish-

Allahumma Antas-Salamu Wa Minkas-Salamu, Tabarakta Ya Dhal-Jalali Wal-Ikram.

हिंदी मायने- 

ऐ अल्लाह! तू ही सलामती वाला है और सारी सलामती तेरी ही तरफ़ से है। तू बहुत बरकत वाला है, ऐ जलाल और इज़्ज़त वाले।

English Meaning-

O Allah, You are Peace, and from You comes peace. Blessed are You, O Possessor of Majesty and Honor.

नमाज़ के बाद यह दुआ क्यों पढ़ी जाती है? (namaz ke baad ki dua in hindi)

नमाज़ अल्लाह की बहुत बड़ी इबादत है, लेकिन इंसान अपनी इबादत में भी गलतियाँ और कमियाँ कर सकता है। कभी ध्यान कम हो जाता है, कभी ख़ुशूअ पूरी तरह नहीं रहता और कभी इंसान से कोई कमी हो जाती है।

इसीलिए नमाज़ पूरी करने के बाद सबसे पहले अल्लाह से माफ़ी मांगना हमें आजिज़ी सिखाता है।

इसके बाद हम अल्लाह की तारीफ़ करते हुए कहते हैं कि असली सलामती और अमन सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से है।

क़ुरआन में भी नमाज़ पूरी होने के बाद अल्लाह को याद करने की हिदायत मिलती है:

“फिर जब तुम नमाज़ पूरी कर लो तो अल्लाह को याद करो…” – Surah An-Nisa 4:103

यह आयत नमाज़ के बाद अल्लाह के ज़िक्र की अहमियत को बताती है।

हदीस से साबित दुआ

हज़रत थौबान रदिअल्लाहु ताला अन्हु से रिवायत है कि जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम नमाज़ पूरी करते तो तीन बार अल्लाह से मग़फ़िरत मांगते और फिर यह दुआ पढ़ते –

اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ تَبَارَكْتَ ذَا الْجَلَالِ وَالإِكْرَامِ

Sahih Muslim – Hadith 591

यह रिवायत नमाज़ के बाद तीन बार इस्तिग़फ़ार करने और फिर अल्लाहुम्मा अंतस सलाम पढ़ने की authentic Sunnah को साबित करती है।

नमाज़ के बाद सही तरीका

हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आप यह आसान तरीका अपना सकते हैं –

1. सलाम फेरकर नमाज़ पूरी करें।

2. तीन बार पढ़ें – अस्तग़फ़िरुल्लाह

3. फिर पढ़ें – अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिन्कस्सलाम…

4. इसके बाद दूसरे मस्नून अज़कार और तस्बीह पढ़ सकते हैं।

नमाज़ के बाद अल्लाह का ज़िक्र करना मुसलमान की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इबादत का सिलसिला जारी रखता है।

इस दुआ की फ़ज़ीलत (namaz ke baad ki dua in hindi)

1. सुन्नत पर अमल

यह दुआ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से authentic Hadith में साबित है। इसलिए इसे पढ़ना हमें नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत पर अमल करने का मौका देता है।

2. मग़फ़िरत मांगने का मौका

नमाज़ के बाद तीन बार अस्तग़फ़िरुल्लाह पढ़कर इंसान अपनी कमियों और गुनाहों के लिए अल्लाह से माफ़ी मांगता है।

3. अल्लाह की अज़मत का इकरार

इस दुआ में हम मानते हैं कि असली सलामती और अमन सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से है।

4. दिल को सुकून

जब इंसान नमाज़ के बाद अल्लाह को याद करता है, तो उसका रिश्ता अपने रब से मज़बूत होता है और दिल में सुकून महसूस होता है।

5. रोज़ाना अल्लाह की याद

पाँच वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ के बाद यह ज़िक्र करने से इंसान दिन भर बार-बार अपने रब को याद करता है।

नमाज़ के बाद कौन सी दुआ पढ़ें? (namaz ke baad ki dua in hindi)

अगर आप एक आसान और authentic शुरुआत करना चाहते हैं, तो यह पढ़ें – अस्तग़फ़िरुल्लाह – 3 बार

फिर – अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिन्कस्सलामु, तबारक्ता या ज़ल-जलालि वल-इकराम।

यह तरीका Sahih Muslim की authentic Hadith से साबित है।

नमाज़ के बाद दुआ की अहमियत (namaz ke baad ki dua in hindi)

दुआ मोमिन का अपने रब से सीधा रिश्ता है। नमाज़ हमें अल्लाह के सामने खड़ा करती है और नमाज़ के बाद का ज़िक्र हमें उस इबादत के बाद भी अल्लाह की याद में रखता है।

हमें सिर्फ़ दुआ के लफ्ज़ याद करने पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि उनके मतलब को समझकर और दिल से अल्लाह को याद करना चाहिए।

नमाज़ के बाद इस्तिग़फ़ार करना यह भी सिखाता है कि इंसान अपनी इबादत पर घमंड न करे। हमें हमेशा अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत की ज़रूरत रहती है।

FAQ –(namaz ke baad ki dua in hindi)

1. नमाज़ के बाद सबसे पहले क्या पढ़ना चाहिए?

फ़र्ज़ नमाज़ पूरी करने के बाद तीन बार अस्तग़फ़िरुल्लाह पढ़ना और उसके बाद अल्लाहुम्मा  अंतस सलाम  पढ़ना authentic Hadith से साबित है।

2. क्या यह दुआ हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, सहीह मुस्लिम की रिवायत में नमाज़ पूरी करने के बाद इस ज़िक्र का तज़किरा मिलता है।

3. नमाज़ के बाद अस्तग़फ़िरुल्लाह कितनी बार पढ़ना चाहिए?

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से नमाज़ के बाद तीन बार इस्तिग़फ़ार करना साबित है।

4. अल्लाहुम्मा अंतस सलाम का मतलब क्या है?

इसका मतलब है –

ऐ अल्लाह! तू ही सलामती वाला है और सारी सलामती तेरी ही तरफ़ से है। तू बहुत बरकत वाला है, ऐ जलाल और इज़्ज़त वाले।

5. क्या नमाज़ के बाद अपनी ज़रूरत के लिए दुआ मांग सकते हैं?

जी हाँ, मुसलमान अल्लाह से अपनी दुनिया और आख़िरत की भलाई, हिदायत, मग़फ़िरत और दूसरी जायज़ ज़रूरतों के लिए दुआ कर सकता है। दुआ करते समय हमेशा अल्लाह से उम्मीद और अच्छे अदब के साथ मांगना चाहिए।

नतीजा (namaz ke baad ki dua in hindi)

नमाज़ के बाद की दुआ सिर्फ़ कुछ लफ्ज़ पढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि यह अल्लाह से अपने रिश्ते को मज़बूत करने का खूबसूरत मौका है।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत के मुताबिक़ नमाज़ पूरी करने के बाद – अस्तग़फ़िरुल्लाह – 3 बार

फिर –  अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिन्कस्सलामु, तबारक्ता या ज़ल-जलालि वल-इकराम

पढ़ना एक authentic और खूबसूरत मस्नून ज़िक्र है।

अल्लाह सुब्हानवा तआला हमें नमाज़ की पाबंदी करने, उसे सही तरीके से अदा करने और नमाज़ के बाद अपने रब को याद करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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