5 असरदार नमाज़ के बाद की दुआ Namaz Ke Baad Ki Dua

नमाज़ के बाद की दुआ : 5 बेहतरीन और असरदार दुआएं, अरबी, हिंदी और मतलब के साथ

Namaz Ke Baad Ki Dua

Namaz Ke Baad Ki Dua | Namaz ke baad ki dua in Hindi | Dua After Namaz

नमाज़ इस्लाम का एक अहम फ़र्ज़ है। हर मुसलमान दिन में पाँच वक़्त अल्लाह तआला की इबादत करता है। नमाज़ मुकम्मल करने के बाद अल्लाह का ज़िक्र करना, इस्तिग़फ़ार पढ़ना और उससे दुआ मांगना बहुत फ़ज़ीलत वाला अमल है।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने नमाज़ के बाद पढ़ने के लिए कई अज़कार और दुआएं सिखाई हैं। इनमें अल्लाह से माफ़ी मांगना, उसकी तारीफ़ बयान करना, तस्बीह पढ़ना और अपनी इबादत को बेहतर बनाने की दुआ शामिल है।

इस आर्टिकल में हम नमाज़ के बाद की दुआ अरबी, हिंदी और Hinglish में जानेंगे। साथ ही इनके हिंदी और English मतलब, हदीस के हवाले और इन दुआओं की फ़ज़ीलत भी समझेंगे।

1. नमाज़ के बाद की सबसे पहली दुआ

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम जब नमाज़ मुकम्मल करते थे, तो तीन बार अल्लाह से इस्तिग़फ़ार करते और उसके बाद यह दुआ पढ़ते थे।

अरबी में दुआ-

أَسْتَغْفِرُ اللّٰهَ، أَسْتَغْفِرُ اللّٰهَ، أَسْتَغْفِرُ اللّٰهَ

اللّٰهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ تَبَارَكْتَ ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

अस्तग़फ़िरुल्लाह, अस्तग़फ़िरुल्लाह, अस्तग़फ़िरुल्लाह।

अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिंकस्सलामु तबारकता ज़ल जलालि वल इकराम।

Hinglish-

Astaghfirullah, Astaghfirullah, Astaghfirullah.

Allahumma antas-salamu wa minkas-salamu tabarakta zal-jalali wal-ikram.

हिंदी मतलब-

मैं अल्लाह से माफ़ी मांगता हूं (तीन बार)।

ऐ अल्लाह! तू ही सलामती वाला है और सलामती तेरी ही तरफ़ से है। तू बहुत बरकत वाला है, ऐ बुज़ुर्गी और इज़्ज़त वाले!

English Meaning-

I seek forgiveness from Allah (three times).

O Allah, You are the Source of Peace, and peace comes from You. Blessed are You, Possessor of Majesty and Honour.

हदीस का हवाला-

सहीह मुस्लिम, हदीस 591।

हज़रत सौबान रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम जब नमाज़ से फ़ारिग़ होते, तो तीन बार इस्तिग़फ़ार करते और फिर यह दुआ पढ़ते थे।

2. अल्लाह से इबादत की तौफ़ीक़ मांगने की दुआ

यह एक बहुत ख़ूबसूरत दुआ है, जिसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने हज़रत मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु को हर नमाज़ के बाद पढ़ने की नसीहत फ़रमाई थी।

अरबी में दुआ-

اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَىٰ ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

अल्लाहुम्मा अइन्नी अला ज़िक्रिका व शुक्रिका व हुस्नि इबादतिक।

Hinglish-

Allahumma a’inni ala dhikrika wa shukrika wa husni ibadatik.

हिंदी मतलब-

ऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र, अपना शुक्र अदा करने और बेहतरीन तरीके से अपनी इबादत करने में मेरी मदद फ़रमा।

English Meaning-

O Allah! Help me to remember You, to thank You, and to worship You in the best manner.

हदीस का हवाला-

सुनन अबू दाऊद, हदीस 1522।

हज़रत मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने उनका हाथ पकड़कर फ़रमाया कि ऐ मुआज़! मैं तुमसे मुहब्बत करता हूं। फिर आपने उन्हें नसीहत फ़रमाई कि हर नमाज़ के बाद इस दुआ को पढ़ना कभी न छोड़ना।

यह हदीस सहीह है और शैख़ अल्बानी ने भी इसे सहीह क़रार दिया है।

3. नमाज़ के बाद की तस्बीह

नमाज़ के बाद अल्लाह तआला का ज़िक्र करना भी सुन्नत से साबित है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फ़र्ज़ नमाज़ के बाद कुछ ख़ास तस्बीहात पढ़ने की तालीम दी है।

पहली तस्बीह – सुब्हानअल्लाह

अरबी-

سُبْحَانَ اللّٰهِ

हिंदी-

सुब्हानल्लाह।

Hinglish-

SubhanAllah.

मतलब- अल्लाह हर ऐब और कमी से पाक है।

इसे 33 बार पढ़ें।

दूसरी तस्बीह- अल्हम्दुलिल्लाह

अरबी-

الْحَمْدُ لِلّٰهِ

हिंदी-

अल्हम्दुलिल्लाह।

Hinglish-

Alhamdulillah.

