Nikah Ka Tarika in Islam – 7 ज़रूरी बातें, Khutba, Dua और Nikah Nama की पूरी जानकारी
निकाह क्या है?
इस्लाम में निकाह मर्द और औरत के बीच एक अहम रिश्ता और शरीअत के मुताबिक़ शादी का अक़्द (समझौता) है। निकाह के ज़रिए दोनों एक-दूसरे के शौहर और बीवी बनते हैं और उन पर एक-दूसरे के हुक़ूक़ और ज़िम्मेदारियाँ लागू होती हैं।
निकाह सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि एक संजीदा अहद है। इसमें दोनों की रज़ामंदी, मेहर, निकाह की ज़रूरी शर्तों और गवाहों का ख़ास ख़याल रखा जाता है।
अल्लाह सुब्हानवा तआला क़ुरआन में फरमाते है –
وَأَخَذْنَ مِنكُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا
हिंदी पढ़ने का तरीक़ा- व अख़ज़्ना मिंकुम मीसाक़न ग़लीज़ा।
हिंदी मतलब- और उन्होंने तुमसे मज़बूत अहद लिया है।
हवाला- सूरह अन-निसा, 4:21।
इस आयत में निकाह के रिश्ते की संजीदगी बयान की गई है।
निकाह की 7 ज़रूरी बातें
1. दोनों की रज़ामंदी
निकाह में दूल्हा और दुल्हन की रज़ामंदी बुनियादी अहमियत रखती है। किसी को ज़बरदस्ती शादी पर मजबूर करना सही नहीं है।
2. इजाब और क़ुबूल
इजाब का मतलब शादी की पेशकश और क़ुबूल का मतलब उसे स्वीकार करना है। निकाह के अक़्द में दोनों तरफ़ से साफ़ तौर पर पेशकश और क़ुबूल होना चाहिए, जो एक ही मजलिस में निकाह की शर्तों के मुताबिक़ पूरा हो।
3. मेहर
मेहर वह माल या रकम है जो शौहर अपनी बीवी को उसके हक़ के तौर पर देता है। इसे दुल्हन का हक़ समझना चाहिए, न कि कोई दिखावे की रस्म।
मेहर की रकम और उसकी अदायगी का तरीक़ा पहले से साफ़ कर लेना बेहतर है। मेहर दुल्हन की रज़ामंदी और तयशुदा शर्तों के मुताबिक़ होना चाहिए।
क़ुरआन का हवाला- सूरह अन-निसा, 4:4।
4. गवाह
निकाह में गवाहों की मौजूदगी अहम है। गवाहों की शर्तों और तादाद के बारे में फ़िक़्ही मस्लकों में कुछ तफ़सील है। इसलिए निकाह करवाने वाले क़ाज़ी या भरोसेमंद आलिम से अपने मामले के मुताबिक़ तस्दीक़ कर लें।
5. वली की भूमिका
वली से मुराद दुल्हन का शरीअत के मुताबिक़ सरपरस्त है। वली की ज़रूरत और उसके किरदार की तफ़सील में फ़िक़्ही इख़्तिलाफ़ पाया जाता है। इसलिए निकाह से पहले किसी भरोसेमंद आलिम से सही रहनुमाई लेना बेहतर है।
6. निकाह का ख़ुत्बा
निकाह से पहले ख़ुत्बा पढ़ना सुन्नत से साबित है। इसमें अल्लाह की हम्द, उसकी मदद और मग़फ़िरत की दुआ और क़ुरआन की आयतें शामिल होती हैं।
ख़ुत्बा पढ़ना और निकाह का अक़्द दो अलग बातें हैं। सिर्फ़ ख़ुत्बा पढ़ लेने से निकाह पूरा नहीं हो जाता।
7. निकाह का ऐलान और दस्तावेज़
