हज क्या है और हज के तरीके ( 19 steps of Hajj in Hindi )

हज (Hajj) इस्लाम का पाँचवाँ और सबसे खाश फ़र्ज़ है। यह हर उस मुसलमान पर फ़र्ज़ (अनिवार्य) है जो हैसियत वाला और सेहतयाब हो। हज हर साल इस्लामी कैलेंडर के आख़िरी महीने ज़िलहिज्जा (Dhul Hijjah) में मक्का मुक़र्रमा में अदा किया जाता है।
हज की शुरुआत हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और उनके बेटे हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) से होती है। अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम (अ.स.) को काबा शरीफ़ की तामीर का हुक्म दिया और इंसानों को अल्लाह की इबादत के लिए बुलाने का फ़रमान दिया। उस वक़्त से लेकर आज तक हज का अमल जारी है। बाद में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने उम्मत को हज की मुकम्मल शकल और तरतीब सिखाई, जिसे आज पूरी उम्मत अपनाती है।
हज के 19 मरहले ( 19 steps of Hajj in Hindi )
1. तैयारी और नीयत Preparation and Intention
हज का पहला क़दम दिल से नीयत करना है कि अल्लाह की ख़ुशनूदी के लिए हज अदा करना है। इसके साथ सामान की तैयारी और सफ़र की दुआएँ पढ़ना शामिल है।
2. एहराम की हालत Enter state of Ihram
मीक़ात ( मक्का में हराम की बौंडरी या निर्धारित जगह) से पहले एहराम पहना जाता है। मर्द दो सफ़ेद कपड़े पहनते हैं जबकि औरतें सादे कपड़े पहनती हैं। इस वक़्त तलबिया पढ़ा जाता है: “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक…”
3. तवाफ़ Tawaf
खाना ए काबा पहुंच कर काबा शरीफ़ के सात चक्कर (तवाफ़) लगाया जाता है। यह अल्लाह की तौहीद और उसकी बंदगी की निशानी है।
4. सफा और मरवा Safa and Marwa
तवाफ़ के बाद सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच सात बार चलना (सई) होता है। यह हज़रत हाजरा (अ.स.) की उस दौड़ की याद है जब उन्होंने बेटे इस्माईल (अ.स.) के लिए पानी की तलाश की थी।
5. बाल कटवाना या मुँडवाना Clip/Shave Hair – (Umrah ends)
सई पूरी होने के बाद मर्द सिर के बाल मुँडवाते या छोटे करते हैं और औरतें हल्का सा बाल काटती हैं। इस तरह उमरा मुकम्मल होता है।
6. आराम और इबादत Resting and Praying
हाजी उमरा के बाद आराम करते हैं और नमाज़ व तिलावत में वक़्त गुज़ारते हैं।
7. दूसरा एहराम Enter state of Ihram
8 ज़िलहिज्जा को हाजी दोबारा एहराम पहनते हैं और हज की नीयत करते हैं।
8. मिना पहुँचना (Arrive at Mina)
हाजी मिना जाते हैं और वहाँ नमाज़ें पढ़ते हैं। मिना में रात गुज़ारी जाती है।
9. यौमे अरफ़ा Day of ‘Arafah
9 ज़िलहिज्जा को हाजी मैदान-ए-अरफ़ात पहुँचते हैं और वहाँ वक़ूफ-ए-अरफ़ात (दुआ और इबादत) करते हैं। यह हज का सबसे अहम रुक्न है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “हज तो अरफ़ा है।”
10. मुज़दलिफ़ा Muzdalifah under the night sky
अरफ़ात से निकलकर हाजी मुज़दलिफ़ा में रात गुज़ारते हैं। यहाँ मग़रिब और ईशा की नमाज़ एक साथ पढ़ी जाती है और सुबह तक अल्लाह की याद में मशग़ूल रहते हैं। यहीं पर जुमरात (शैतान को मारने के लिए) कंकड़ इकट्ठे किए जाते हैं।
11. रमी – शैतान को कंकड़ मारना Rami
10 ज़िलहिज्जा को हाजी जमरात-ए-अक़बा पर सात कंकड़ फेंकते हैं। यह शैतान को रिजेक्ट करने और अल्लाह के हुक्म को मानने की अलामत है।
12. क़ुरबानी Hady
हाजी इस दिन जानवर की क़ुरबानी करते हैं, जैसे हज़रत इब्राहीम (अ.स.) ने बेटे इस्माईल (अ.स.) की क़ुर्बानी का इरादा किया था।
13. बाल मुँडवाना या कटवाना Shaving of the Head
क़ुरबानी के बाद मर्द बाल मुँडवाते या छोटे करते हैं और औरतें हल्का सा बाल काटती हैं।
14. तवाफ़ अल-इफ़ादा Tawaf al-Ifadha
हाजी फिर से काबा का तवाफ़ करते हैं, जिसे तवाफ़-ए-इफ़ादा कहा जाता है। यह हज का लाज़मी हिस्सा है।
15. सई Saai’
इस तवाफ़ के बाद सफा और मरवा के बीच दोबारा सई की जाती है।
16. रमी – दूसरा दिन
11 ज़िलहिज्जा को हाजी तीनों जमरात (छोटा, मध्यम और बड़ा) पर सात-सात कंकड़ मारते हैं।