मतलब- तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं।

इसे 33 बार पढ़ें।

तीसरी तस्बीह- अल्लाहु अकबर

अरबी-

اللّٰهُ أَكْبَرُ

हिंदी-

अल्लाहु अकबर।

Hinglish-

Allahu Akbar.

मतलब- अल्लाह सबसे बड़ा है।

इसे 34 बार पढ़ें।

इस तरह कुल 100 बार अल्लाह का ज़िक्र पूरा होता है।

हदीस का हवाला-

सहीह मुस्लिम, हदीस 596a।

हज़रत कअब बिन उजरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फ़रमाया कि हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद 33 बार सुब्हानअल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह और 34 बार अल्लाहु अकबर पढ़ने वाले को नाकामी नहीं होगी।

4. नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी

आयतुल कुर्सी क़ुरआन मजीद की बहुत अज़ीम आयत है। यह सूरह अल-बक़रा की आयत नंबर 255 है।

हदीस में हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ने की फ़ज़ीलत बयान की गई है।

अरबी में शुरुआत-

اللّٰهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम।

Hinglish-

Allahu la ilaha illa huwal hayyul qayyum.

हिंदी मतलब-

अल्लाह, उसके सिवा कोई माबूद नहीं। वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और सारी कायनात को संभालने वाला है।

यह आयत पूरी पढ़ी जाती है। ऊपर केवल इसकी शुरुआत और मतलब दिया गया है। पूरी आयत सूरह अल-बक़रा 2:255 में मौजूद है।

हदीस का हवाला-

इमाम नसाई और इब्न हिब्बान ने हज़रत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु से यह रिवायत नक़्ल की है कि जो शख़्स हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता है, उसके जन्नत में दाख़िल होने के बीच मौत के सिवा कोई चीज़ रुकावट नहीं होती।

इस रिवायत को कई मुहद्दिसीन ने सहीह क़रार दिया है और इसके अलग-अलग तरीक़ों पर भी चर्चा की है।

5. नमाज़ के बाद सूरह इख़लास, फ़लक और नास

नमाज़ के बाद क़ुरआन की छोटी सूरतें पढ़ना भी मसनून अज़कार में शामिल है।

इन सूरतों को पढ़ने से इंसान अल्लाह की पनाह और हिफ़ाज़त मांगता है।

1. सूरह इख़लास

قُلْ هُوَ اللّٰهُ أَحَدٌ

हिंदी: कुल हुवल्लाहु अहद।

Hinglish: Qul Huwallahu Ahad.

2. सूरह फ़लक

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ

हिंदी: कुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक।

Hinglish: Qul A’uzu Bi Rabbil Falaq.

3. सूरह नास

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ

हिंदी: कुल अऊज़ु बिरब्बिन्नास।

Hinglish: Qul A’uzu Bi Rabbin Naas.

फ़ज्र और मग़रिब की नमाज़ के बाद इन तीनों सूरतों को तीन-तीन बार पढ़ने की रिवायत मिलती है, जबकि दूसरी फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद एक-एक बार पढ़ने का ज़िक्र है।

हदीस का हवाला-

सुनन अबू दाऊद, हदीस 1523 और सुनन तिर्मिज़ी, हदीस 2903।

नमाज़ के बाद दुआ पढ़ने का सही तरीक़ा

नमाज़ मुकम्मल होने के बाद आप इस तरह अज़कार पढ़ सकते हैं-

  1. नमाज़ का सलाम फेरने के बाद तीन बार अस्तग़फ़िरुल्लाह पढ़ें।
  2. अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु वाली दुआ पढ़ें।
  3. सुब्हानअल्लाह 33 बार पढ़ें।
  4. अल्हम्दुलिल्लाह 33 बार पढ़ें।
  5. अल्लाहु अकबर 34 बार पढ़ें।
  6. आयतुल कुर्सी पढ़ें।
  7. सूरह इख़लास, फ़लक और नास पढ़ें।
  8. अल्लाहुम्मा अइन्नी अला ज़िक्रिका वाली दुआ पढ़ें।

इसके बाद अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ अल्लाह सुब्हानवा तआला से दुआ मांग सकते हैं।

यह एक आसान अमली तरतीब है। सभी अज़कार को एक ही लाज़िमी क्रम में पढ़ना ज़रूरी नहीं है।

नमाज़ के बाद दुआ की फ़ज़ीलत

नमाज़ के बाद अल्लाह का ज़िक्र और दुआ करने के कई फ़ायदे हैं।

1. अल्लाह की याद में रहने का मौक़ा

नमाज़ के बाद ज़िक्र करने से इंसान अपनी इबादत को जारी रखता है और अल्लाह सुब्हानवा तआला को याद करता है।

2. गुनाहों की माफ़ी मांगना

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम का नमाज़ के बाद तीन बार इस्तिग़फ़ार करना हमें अपनी ग़लतियों पर अल्लाह से माफ़ी मांगने की तालीम देता है।