निकाह को छिपाने के बजाय उसका ऐलान करना और उसका सही रिकॉर्ड रखना अहम है। निकाहनामा, गवाहों की जानकारी और सरकारी शादी का रजिस्ट्रेशन भविष्य में हुक़ूक़ की हिफ़ाज़त में मदद करते हैं।
निकाह का सही तरीक़ा (Nikah Ka Tarika in Islam)
निकाह की तैयारी करते वक़्त इन क़दमों पर अमल किया जा सकता है।
पहला क़दम- ज़रूरी जानकारी तय करें
दूल्हा-दुल्हन के नाम, उनकी रज़ामंदी, मेहर और निकाह से जुड़ी ज़रूरी जानकारी पहले से तय कर लें।
दूसरा क़दम- वली और गवाहों का इंतज़ाम करें
जहाँ शरीअत के मुताबिक़ ज़रूरी हो, वली की मौजूदगी या उसकी सही नुमाइंदगी का इंतज़ाम करें। निकाह के गवाह भी पहले से तय हों।
तीसरा क़दम- निकाह का ख़ुत्बा पढ़ें
इमाम या निकाह पढ़ाने वाला शख़्स अल्लाह की हम्द, दरूद और ख़ुत्बतुल हाजह पढ़ सकता है। इसके साथ निकाह से संबंधित क़ुरआनी आयतें भी पढ़ी जाती हैं।
चौथा क़दम- इजाब और क़ुबूल करें
निकाह पढ़ाने वाला शख़्स दोनों पक्षों की तरफ़ से निकाह की पेशकश और क़ुबूल को साफ़ तौर पर पूरा करवाता है। अल्फ़ाज़ और नुमाइंदगी निकाह की शरीअत के मुताबिक़ शर्तों के अनुरूप होने चाहिए।
पाँचवाँ क़दम- मेहर की तस्दीक़ करें
तयशुदा मेहर की जानकारी निकाह के रिकॉर्ड में सही तरीक़े से दर्ज करें। मेहर दुल्हन का हक़ है।
छठा क़दम- निकाहनामा तैयार करें
निकाहनामा में नाम, मेहर, गवाहों और ज़रूरी शर्तों की जानकारी सही दर्ज करें। दस्तख़त और दस्तावेज़ स्थानीय क़ानून के मुताबिक़ पूरे करें।
सातवाँ क़दम- दुआ करें
निकाह के बाद नए जोड़े के लिए बरकत, मोहब्बत, रहमत और नेक ज़िंदगी की दुआ करें।
याद रहे- निकाह की वैधता सिर्फ़ इन सात क़दमों की गिनती पर निर्भर नहीं करती। असल शर्तें पूरी होना ज़रूरी है। किसी पेचीदा या विवादित मामले में क़ाज़ी या जानकार मुफ़्ती से मशवरा लें।
निकाह का खुत्बा
निकाह के मौक़े पर आम तौर पर ख़ुत्बतुल हाजह (خُطْبَةُ الْحَاجَةِ) पढ़ा जाता है। यह वह ख़ुत्बा है जिसे नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने अहम बातों की शुरुआत में पढ़ना सिखाया था।
इसमें अल्लाह की तारीफ़, उससे मदद और मग़फ़िरत माँगना, और क़ुरआन की आयतें शामिल हैं।
ख़ुत्बे की शुरुआत
अरबी-
الْحَمْدُ لِلَّهِ، نَحْمَدُهُ وَنَسْتَعِينُهُ وَنَسْتَغْفِرُهُ، وَنَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ شُرُورِ أَنْفُسِنَا وَمِنْ سَيِّئَاتِ أَعْمَالِنَا
हिंदी पढ़ने का तरीक़ा-
अल्हम्दु लिल्लाह, नह्मदुहू व नस्तईनुहू व नस्तग़फ़िरुहू, व नऊज़ु बिल्लाहि मिन शुरूरि अनफ़ुसिना व मिन सय्यिआति आ’मालिना।
Hinglish-
Alhamdu lillah, nahmaduhu wa nasta’eenuhu wa nastaghfiruhu, wa na’udhu billahi min shuroori anfusina wa min sayyi’ati a’malina.
