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सजदे की 5 बेहतरीन दुआएँ Sajde ki dua : सुजूद में क्या पढ़ें और अल्लाह से क्या माँगें?

सजदे की 5 बेहतरीन दुआएँ – Sajde ki dua

सजदे की दुआ क्या है?

नमाज़ में सजदा बंदे के लिए अल्लाह सुब्हानवा तआला के सामने अपनी आजिज़ी, मोहब्बत और बंदगी का इज़हार करने का एक ख़ास मौक़ा है। इस हालत में बंदा अपने रब की तस्बीह करता है, अपने गुनाहों की माफ़ी माँगता है और अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ करता है।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने सजदे में कसरत से दुआ करने की तरगीब दी है। इसलिए सजदे में सिर्फ़ तस्बीह पढ़ने के साथ-साथ अल्लाह सुब्हानवातआला से मग़फ़िरत, रहमत, हिदायत और दुनिया व आख़िरत की भलाई भी माँगनी चाहिए।

इस लेख में आप जानेंगे कि सजदे में कौन-सी दुआ पढ़ें, उनका सही अरबी मतन क्या है और उन्हें हिंदी व Hinglish में कैसे पढ़ें।

1. सजदे की मस्नून तस्बीह

नमाज़ में सजदा करते हुए सबसे मशहूर तस्बीह यह है-

अरबी-

سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَىٰ

हिंदी में पढ़ें-

सुब्हाना रब्बियल आला

Hinglish-

Subhaana Rabbiyal A’laa

हिंदी में मायने-

मेरा सबसे बुलंद रब हर ऐब और कमी से पाक है।

English Meaning-

Glory be to my Lord, the Most High.

यह सजदे की बुनियादी तस्बीह है। इसे इत्मीनान के साथ पढ़ें और सजदे में जल्दबाज़ी न करें।

ज़रूरी बात- इस तस्बीह के मशहूर होने का मतलब यह नहीं कि सजदे में सिर्फ़ यही पढ़ना चाहिए। सहीह हदीस में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से सजदे में दूसरी दुआएँ पढ़ना भी साबित है।

2. गुनाहों की माफ़ी की दुआ

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम सजदे में अपने तमाम गुनाहों की माफ़ी माँगने की दुआ पढ़ते थे।

अरबी-

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ، دِقَّهُ وَجِلَّهُ، وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ، وَعَلَانِيَتَهُ وَسِرَّهُ

हिंदी में पढ़ें-

अल्लाहुम्मग़फिर ली ज़म्बी कुल्लहू, दिक़्क़हू व जिल्लहु व अव्वलहू व आख़िरहू, व अलानियतहू व सिर्रहू।

Hinglish-

Allahummaghfir li jhanbi kullahu, diqqahu wa jillahu, wa awwalahu wa akhirahu, wa alaaniyatahu wa sirrahu.

हिंदी में मायने-

ऐ अल्लाह! मेरे तमाम गुनाहों को माफ़ फ़रमा दे, छोटे और बड़े गुनाहों को, पहले और आख़िरी गुनाहों को, खुले और छिपे हुए गुनाहों को।

English Meaning-

O Allah, forgive all my sins: the small and the great, the first and the last, and those that are apparent and hidden.

हदीस का हवाला-

सहीह मुस्लिम, हदीस 483। यह दुआ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से सजदे में पढ़ना साबित है।

यह दुआ बंदे को अपने गुनाहों का एहसास दिलाती है और अल्लाह तआला से सच्चे दिल से माफ़ी माँगने की तालीम देती है।

3. अल्लाह की पाकी बयान करने की दुआ

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से रुकू और सजदे में यह ज़िक्र पढ़ना भी साबित है।

अरबी-

سُبُّوحٌ قُدُّوسٌ رَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ

हिंदी में पढ़ें-

सुब्बूहुन क़ुद्दूसुन रब्बुल मलाइकति वर्रूह।

Hinglish-

Subboohun Quddoosun Rabbul-Malaa’ikati war-Rooh.