3. अल्लाह का शुक्र अदा करना

अल्हम्दुलिल्लाह पढ़कर इंसान अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करता है।

4. इबादत में बेहतरी

अल्लाहुम्मा अइन्नी अला ज़िक्रिका वाली दुआ के ज़रिए इंसान अल्लाह से बेहतर इबादत करने की तौफ़ीक़ मांगता है।

5. आख़िरत की कामयाबी

हदीस में नमाज़ के बाद के अज़कार की फ़ज़ीलत बयान हुई है। इसलिए इन अज़कार को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए।

क़ुरआन में नमाज़ के बाद ज़िक्र

क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला ने नमाज़ मुकम्मल करने के बाद भी अपना ज़िक्र करने की तालीम दी है।

सूरह अन-निसा, आयत 103-

فَإِذَا قَضَيْتُمُ الصَّلَاةَ فَاذْكُرُوا اللّٰهَ قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِكُمْ

हिंदी मतलब-

फिर जब तुम नमाज़ अदा कर चुको, तो खड़े, बैठे और अपने पहलुओं पर लेटे हुए अल्लाह को याद करो।

क़ुरआन का हवाला- सूरह अन-निसा (4:103)।

इस आयत में नमाज़ के बाद अल्लाह का ज़िक्र करने की अहमियत बताई गई है। हालांकि इसमें ऊपर बताई गई किसी ख़ास दुआ के शब्द निर्धारित नहीं किए गए हैं। उन दुआओं की तफ़सील हमें हदीस से मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. नमाज़ के बाद कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?

नमाज़ के बाद तीन बार अस्तग़फ़िरुल्लाह और फिर अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिंकस्सलामु वाली दुआ पढ़ना सुन्नत से साबित है। इसके अलावा अल्लाहुम्मा अइन्नी अला ज़िक्रिका वाली दुआ भी पढ़नी चाहिए।

2. क्या हर नमाज़ के बाद दुआ मांगना ज़रूरी है?

नमाज़ के बाद अज़कार और दुआ पढ़ना बहुत फ़ज़ीलत वाला अमल है, लेकिन हर बार कोई ख़ास लंबी दुआ पढ़ना फ़र्ज़ नहीं है। आप अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ भी अल्लाह से दुआ मांग सकते हैं।

3. नमाज़ के बाद कितनी बार सुब्हानअल्लाह पढ़ना चाहिए?

एक मशहूर सहीह हदीस के मुताबिक़ फ़र्ज़ नमाज़ के बाद सुब्हानअल्लाह 33 बार, अल्हम्दुलिल्लाह 33 बार और अल्लाहु अकबर 34 बार पढ़ना चाहिए।

4. क्या नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़नी चाहिए?

जी हां, हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ने की फ़ज़ीलत हदीस में बयान हुई है। इसे अपनी रोज़ाना की इबादत में शामिल करना अच्छा अमल है।

5. क्या नमाज़ के बाद हाथ उठाकर दुआ मांगना ज़रूरी है?

नहीं, नमाज़ के बाद हाथ उठाकर दुआ मांगना ज़रूरी नहीं है। नमाज़ के बाद मस्नून अज़कार पढ़ना सुन्नत से साबित है। हाथ उठाकर दुआ मांगने के मसले में उलमा के दरमियान अलग-अलग राय पाई जाती है।

नतीजा

नमाज़ के बाद अल्लाह सुब्हानवा तआला का ज़िक्र करना और उससे दुआ मांगना एक बहुत अच्छा अमल है। हमें चाहिए कि हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत के मुताबिक़ नमाज़ के बाद के अज़कार पढ़ें और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी, रहमत और बेहतर इबादत की तौफ़ीक़ मांगें।

अल्लाह सुब्हानवा तआला हम सभी को पाँचों वक़्त की नमाज़ पाबंदी से अदा करने और नमाज़ के बाद के मस्नून अज़कार पढ़ने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

वअल्लाहु आलम (और अल्लाह बेहतर जानता है)।

हदीस और क़ुरआन के हवाले

  1. सहीह मुस्लिम – हदीस 591: नमाज़ के बाद तीन बार इस्तिग़फ़ार और अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु।
  2. सहीह मुस्लिम – हदीस 596a: 33 बार सुब्हानअल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह और 34 बार अल्लाहु अकबर।
  3. सुनन अबू दाऊद – हदीस 1522: अल्लाहुम्मा अइन्नी अला ज़िक्रिका वाली दुआ।
  4. सूरह अन-निसा – 4:103: नमाज़ के बाद अल्लाह का ज़िक्र।
  5. आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत – सुनन अल-कुबरा लिन्नसाई और सहीह इब्न हिब्बान में हज़रत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत।

नोट- दुआ और हदीस के अरबी अल्फ़ाज़ की अदायगी में एहतियात करें। हिंदी और Hinglish में लिखे शब्द केवल पढ़ने में आसानी के लिए हैं। अरबी उच्चारण सीखने के लिए किसी क़ारी या जानकार से भी मदद लें।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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