ईशा की नमाज़ का तरीका : 17 रकात, हर दुआ और स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
ईशा की नमाज़ क्या है?
ईशा इस्लाम की पाँच फ़र्ज़ नमाज़ों में से पाँचवीं नमाज़ है। यह रात में अदा की जाती है। हर मुसलमान को नमाज़ की अहमियत समझनी चाहिए और अपनी नमाज़ सही तरीके से अदा करने की कोशिश करनी चाहिए।
अगर आप नमाज़ सीख रहे हैं और जानना चाहते हैं कि ईशा की नमाज़ कैसे पढ़ते हैं, तो इस लेख में आपको हर पोज़िशन, उसमें पढ़ी जाने वाली दुआ, अरबी अल्फ़ाज़ और हिंदी में पढ़ने का तरीका आसान भाषा में मिलेगा।
ईशा की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं?
आम तरीके के मुताबिक़ ईशा की नमाज़ में सुन्नत, फ़र्ज़, नफ़्ल और वित्र मिलाकर 17 रकात पढ़ी जाती हैं।
| नमाज़ | रकात | हुक्म |
|---|---|---|
| ईशा से पहले | 4 | सुन्नत ग़ैर मुअक्कदा |
| ईशा के फ़र्ज़ | 4 | फ़र्ज़ |
| ईशा के बाद | 2 | सुन्नत मुअक्कदा |
| नफ़्ल | 2 | नफ़्ल |
| वित्र | 3 | वाजिब |
| वित्र के बाद | 2 | नफ़्ल |
| कुल | 17 |
ध्यान दें- यह आम तौर पर पढ़ी जाने वाली रकात की गिनती है। फ़िक़्ही तरीकों में वित्र और कुछ सुन्नतों के हुक्म या रकात की गिनती अलग हो सकती है। अगर आपके पास कम वक़्त है, तो सबसे पहले चार रकात फ़र्ज़ की पाबंदी करें।
ईशा की नमाज़ का वक़्त
ईशा का वक़्त आम तौर पर शाम की शफ़क़ यानी सूरज डूबने के बाद पश्चिम में रहने वाली लालिमा या शाम की रोशनी ख़त्म होने पर शुरू होता है। सही वक़्त जगह और मौसम के मुताबिक़ बदलता है।
ईशा की नमाज़ का सही वक़्त जानने के लिए अपने शहर का भरोसेमंद नमाज़ टाइमटेबल देखें।
नमाज़ से पहले तैयारी
नमाज़ शुरू करने से पहले इन बातों का ख़याल रखें-
- वुज़ू करें और बदन, कपड़े तथा नमाज़ की जगह पाक रखें।
- सतर ढकें और क़िबला रुख़ खड़े हों।
- दिल में ईशा की नमाज़ की नीयत करें।
- नमाज़ के दौरान जल्दबाज़ी न करें और हर रुक्न इत्मीनान से अदा करें।
नीयत दिल के इरादे का नाम है। नीयत के लिए कोई ख़ास अरबी जुमला ज़ोर से बोलना ज़रूरी नहीं है।
ईशा की 4 रकात फ़र्ज़ का तरीका
यहाँ चार रकात फ़र्ज़ नमाज़ का आम तरीका बताया गया है। अकेले नमाज़ पढ़ते समय और जमाअत में इमाम के पीछे पढ़ते समय क़िरअत के कुछ मसाइल अलग हो सकते हैं।
पहली रकात
1. तकबीर-ए-तहरीमा
क़िबला रुख़ खड़े होकर हाथ उठाएँ और कहें-
अरबी-
اللَّهُ أَكْبَرُ
हिंदी में पढ़ें-
अल्लाहु अकबर
Hinglish-
Allahu Akbar
मतलब: अल्लाह सबसे बड़ा है।
इसके बाद हाथ बाँधकर सना पढ़ें।
2. सना
अरबी-
سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ
हिंदी में पढ़ें-
सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबारकस्मुका व तआला जद्दुका व ला इलाहा ग़ैरुक।
Hinglish-
Subhanakallahumma wa bihamdika wa tabarakasmuka wa ta’ala jadduka wa la ilaha ghairuk.
मतलब- ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है और तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।
3. तअव्वुज़ और तस्मिया
अरबी-
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
हिंदी में पढ़ें– अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम।
Hinglish– A’udhu billahi minash-shaytanir-rajim.
इसके बाद पढ़ें-
अरबी-
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी में पढ़ें– बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
Hinglish: Bismillahir-Rahmanir-Rahim.