English meaning-
All praise belongs to Allah. We praise Him, seek His help and forgiveness, and seek Allah’s protection from the evil within ourselves and from our bad deeds.
हिंदी मतलब-
तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं। हम उसी की तारीफ़ करते हैं, उसी से मदद और मग़फ़िरत माँगते हैं और अपने नफ़्स की बुराइयों तथा बुरे आमाल से अल्लाह की पनाह माँगते हैं।
इसके बाद ख़ुत्बे में कलिमा-ए-शहादत और क़ुरआन की आयतें पढ़ी जाती हैं।
ख़ुत्बे में पढ़ी जाने वाली आयतें
1. सूरह आले इमरान, 3:102
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِ وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنْتُمْ مُسْلِمُونَ
हिंदी में पढ़ने का तरीक़ा –
या अय्युहल्लज़ीना आमनुत्तक़ुल्लाहा हक़्क़ा तुक़ातिही वला तमूतुन्ना इल्ला व अन्तुम मुस्लिमून।
हिंदी मतलब- ऐ ईमान वालो! अल्लाह से ऐसा डर रखो जैसा उससे डरने का हक़ है और तुम्हें मौत न आए मगर इस हाल में कि तुम मुस्लिम हो।
2. सूरह अन-निसा, 4:1
يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمُ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن نَّفْسٍ وَاحِدَةٍ
हिंदी में पढ़ने का तरीक़ा-
या अय्युहन्नासुत्तक़ू रब्बकुमुल्लज़ी ख़लक़कुम मिन नफ़्सिव वाहिदह।
हिंदी मतलब- ऐ लोगो! अपने रब से डरो, जिसने तुम सबको एक जान से पैदा किया।
3. सूरह अल-अहज़ाब, 33:70–71
अरबी-
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَقُولُوا قَوْلًا سَدِيدًا ٧٠
يُصْلِحْ لَكُمْ أَعْمَالَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَقَدْ فَازَ فَوْزًا عَظِيمًا ٧١
हिंदी में पढ़ने का तरीक़ा-
या अय्युहल्लज़ीना आमनुत्तक़ुल्लाहा व क़ूलू क़ौलन सदीदा।
युस्लिह लकुम आ’मालकुम व यग़फ़िर लकुम ज़ुनूबकुम। व मय्युति’ल्लाहा व रसूलहू फ़क़द फ़ाज़ा फ़ौज़न अज़ीमा।
हिंदी मतलब: ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो और सीधी-सच्ची बात कहा करो। अल्लाह तुम्हारे आमाल दुरुस्त कर देगा और तुम्हारे गुनाह माफ़ फ़रमा देगा। और जो अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करे, उसने बड़ी कामयाबी हासिल की।
ये आयतें तक़वा, रिश्तों की अहमियत और सच्ची बात कहने की तालीम देती हैं।
हदीस का हवाला- सुनन अबू दाऊद, किताबुन निकाह, हदीस 2118 — इब्न मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से ख़ुत्बतुल हाजह के बारे में रिवायत है।
निकाह दुआ अरबी में
निकाह के बाद नए जोड़े के लिए एक मशहूर और हदीस से साबित दुआ पढ़ी जाती है।
1. नए जोड़े के लिए दुआ
अरबी-
بَارَكَ اللَّهُ لَكَ، وَبَارَكَ عَلَيْكَ، وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ
हिंदी पढ़ने का तरीक़ा-
बारकल्लाहु लका, व बारका अलैका, व जमा अ बैनाकुमा फ़ी ख़ैर।
Hinglish-
Barakallahu laka, wa baraka ‘alayka, wa jama’a baynakuma fi khayr.
English meaning-
May Allah bless you, shower His blessings upon you, and unite you both in goodness.
