Site icon islamicknowledgehindi.com

सोने की दुआ – 5 ज़रूरी बातें जो हर मुसलमान को जाननी चाहिए

सोने की दुआ

हर मुसलमान को सोने से पहले अल्लाह तआला को याद करना चाहिए। हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने सोने से पहले एक ख़ास दुआ पढ़ने की तालीम दी है। यह दुआ हमें याद दिलाती है कि हमारी ज़िंदगी और मौत दोनों अल्लाह सुब्हानवा तआला के इख़्तियार में हैं।

 

इस आर्टिकल में आप सोने की दुआ अरबी, हिंदी और Hinglish में पढ़ेंगे। साथ ही इसका मतलब, क़ुरआन और हदीस का हवाला और सोने से पहले की कुछ अहम सुन्नतों के बारे में जानेंगे।

सोने की दुआ क्या है?

सोने से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ को नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने अपनी सुन्नत के ज़रिए सिखाया है। यह छोटी-सी दुआ अल्लाह सुब्हानवातआला पर भरोसे और उसके सामने अपनी बेबसी का इज़हार करती है।

सोने की दुआ अरबी में

بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا

सोने की दुआ हिंदी में 

बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व अहया।

सोने की दुआ Hinglish में

Bismika Allahumma amutu wa ahya.

दुआ का हिंदी में मतलब

ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम के साथ मैं मरता हूँ और जीता हूँ।

दुआ का English Meaning

“In Your name, O Allah, I die and I live.”

सोने की दुआ का हदीस में हवाला

हज़रत हुज़ैफ़ा बिन यमान रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम सोने के लिए बिस्तर पर जाते, तो यह दुआ पढ़ते –

“बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व अहया।”

और जब नींद से जागते, तो अल्लाह की हम्द बयान करते।

हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 6324।

यह हदीस सहीह है और सोने से पहले इस दुआ को पढ़ने की सुन्नत को बयान करती है।

सोने की दुआ की फ़ज़ीलत

1. अल्लाह पर भरोसे का इज़हार

इस दुआ में बंदा अल्लाह सुब्हानवातआला के नाम के साथ अपनी नींद की शुरुआत करता है। यह इस बात का इज़हार है कि उसकी ज़िंदगी और मौत अल्लाह के इख़्तियार में हैं।

2. सुन्नत पर अमल

सोने से पहले यह दुआ पढ़ना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत है। इसे पढ़कर मुसलमान अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की तालीम पर अमल कर सकता है।

3. मौत और आख़िरत की याद

दुआ में “अमूतु” यानी “मैं मरता हूँ” के अल्फ़ाज़ हमें याद दिलाते हैं कि नींद और ज़िंदगी दोनों हमेशा रहने वाली नहीं हैं। हर इंसान को एक दिन अल्लाह के सामने लौटना है।

4. अल्लाह का ज़िक्र

सोने से पहले अल्लाह को याद करना एक नेक अमल है। यह दुआ बंदे को अपने रब की तरफ़ मुतवज्जेह करती है और उसके दिल में अल्लाह की याद को ताज़ा करती है।

क़ुरआन में नींद का ज़िक्र

क़ुरआन मजीद में अल्लाह सुब्हानवातआला ने नींद और रूह के बारे में बयान फ़रमाया है।

सूरह अज़-ज़ुमर, आयत 42

اللَّهُ يَتَوَفَّى الْأَنْفُسَ حِينَ مَوْتِهَا وَالَّتِي لَمْ تَمُتْ فِي مَنَامِهَا

हिंदी में मतलब-

अल्लाह ही जानों को उनकी मौत के वक़्त क़ब्ज़ करता है और जिनकी मौत नहीं आई, उन्हें उनकी नींद के दौरान (एक ख़ास तौर पर) क़ब्ज़ करता है।