हिंदी में मायने-

अल्लाह हर ऐब और कमी से पाक है, वह निहायत पाक है, फ़रिश्तों और रूह का रब है।

English Meaning-

The Most Glorious, the Most Holy, the Lord of the angels and the Spirit.

हदीस का हवाला-

सहीह मुस्लिम, हदीस 487a।

यह ज़िक्र अल्लाह सुब्हानवातआला की अज़मत और पाकी बयान करता है। इसे पढ़ते समय दिल में अल्लाह की बड़ाई और उसकी क़ुदरत का एहसास रखें।

4. सजदे में कसरत से दुआ माँगें

सजदे में दुआ माँगने के बारे में एक बहुत अहम हदीस है।

अरबी हदीस-

أَقْرَبُ مَا يَكُونُ الْعَبْدُ مِنْ رَبِّهِ وَهُوَ سَاجِدٌ، فَأَكْثِرُوا الدُّعَاءَ

हिंदी में पढ़ें-

अक़रबु मा यकूनुल अब्दु मिन रब्बिही व हुवा साजिदुन, फ़अक्सिरुद्दुआ।

Hinglish-

Aqrabu maa yakoonul abdu min Rabbihi wa huwa saajid, fa-akthirud-du’aa.

हिंदी में मायने-

बंदा अपने रब के सबसे ज़्यादा क़रीब उस वक़्त होता है जब वह सजदे में होता है, इसलिए सजदे में कसरत से दुआ माँगो।

हदीस का हवाला-

सहीह मुस्लिम, हदीस 482। इसे हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु ने रिवायत किया है।

इस हदीस से मालूम होता है कि सजदा सिर्फ़ जिस्मानी इबादत नहीं, बल्कि अल्लाह सुब्हानवातआला के सामने अपनी ज़रूरतें रखने और उससे मग़फ़िरत माँगने का भी ख़ास मौक़ा है।

5. सजदे में कौन-कौन सी दुआएँ माँगें?

सजदे में अल्लाह सुब्हानवातआला से अपनी जायज़ ज़रूरतों के लिए दुआ कर सकते हैं। मसलन:

अपनी दुआ में अल्लाह तआला की हम्द और उसकी रहमत का ज़िक्र करें। दिल में ख़ुलूस रखें और दुआ की क़बूलियत के लिए जल्दबाज़ी न करें।

नोट: नमाज़ के अंदर अपनी भाषा में दुआ करने के हुक्म में उलमा के दरमियान कुछ इख़्तिलाफ़ है, ख़ास तौर पर फ़र्ज़ नमाज़ और अरबी न जानने वाले शख़्स के बारे में। इसलिए नमाज़ में अरबी में क़ुरआन और सहीह हदीस से साबित दुआएँ पढ़ना बेहतर और एहतियात वाला तरीक़ा है। अपनी भाषा में दुआ करने के बारे में अपने भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई लें।

6. सजदे की दुआ की फ़ज़ीलत

1. अल्लाह से क़ुर्ब का मौक़ा

सहीह मुस्लिम की हदीस के मुताबिक़ सजदा वह हालत है जिसमें बंदा अपने रब के सबसे ज़्यादा क़रीब होता है। इसीलिए इसमें कसरत से दुआ करने की तरगीब दी गई है।

2. गुनाहों की माफ़ी माँगना

सजदे में गुनाहों की माफ़ी वाली मस्नून दुआ पढ़कर बंदा अपने छोटे-बड़े, ज़ाहिर और छिपे हुए गुनाहों के लिए मग़फ़िरत माँगता है।

3. अल्लाह के सामने आजिज़ी

सजदे में इंसान अपनी पेशानी ज़मीन पर रखता है। यह अल्लाह तआला के सामने तवाज़ो, बंदगी और आजिज़ी का इज़हार है।