हिंदी मतलब-
अल्लाह तुम्हारे लिए बरकत रखे, तुम पर अपनी बरकत नाज़िल करे और तुम दोनों को भलाई के साथ एक साथ रखे।
हवाला- जामे अत-तिर्मिज़ी, किताबुन निकाह, हदीस 1091; सुनन अबू दाऊद, हदीस 2130। हदीस के नंबर अलग-अलग संस्करणों में बदल सकते हैं।
2. घर और परिवार के लिए क़ुरआनी दुआ
अरबी-
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
हिंदी पढ़ने का तरीक़ा-
रब्बना हब लना मिन अज़्वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्रता अयुनिन वजअलना लिल-मुत्तक़ीना इमामा।
Hinglish-
Rabbana hab lana min azwajina wa zurriyyatina qurrata a’yunin waj’alna lil-muttaqeena imama.
English meaning-
Our Lord, grant us from our spouses and offspring comfort to our eyes and make us an example for the righteous.
हिंदी मतलब-
ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और औलाद की तरफ़ से आँखों की ठंडक अता फ़रमा और हमें परहेज़गारों के लिए नमूना बना।
हवाला- क़ुरआन, सूरह अल-फ़ुरक़ान, 25:74।
यह क़ुरआन की दुआ है जिसे नेक घराने और औलाद के लिए पढ़ा जा सकता है।
निकाह नामा क्या है?
निकाहनामा निकाह का लिखित दस्तावेज़ है। इसमें निकाह से जुड़ी अहम जानकारी दर्ज की जाती है, ताकि दोनों के हुक़ूक़ और तयशुदा शर्तों का रिकॉर्ड मौजूद रहे।
निकाहनामा में आम तौर पर ये जानकारियाँ शामिल हो सकती हैं:
- दूल्हा और दुल्हन का पूरा नाम।
- निकाह की तारीख़ और जगह।
- मेहर की रकम और उसकी अदायगी की शर्तें।
- गवाहों के नाम और ज़रूरी जानकारी।
- दोनों पक्षों की रज़ामंदी और दस्तख़त।
- निकाह से जुड़ी दूसरी जायज़ और तयशुदा शर्तें।
निकाहनामा के फ़ॉर्म और क़ानूनी ज़रूरतें जगह के मुताबिक़ अलग हो सकती हैं। भारत में निकाह के साथ लागू क़ानून और रजिस्ट्रेशन की ज़रूरतें भी मालूम कर लें।
ज़रूरी बात- सिर्फ़ निकाहनामा पर दस्तख़त करना, बिना निकाह की ज़रूरी शर्तें पूरी किए, अपने आप निकाह को सही नहीं बना देता।
निकाह के बाद क्या करना चाहिए?
निकाह के बाद शौहर और बीवी को एक-दूसरे के साथ इज़्ज़त, रहमदिली और अच्छे अख़लाक़ से पेश आना चाहिए।
- एक-दूसरे के हुक़ूक़ का ख़याल रखें।
- घर के मामलों में मशवरा करें।
- एक-दूसरे की इज़्ज़त और राज़ की हिफ़ाज़त करें।
- मेहर के हक़ को गंभीरता से लें।
- परेशानी होने पर समझदारी से हल निकालें।
- अल्लाह से नेक और बरकत वाली ज़िंदगी की दुआ करें।
शादी की ख़ुशी में वलीमा करना भी इस्लामी तालीमात में आता है। वलीमा और निकाह का अक़्द अलग बातें हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQs
1. मुस्लिम निकाह का तरीका क्या है?
निकाह में दोनों की रज़ामंदी, इजाब और क़ुबूल, मेहर, गवाहों और शरीअत की दूसरी ज़रूरी शर्तों का पूरा होना अहम है। ख़ुत्बा पढ़ने और निकाह का रिकॉर्ड तैयार करने का भी एहतिमाम किया जाता है।
2. क्या निकाह के लिए ख़ुत्बा पढ़ना ज़रूरी है?