मतलब– अल्लाह के नाम से शुरू, जो बहुत मेहरबान और निहायत रहम करने वाला है।
4. सूरह फ़ातिहा
अरबी-
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ
हिंदी में पढ़ें-
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।
अर्रहमानिर्रहीम।
मालिकि यौमिद्दीन।
इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन।
इहदिनस्सिरातल मुस्तक़ीम।
सिरातल्लज़ीना अनअम्ता अलैहिम, ग़ैरिल मग़दूबि अलैहिम व लद्दाल्लीन।
Hinglish-
Bismillahir-Rahmanir-Rahim.
Alhamdu lillahi Rabbil-‘alamin.
Ar-Rahmanir-Rahim.
Maliki yawmid-din.
Iyyaka na’budu wa iyyaka nasta’in.
Ihdinas-siratal-mustaqim.
Siratal-ladhina an’amta ‘alayhim, ghayril-maghdubi ‘alayhim wa lad-dallin.
इसके बाद आम तौर पर आमीन कहें।
सूरह फ़ातिहा के बाद “आमीन” कहना सुन्नत है।
अरबी– آمِينَ
हिंदी में पढ़ें- आ-मीन
Hinglish- Aameen
मतलब– ऐ अल्लाह! हमारी दुआ क़ुबूल फ़रमा।
ईशा की नमाज़ में:
-
अकेले नमाज़ पढ़ते समय- सूरह फ़ातिहा के बाद आमीन कहें, फिर दूसरी सूरह पढ़ें।
-
इमाम के पीछे जमाअत में- आमीन कहने का तरीका आवाज़ से या आहिस्ता पढ़ने के मामले में फ़िक़्ही तरीक़ों में अंतर है। आम हनफ़ी तरीके में आहिस्ता आमीन कही जाती है।
हदीस का हवाला- सहीह अल-बुख़ारी 780 और सहीह मुस्लिम 410 में सूरह फ़ातिहा के बाद आमीन कहने की फ़ज़ीलत का ज़िक्र मिलता है।
5. कोई दूसरी सूरह पढ़ें
सूरह फ़ातिहा के बाद क़ुरआन की कोई सूरह पढ़ें। उदाहरण के लिए सूरह इख़लास-
अरबी-
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ
اللَّهُ الصَّمَدُ
لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ
وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
हिंदी में पढ़ें-
क़ुल हुवल्लाहु अहद।
अल्लाहुस्समद।
लम यलिद व लम यूलद।
व लम यकुल्लहू कुफुवन अहद।
Hinglish-
Qul huwallahu ahad.
Allahus-samad.
Lam yalid wa lam yulad.
Wa lam yakun lahu kufuwan ahad.
6. रुकू
अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाएँ। पीठ को सीधा रखें और हाथ घुटनों पर रखें।
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
हिंदी में पढ़ें-
सुब्हाना रब्बियल अज़ीम।
Hinglish:
Subhana Rabbiyal-‘Azim.
इसे आम तौर पर तीन बार पढ़ा जाता है।
मतलब- मेरा अज़मत वाला रब हर ऐब से पाक है।
7. रुकू से उठना
रुकू से उठते हुए कहें-
अरबी-
سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ
हिंदी में पढ़ें- समिअल्लाहु लिमन हमिदह।
Hinglish- Sami’allahu liman hamidah.
सीधे खड़े होकर कहें-
अरबी-
رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ
हिंदी में पढ़ें– रब्बना व लकल हम्द।
Hinglish– Rabbana wa lakal-hamd.
8. पहला सज्दा
अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे में जाएँ। पेशानी और नाक ज़मीन पर रखें, हथेलियाँ ज़मीन पर हों और घुटने तथा पैर की उँगलियाँ भी ठीक तरह से टिकाएँ।
अरबी-
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَىٰ
हिंदी में पढ़ें-
सुब्हाना रब्बियल आला।
Hinglish-
Subhana Rabbiyal-A’la.
इसे आम तौर पर तीन बार पढ़ा जाता है।
मतलब– मेरा सबसे बुलंद रब हर ऐब से पाक है।
9. दोनों सज्दों के बीच बैठना
अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे से उठें और इत्मीनान से बैठें।
दोनों सज्दों के बीच क्या पढ़ें?
अरबी-
رَبِّ اغْفِرْ لِي
हिंदी में पढ़ें-
रब्बिग़फ़िर ली।
Hinglish-
Rabbighfir li.