4. नेकियों में इज़ाफ़ा

सहीह मुस्लिम, हदीस 488 में कसरत से सजदे करने की फ़ज़ीलत बयान हुई है। हदीस के मुताबिक़ हर सजदे के बदले अल्लाह बंदे का एक दर्जा बुलंद करता है और एक गुनाह मिटाता है।

5. दुआ की उम्मीद

सजदे में दुआ करने की नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने ख़ास तौर पर तरगीब दी। इसलिए बंदे को अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखते हुए उससे दुआ करनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि हर दुआ का नतीजा उसी वक़्त या उसी शक्ल में ज़रूर मिलेगा।

7. सजदे की दुआ से जुड़े अहम सवाल

1. सजदे में कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?

सजदे में पहले “सुब्हाना रब्बियल आला” पढ़ सकते हैं। इसके अलावा गुनाहों की माफ़ी की दुआ और दूसरी साबित मस्नून दुआएँ भी पढ़ सकते हैं।

2. सजदे में कितनी बार तस्बीह पढ़ें?

“सुब्हाना रब्बियल आला” तीन बार पढ़ना आम तौर पर सिखाया जाता है। लेकिन इसे तीन बार पढ़ने को हर हालत में एकमात्र सही तरीक़ा न समझें। नमाज़ के तरीक़े और तस्बीह की तादाद के बारे में फ़िक़्ही तफ़सील हो सकती है।

3. क्या सजदे में अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ माँग सकते हैं?

जी हाँ, सजदे में अल्लाह तआला से दुआ करने की तरगीब सहीह हदीस में आई है। नमाज़ के अंदर दुआ के अल्फ़ाज़ और भाषा के बारे में अपने मस्लक के भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई लेना बेहतर है।

4. क्या सजदे में सिर्फ़ अरबी दुआ पढ़ना ज़रूरी है?

मस्नून अरबी दुआएँ पढ़ना बेहतर और एहतियात वाला तरीक़ा है। अपनी भाषा में दुआ के हुक्म में उलमा के दरमियान इख़्तिलाफ़ है, इसलिए नमाज़ के अंदर अपनी भाषा में दुआ करने से पहले आलिम से पूछ लें।

5. क्या सजदे में दुआ माँगने से हर दुआ क़बूल होती है?

सजदे में दुआ करने की ख़ास फ़ज़ीलत है, लेकिन हर दुआ का नतीजा तुरंत या हमारी चाही हुई शक्ल में मिलना ज़रूरी नहीं। अल्लाह तआला से उम्मीद रखें, सब्र करें और जायज़ तरीक़े से दुआ करते रहें।

8. क़ुरआन और हदीस के हवाले

इस लेख में बताई गई दुआओं और फ़ज़ीलत के लिए ये असल हवाले देखें:

हदीस के नंबर अलग-अलग तर्जुमों और एडिशन में बदल सकते हैं। नीचे दिए गए ऑनलाइन हवाले में अरबी मतन और तफ़सील देख सकते हैं।

क़ुरआन के बारे में: इस लेख में दी गई सजदे की ख़ास दुआओं का सीधा हवाला सहीह हदीस से है। इन्हें क़ुरआन की आयत बताना सही नहीं होगा। इसलिए इनके साथ कोई ग़ैर-मुताल्लिक़ आयत जोड़कर उसे सजदे की मस्नून दुआ कहना मुनासिब नहीं।

नतीजा

सजदे की हालत में बंदा अल्लाह तआला के सामने अपनी आजिज़ी का इज़हार करता है। “सुब्हाना रब्बियल आला” पढ़ने के साथ-साथ सहीह हदीस से साबित दुआएँ पढ़ें, अपने गुनाहों की माफ़ी माँगें और अपनी जायज़ ज़रूरतें अल्लाह के सामने रखें।

दुआ करते वक़्त ख़ुलूस, सब्र और अल्लाह की रहमत पर भरोसा रखें। अल्लाह तआला हमें सही तरीक़े से इबादत करने और अपनी रहमत हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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