निकाह का ख़ुत्बा सुन्नत से साबित है, लेकिन ख़ुत्बा पढ़ना और निकाह के अक़्द की ज़रूरी शर्तें पूरी करना अलग बातें हैं। सिर्फ़ ख़ुत्बा पढ़ लेने से निकाह नहीं होता।
3. निकाह की दुआ कौन-सी है?
नए जोड़े के लिए मशहूर दुआ है – “بارَكَ اللَّهُ لَكَ، وَبَارَكَ عَلَيْكَ، وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ”। (बारकल्लाहु लका, व बारका अलैका, व जमा अ बैनाकुमा फ़ी ख़ैर) इसका मतलब है कि अल्लाह तुम दोनों के लिए बरकत रखे और तुम्हें भलाई के साथ एक करे।
4. क्या निकाहनामा बनवाना ज़रूरी है?
निकाहनामा निकाह का अहम लिखित रिकॉर्ड है। इसकी धार्मिक और क़ानूनी हैसियत स्थानीय नियमों पर निर्भर कर सकती है। भारत में लागू रजिस्ट्रेशन की ज़रूरतों की भी तस्दीक़ करें।
5. क्या इमाम के बिना निकाह हो सकता है?
निकाह पढ़ाने के लिए इमाम होना अपने आप में हर फ़िक़्ही राय के मुताबिक़ निकाह की बुनियादी शर्त नहीं है। लेकिन निकाह की सभी शर्तों को सही तरीक़े से पूरा करना ज़रूरी है। किसी भी शक की सूरत में जानकार क़ाज़ी या मुफ़्ती की मदद लें।
क़ुरआन और हदीस के हवाले
- क़ुरआन — सूरह अन-निसा, 4:4: मेहर का हक़।
- क़ुरआन — सूरह अन-निसा, 4:21: निकाह का मज़बूत अहद।
- क़ुरआन — सूरह आले इमरान, 3:102: तक़वा की तालीम।
- क़ुरआन — सूरह अन-निसा, 4:1: इंसानी रिश्तों और तक़वा की याददिहानी।
- क़ुरआन — सूरह अल-अहज़ाब, 33:70–71: सच्ची बात कहने की तालीम।
- क़ुरआन — सूरह अल-फ़ुरक़ान, 25:74: नेक बीवी-बच्चों के लिए दुआ।
- सुनन अबू दाऊद, हदीस 2118: ख़ुत्बतुल हाजह।
- जामे अत-तिर्मिज़ी, हदीस 1091: नए जोड़े के लिए दुआ।
ऑनलाइन हवाले-
- ख़ुत्बतुल हाजह- https://sunnah.com/abudawud/12
- निकाह की शर्तों की तफ़सील- https://seekersguidance.org/answers/fiqh-answers-2/what-is-the-correct-method-for-conducting-a-nikah/
- निकाह और मेहर- https://quran.com/4/4
- नेक घराने की दुआ- https://quran.com/25/74
नतीजा- निकाह इस्लाम में एक अहम अहद है। सही तरीक़े से निकाह करने के लिए दोनों की रज़ामंदी, मेहर, गवाहों और लागू शरीअत की शर्तों को समझना ज़रूरी है। निकाह का ख़ुत्बा और दुआ इस मुबारक मौक़े की अहमियत बढ़ाते हैं, जबकि निकाहनामा और क़ानूनी रजिस्ट्रेशन हुक़ूक़ की हिफ़ाज़त में मदद करते हैं। अल्लाह सुब्हानवा तआला हर नए जोड़े को मोहब्बत, सुकून और बरकत वाली ज़िंदगी अता फ़रमाए। आमीन।
होम पेज – https://islamicknowledgehindi.com/
हमारे यूट्यूब पेज को चेक करें ( DoFollow ) – https://www.youtube.com/@DaastanByJafar
__PRESENT
__PRESENT