मतलब- ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ फ़रमा।
हदीस का हवाला- सुनन अबू दाऊद, हदीस 874 में दोनों सज्दों के बीच रब्बिग़फ़िर ली कहने का ज़िक्र है।
फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए दूसरा सज्दा करें और उसमें भी 3 मर्तबा सुब्हाना रब्बियल आला पढ़ें।
इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएँ।
दूसरी रकात
10. क़िरअत
दूसरी रकात में बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़कर सूरह फ़ातिहा पढ़ें। फिर कोई दूसरी सूरह या क़ुरआन की कुछ आयतें पढ़ें।
इसके बाद पहली रकात की तरह रुकू, रुकू से उठना और दोनों सज्दे करें।
11. क़अदा-ए-ऊला
दूसरे सज्दे के बाद बैठ जाएँ और अत्तहिय्यात पढ़ें।
अरबी-
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ
السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ
السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
हिंदी में पढ़ें-
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबात।
अस्सलामु अलैका अय्युहन्नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुह।
अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन।
अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।
Hinglish-
At-tahiyyatu lillahi was-salawatu wat-tayyibat.
As-salamu ‘alayka ayyuhan-nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuh.
As-salamu ‘alayna wa ‘ala ‘ibadillahis-salihin.
Ashhadu alla ilaha illallah wa ashhadu anna Muhammadan ‘abduhu wa rasuluh.
अत्तहिय्यात का मतलब है कि तमाम इबादतें, पाकीज़ा बातें और अच्छी चीज़ें अल्लाह के लिए हैं और हम अल्लाह के नेक बंदों पर सलामती की दुआ करते हैं।
तर्जनी उँगली से इशारा कैसे करें?
- दायाँ हाथ दाईं जाँघ पर रखें और बायाँ हाथ बाईं जाँघ पर रखें।
- दाएँ हाथ की छोटी उँगली और उसके पास वाली उँगली को मोड़ें। अंगूठे और बीच वाली उँगली से हल्का छल्ला बनाएँ। यह हाथ रखने का एक मशहूर तरीका है।
- अत्तहिय्यात पढ़ते समय “अश्हदु अल्ला इलाहा” के अल्फ़ाज़ पर दाएँ हाथ की तर्जनी उँगली से इशारा करें।
- फिर उँगली की स्थिति के बारे में अपने फ़िक़्ह के मुताबिक़ अमल करें। हनफ़ी तरीके में आम तौर पर “ला इलाहा” पर उँगली उठाई जाती है और “इल्लल्लाह” पर नीचे की जाती है।
- इसके बाद अत्तहिय्यात पूरा करें।
12. तीसरी रकात के लिए खड़े हों
चार रकात फ़र्ज़ नमाज़ में अत्तहिय्यात के बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए तीसरी रकात के लिए खड़े हों।
तीसरी रकात
13. सूरह फ़ातिहा पढ़ें
आम तरीके में फ़र्ज़ नमाज़ की तीसरी रकात में सूरह फ़ातिहा पढ़ी जाती है। इसके बाद रुकू, रुकू से उठना और दोनों सज्दे करें।
चौथी रकात
14. आख़िरी रकात
चौथी रकात के लिए खड़े होकर सूरह फ़ातिहा पढ़ें। आम तरीके में फ़र्ज़ नमाज़ की तीसरी और चौथी रकात में फ़ातिहा के बाद दूसरी सूरह नहीं मिलाई जाती।
इसके बाद रुकू और दोनों सज्दे करें।
15. आख़िरी क़अदा
दोनों सज्दों के बाद बैठकर अत्तहिय्यात पढ़ें। फिर दुरूद इब्राहीम पढ़ें।
अरबी-
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
हिंदी में पढ़ें-
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिं व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।
अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिं व अला आलि मुहम्मद, कमा बारकता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद।
Hinglish-
Allahumma salli ‘ala Muhammadin wa ‘ala ali Muhammad, kama sallayta ‘ala Ibrahima wa ‘ala ali Ibrahim, innaka Hamidum Majid.
Allahumma barik ‘ala Muhammadin wa ‘ala ali Muhammad, kama barakta ‘ala Ibrahima wa ‘ala ali Ibrahim, innaka Hamidum Majid.
16. दुआ पढ़ें
दुरूद के बाद कोई मस्नून दुआ पढ़ सकते हैं। एक मशहूर क़ुरआनी दुआ यह है-
अरबी-
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
हिंदी में पढ़ें-
रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या हसनतं व फ़िल आख़िरति हसनतं व क़िना अज़ाबन्नार।
Hinglish-
Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina ‘adhaban-nar.