हवाला – क़ुरआन, सूरह अज़-ज़ुमर 39:42।

इस आयत में अल्लाह सुब्हानवातआला ने मौत और नींद के बीच एक ताल्लुक़ बयान फ़रमाया है। सोने की दुआ में भी इसी हक़ीक़त की याद दिलाई गई है कि ज़िंदगी और मौत अल्लाह के इख़्तियार में हैं।

सोने से पहले की 5 सुन्नतें

1. वुज़ू करके सोना

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने सोने से पहले नमाज़ के वुज़ू की तरह वुज़ू करने की तालीम दी।

हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 247; सहीह मुस्लिम, हदीस नंबर 2710।

2. बिस्तर को झाड़ना

सोने से पहले बिस्तर को झाड़ लेना सुन्नत है, ताकि उस पर कोई तकलीफ़ देने वाली चीज़ न हो।

हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 6320; सहीह मुस्लिम, हदीस नंबर 2714।

3. दाहिनी करवट सोना ( Right side)

नबी करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने दाहिनी करवट लेटने की तालीम दी।

हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 247; सहीह मुस्लिम, हदीस नंबर 2710।

4. आयतुल कुर्सी पढ़ना

सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़ने की फ़ज़ीलत सहीह हदीस में बयान हुई है। हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु की रिवायत में इसके पढ़ने पर सुबह तक अल्लाह की तरफ़ से हिफ़ाज़त का ज़िक्र है।

हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 2311।

5. सूरह इख़लास, फ़लक़ और नास पढ़ना

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम सोने से पहले सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास पढ़ते और अपने हाथों पर दम करके जिस्म पर फेरते थे।

हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 5017।

सोने के बाद जागने की दुआ

नींद से जागने के बाद अल्लाह सुब्हानवातआला का शुक्र अदा करना भी सुन्नत है।

अरबी दुआ

الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ

हिंदी में उच्चारण

अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अहयाना बअदा मा अमातना व इलैहिन नुशूर।

Hinglish

Alhamdu lillahil-ladhi ahyana ba’da ma amatana wa ilaihin-nushur.

हिंदी में मतलब

तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जिसने हमें मौत जैसी नींद के बाद ज़िंदगी दी और उसी की तरफ़ दोबारा उठकर जाना है।

English Meaning

“All praise is for Allah, who has given us life after causing us to die, and to Him is the resurrection.”

हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 6324।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. सोने की दुआ कौन-सी है?

सोने से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ है –

بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا

हिंदी में – बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व अहया।

2. सोने की दुआ कितनी बार पढ़नी चाहिए?

हदीस में इस दुआ को सोने से पहले पढ़ने का ज़िक्र है। इसमें किसी ख़ास तादाद का ज़िक्र नहीं है, इसलिए इसे एक बार पढ़ना काफ़ी है।

3. क्या सोने की दुआ पढ़ना सुन्नत है?

जी हाँ, सोने से पहले यह दुआ पढ़ना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत है। इसका हवाला सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 6324 में मिलता है।

4. क्या सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़ने की फ़ज़ीलत सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 2311 में बयान हुई है।

5. नींद से जागने के बाद कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?

नींद से जागने के बाद यह दुआ पढ़ें –

الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ

हिंदी में – अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अहयाना बअदा मा अमातना व इलैहिन नुशूर।

हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस नंबर 6324।

नतीजा

सोने की दुआ छोटी होने के बावजूद बहुत अहम है। यह हमें अल्लाह सुब्हानवातआला पर भरोसा करना, उसकी याद में रात गुज़ारना और अपनी ज़िंदगी व मौत को उसके इख़्तियार में मानना सिखाती है।

आइए, हम हर रात सोने से पहले इस दुआ को पढ़ने की आदत बनाएँ और अल्लाह सुब्हानवातआला से अपनी हिफ़ाज़त और रहमत की दुआ करें।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

होम पेज – https://islamicknowledgehindi.com/

हमारे यूट्यूब पेज को चेक करें ( DoFollow ) – https://www.youtube.com/@DaastanByJafar

__PRESENT

__PRESENT

__PRESENT

Exit mobile version