17. मिना में रात बिताना Spend night at Mina
हाजी मिना में रात गुज़ारते हैं और इबादत करते हैं।
18. रमी -तीसरा दिन
12 ज़िलहिज्जा को हाजी फिर तीनों जमरात पर कंकड़ मारते हैं। चाहे तो इसी दिन मिना से निकल सकते हैं, या 13 तारीख तक रह सकते हैं।
19. तवाफ़-ए-विदा Farewell Tawaf al-Wida
मक्का से रवाना होने से पहले हाजी आख़िरी बार काबा शरीफ़ का तवाफ़ करते हैं। इसे तवाफ़-ए-विदा कहा जाता है।
हज इंसान की रूहानी सफ़ाई और तज़्किया का ज़रिया है। यह इबादत दुनिया भर के मुसलमानों को एकता और बराबरी का पैग़ाम देती है। हज का हर मरहला अल्लाह की मोहब्बत, सब्र, क़ुर्बानी और तौहीद की याद दिलाता है।
दिन के हिसाब से हज के स्टेप्स – Day-wise Hajj Steps
Day 1 – 8th Dhul Hijjah (यौमे तरविया)
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इहराम पहनना
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मिना पहुँचना
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मिना में नमाज़ें अदा करना
Day 2 – 9th Dhul Hijjah (यौमे अरफ़ात)
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अरफ़ात में वक़ूफ़
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अरफ़ात की दुआएँ
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मग़रिब के बाद मुज़दलिफ़ा जाना
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मुज़दलिफ़ा में रात गुज़ारना
Day 3 – 10th Dhul Hijjah (यौमे नहर / ईद उल-अज़हा)
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रमी (जमरात-ए-अक़बा पर कंकड़ मारना)
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क़ुरबानी (Hady)
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सिर मुंडवाना या बाल कटवाना
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तवाफ़ अल ईफ़ादह
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सईं (Safa-Marwa)
Day 4 – 11th Dhul Hijjah
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मिना में रहना
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रमी (तीनों जमरात पर कंकड़ मारना)
Day 5 – 12th Dhul Hijjah
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मिना में रहना
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रमी (तीनों जमरात पर कंकड़ मारना)
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चाहें तो मिना से निकलना (अजल)
Day 6 – 13th Dhul Hijjah
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मिना में रहना
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रमी (तीनों जमरात पर कंकड़ मारना)
आख़िरी अमल
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तवाफ़ अल विदा (विदाई का तवाफ़)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ
Q1. हज कब अदा किया जाता है?
हज इस्लामी महीने ज़िलहिज्जा (Dhul Hijjah) की 8 से 12 या 13 तारीख़ के बीच अदा किया जाता है।
Q2. हज किन पर फ़र्ज़ है?
हर मुसलमान मर्द और औरत पर हज फ़र्ज़ है जो शारीरिक और आर्थिक तौर पर क़ाबिल हो और सफ़र करने में सक्षम हो।
Q3. हज और उमरा में क्या फ़र्क है?
उमरा पूरे साल किया जा सकता है और इसमें अरफ़ात, मुज़दलिफ़ा और मिना वाले अमल शामिल नहीं होते, जबकि हज सिर्फ़ ज़िलहिज्जा में अदा किया जाता है और यह ज़्यादा मुकम्मल इबादत है।
Q4. अरफ़ात का दिन इतना अहम क्यों है?
अरफ़ात का दिन हज का रुक्न-ए-आज़म है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फ़रमाया: “हज तो अरफ़ा है।” इस दिन की दुआएँ और इस्तिग़फ़ार बहुत क़ुबूल होते हैं।
Q5. तवाफ़-ए-विदा (Farewell Tawaf) क्यों किया जाता है?
यह हज का आख़िरी अमल है, जिसमें हाजी अल्लाह के घर (काबा) से विदाई लेते हैं और अपने सफ़र से पहले आख़िरी इबादत अदा करते हैं।
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