मतलब- ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे, आख़िरत में भी भलाई दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।
क़ुरआनी हवाला- सूरह अल-बक़रह, 2:201।
17. सलाम फेरें
पहले दाईं तरफ़ और फिर बाईं तरफ़ चेहरा फेरकर कहें-
अरबी-
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ
हिंदी में पढ़ें-
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह।
Hinglish-
Assalamu ‘alaykum wa rahmatullah.
इस तरह ईशा की चार रकात फ़र्ज़ नमाज़ पूरी हो जाती है।
ईशा की सुन्नत और नफ़्ल
चार रकात फ़र्ज़ के बाद आम हनफ़ी तरीके में दो रकात सुन्नत मुअक्कदा पढ़ी जाती हैं। इन दोनों रकात में हर रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह पढ़ी जाती है।
दो रकात नफ़्ल पढ़ने का तरीका भी इसी तरह है। दो रकात के बाद बैठकर अत्तहिय्यात, दुरूद और दुआ पढ़ें और सलाम फेरें।
ईशा से पहले की चार रकात सुन्नत ग़ैर मुअक्कदा हैं। इनके हुक्म और अमल की तफ़सील में फ़िक़्ही तरीकों के मुताबिक़ फ़र्क़ पाया जाता है।
वित्र की 3 रकात का तरीका
वित्र की तीन रकात वाजिब हैं। कुछ फ़िक़्ही तरीकों में वित्र को सुन्नत माना जाता है और उसे अदा करने के तरीकों में भी फ़र्क़ हो सकता है।
पहली और दूसरी रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद दूसरी सूरह पढ़ें। दूसरी रकात के बाद बैठकर अत्तहिय्यात पढ़ें और फिर तीसरी रकात के लिए खड़े हों।
तीसरी रकात में सूरह फ़ातिहा और कोई दूसरी सूरह पढ़ने के बाद तकबीर कहकर हाथ उठाएँ, फिर हाथ बाँधकर दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ें। इसके बाद रुकू और बाकी नमाज़ पूरी करें।
दुआ-ए-क़ुनूत
अरबी-
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ يَفْجُرُكَ
اللَّهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَلَكَ نُصَلِّي وَنَسْجُدُ وَإِلَيْكَ نَسْعَىٰ وَنَحْفِدُ وَنَرْجُو رَحْمَتَكَ وَنَخْشَىٰ عَذَابَكَ إِنَّ عَذَابَكَ بِالْكُفَّارِ مُلْحِقٌ
हिंदी में पढ़ें-
अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका व नस्तग़फिरुका व नुअमिनु बिका व नतवक्कलु अलैका व नुस्नी अलैकल ख़ैर, व नश्कुरुका व ला नक्फुरुका, व नख़्लउ व नतरुकु मय्यफजुरुक।
अल्लाहुम्मा इय्याका नअबुदु व लका नुसल्ली व नस्जुदु, व इलैका नसआ व नहफ़िदु, व नरजू रहमतका व नख़्शा अज़ाबका, इन्ना अज़ाबका बिल कुफ्फ़ारि मुल्हिक़।
Hinglish-
Allahumma inna nasta’inuka wa nastaghfiruka wa nu’minu bika wa natawakkalu ‘alayka wa nuthni ‘alaykal-khayr, wa nashkuruka wa la nakfuruka, wa nakhla’u wa natruku may-yafjuruk.
Allahumma iyyaka na’budu wa laka nusalli wa nasjudu, wa ilayka nas’a wa nahfidu, wa narju rahmataka wa nakhsha ‘adhabaka, inna ‘adhabaka bil-kuffari mulhiq.
मतलब- ऐ अल्लाह! हम तुझसे मदद माँगते हैं, तुझसे माफ़ी चाहते हैं, तुझ पर ईमान रखते हैं और तुझ ही पर भरोसा करते हैं। हम तेरी तारीफ़ करते हैं, तेरा शुक्र अदा करते हैं और तेरी नाफ़रमानी से बचते हैं। हम सिर्फ़ तेरी इबादत करते हैं और तेरी रहमत की उम्मीद रखते हैं।
ज़रूरी नोट- दुआ-ए-क़ुनूत के अल्फ़ाज़ के कुछ दूसरे मशहूर रूप भी हैं। दुआ इ क़ुनूत आर्टिकल यहां से पढ़े ।
नमाज़ के बारे में क़ुरआन और हदीस
क़ुरआन की आयत
अल्लाह सुब्हानवा तआला फरमाते है-
अरबी-
إِنَّ الصَّلَاةَ كَانَتْ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ كِتَابًا مَوْقُوتًا
हिंदी में पढ़ें-
इन्नस्सलाता कानत अलल मुमिनीन किताबम मौकूता।
Hinglish-
Innas-salata kanat ‘alal-mu’minina kitaban mawquta.
मतलब- बेशक नमाज़ ईमान वालों पर मुक़र्रर वक़्तों में फ़र्ज़ की गई है।
हवाला- सूरह अन-निसा, 4:103।
नमाज़ का तरीका
एक हदीस में नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने एक शख़्स को नमाज़ में इत्मीनान से रुकू, सीधे खड़े होने और सज्दा करने की तालीम दी। इससे मालूम होता है कि नमाज़ को जल्दबाज़ी के बजाय सुकून और सही तरीके से अदा करना चाहिए।
हवाला- सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 793।
हवाला – https://sunnah.com/bukhari/10
अत्तहिय्यात का हवाला
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने नमाज़ में पढ़े जाने वाले अत्तहिय्यात के अल्फ़ाज़ सिखाए।
हवाला – सहीह अल-बुख़ारी, हदीस 831।
हवाला – https://sunnah.com/bukhari/10
ईशा की नमाज़ की अहमियत
- पाँच वक़्त की नमाज़ इस्लाम की बुनियादी इबादतों में से है।
- नमाज़ बंदे को अल्लाह की याद और उसकी इताअत की तरफ़ लाती है।
- नमाज़ में क़िरअत, रुकू और सज्दे को इत्मीनान से अदा करना चाहिए।
- नमाज़ की दुआओं के अल्फ़ाज़ और उनके मतलब सीखने से ख़ुशू और ध्यान बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
किसी ख़ास रकात या दुआ के बारे में बिना सही हवाले के निश्चित सवाब का दावा नहीं करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. ईशा की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं?
आम तरीके में ईशा की नमाज़ की कुल गिनती 17 रकात बताई जाती है: 4 सुन्नत ग़ैर मुअक्कदा, 4 फ़र्ज़, 2 सुन्नत मुअक्कदा, 2 नफ़्ल, 3 वित्र और 2 नफ़्ल। इनमें चार रकात फ़र्ज़ हैं।
2. ईशा की नमाज़ में पहले क्या पढ़ते हैं?
नमाज़ शुरू करते समय अल्लाहु अकबर कहते हैं। इसके बाद सना, तअव्वुज़, तस्मिया, सूरह फ़ातिहा और कोई दूसरी सूरह पढ़ी जाती है। पहली रकात के बाद अगली रकातों में पढ़ने का तरीका अलग हो सकता है।
3. क्या ईशा की नमाज़ में चारों फ़र्ज़ रकात में सूरह फ़ातिहा पढ़ते हैं?
आम तरीके में चारों रकात में सूरह फ़ातिहा पढ़ी जाती है। पहली दो रकात में फ़ातिहा के बाद दूसरी सूरह भी पढ़ते हैं, जबकि तीसरी और चौथी फ़र्ज़ रकात में केवल फ़ातिहा पढ़ी जाती है।
4. क्या ईशा की नमाज़ के बाद वित्र पढ़ना ज़रूरी है?
वित्र वाजिब है। कुछ फ़िक़्ही तरीकों में इसे सुन्नत माना जाता है। इसलिए अपने फ़िक़्ह के मुताबिक़ वित्र की अहमियत और तरीका सीखें।
5. क्या ईशा की नमाज़ हिंदी में पढ़ सकते हैं?
नमाज़ में क़ुरआन की क़िरअत और निर्धारित अरबी अल्फ़ाज़ पढ़ना सीखें। हिंदी और Hinglish में लिखे उच्चारण सीखने में मदद के लिए हैं, लेकिन ये अरबी तिलावत का पूरा विकल्प नहीं हैं। सही मख़ारिज़ और उच्चारण के लिए किसी क़ारी या नमाज़ सिखाने वाले उस्ताद से सीखें।
आख़िरी बात
ईशा की नमाज़ को सही तरीके से सीखने के लिए पहले चार रकात फ़र्ज़ की हर पोज़िशन और उसमें पढ़े जाने वाले अल्फ़ाज़ याद करें। इसके बाद सुन्नत, नफ़्ल और वित्र का तरीका सीखें। नमाज़ में इत्मीनान रखें और अपने उच्चारण को बेहतर बनाने के लिए नियमित अभ्यास करें।
अल्लाह हमें नमाज़ की पाबंदी करने और उसे सही तरीके से अदा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
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