सवारी पर बैठने की दुआ (sawari par baithne ki dua) 5 Powerful बातें

सवारी पर बैठने की दुआ – अरबी, हिंदी और Hinglish के साथ

सवारी पर बैठने की दुआ

सवारी पर बैठने की दुआ पढ़ना नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की बताई हुई खूबसूरत सुन्नत है। जब हम कार, बस, ट्रेन या किसी दूसरी सवारी पर बैठते हैं, तो हमें अल्लाह की उस नेमत को याद करना चाहिए जिसने हमारे लिए सवारी को आसान बनाया।

 

यह दुआ हमें अल्लाह की कुदरत, उसकी नेमत और आखिरत में उसी की तरफ लौटने की याद दिलाती है।

सवारी पर बैठने की दुआ

अरबी-

سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ ۝ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ

हिंदी में पढ़ने का तरीका-

सुब्हानल्लज़ी सख़्ख़रा लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़्रिनीन। व इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून।

Hinglish-

Subhanalladhi sakhkhara lana hadha wa ma kunna lahu muqrinin. Wa inna ila Rabbina lamunqalibun.

हिंदी में मायने-

“पाक है वह ज़ात जिसने इस सवारी को हमारे लिए काबू में कर दिया, जबकि हम इसे काबू में करने की ताक़त नहीं रखते थे। और बेशक हमें अपने रब ही की तरफ लौटकर जाना है।”

English Meaning-

“Glory is to Him who has subjected this for us, while we were not capable of controlling it. And surely, to our Lord we will return.”

यह दुआ Quran की सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़ की आयत 13–14 में आई है।

सवारी की दुआ कब पढ़ें?

जब आप किसी सवारी पर बैठ जाएँ और ठीक से बैठने के बाद यह दुआ पढ़ सकते हैं।

यह सिर्फ पुराने ज़माने की ऊँट या घोड़े की सवारी तक महदूद नहीं है। आज के दौर में कार, बस और दूसरी सवारियों पर बैठते समय भी इस Qurani दुआ को पढ़ना एक अच्छा अमल है।

इस दुआ का असल मकसद सिर्फ सफर शुरू करना नहीं, बल्कि अल्लाह की नेमत को याद करना और उसका शुक्र अदा करना भी है।

सवारी पर बैठने की दुआ का क़ुरान में ज़िक्र

अल्लाह सुब्हानवा तआला सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़ में फरमाते है कि जब लोग सवारी पर ठीक से बैठ जाएँ तो अपने रब की नेमत को याद करें और कहें –

سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ

(सुब्हानल्लज़ी सख़्ख़रा लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़्रिनीन।)

इसके बाद फरमाया गया –

وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ

(व इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून।)

यानी इंसान को यह एहसास रखना चाहिए कि जिस तरह वह सफर पर निकलता है, उसी तरह एक दिन उसे अपने रब की तरफ भी लौटकर जाना है।

हवाला- सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़, 43:13–14

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम सवारी पर बैठते समय क्या पढ़ते थे?

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रदिअल्लाहुताला अन्हु से रिवायत है कि नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम  जब सफर के लिए अपनी सवारी पर बैठते तो तीन बार “अल्लाहु अकबर” कहते और फिर सवारी की यह दुआ पढ़ते थे।

इसके बाद आप सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम सफर के लिए भी दुआ करते थे कि अल्लाह इस सफर में नेकी और तक़वा अता करे, सफर को आसान करे और दूरी को कम कर दे।

हवाला –  जामिअ अत-तिर्मिज़ी 3447; रियाज़ुस-सालिहीन 972

सफर की पूरी दुआ

अगर आप लंबा सफर कर रहे हैं, तो सवारी वाली दुआ के बाद नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से साबित सफर की यह दुआ भी पढ़ सकते हैं:

اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَى، وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى، اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا، وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، اللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ، وَالْخَلِيفَةُ فِي الْأَهْلِ…

अल्लाहुम्मा इन्ना नस्अलुका फी सफ़रिना हाज़ल-बिर्रा वत्तक़वा, व मिनल-अमलि मा तरज़ा। अल्लाहुम्मा हव्विन अलैना सफ़रना हाज़ा, वत्वि अन्ना बु’दहू। अल्लाहुम्मा अन्तस-साहिबु फ़िस-सफ़रि, वल-ख़लीफ़तु फ़िल-अहलि।

इस दुआ में नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने अल्लाह से सफर में नेकी, तक़वा, पसंदीदा अमल, सफर में आसानी और घरवालों की हिफाज़त की दुआ सिखाई।

इस दुआ की खूबसूरती और फ़ज़ीलत

इस दुआ में कई अहम बातें जमा हो जाती हैं।

पहली- हम मानते हैं कि सवारी असल में अल्लाह की नेमत है।

दूसरी- इंसान अपनी ताक़त पर घमंड नहीं करता, बल्कि मानता है कि अल्लाह ने सवारी को उसके लिए आसान किया है।

तीसरी- इसमें अल्लाह की तस्बीह और उसका शुक्र शामिल है।

चौथी- “और हम अपने रब की तरफ लौटकर जाने वाले हैं” कहकर इंसान को आखिरत याद आती है।

इसलिए यह छोटी सी दुआ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ज़िक्र, शुक्र और आखिरत की याद को जोड़ देती है।

क्या यह दुआ सिर्फ सफर के समय पढ़नी है?

ये दुआ Qurani के हवाले से सवारी पर बैठने से जुडी है। नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से इसकी खास तौर पर सफर के लिए सवारी पर बैठते समय पढ़ने की रिवायत मिलती है।

इसलिए अगर आप सफर पर निकल रहे हैं तो इसे पढ़ना बहुत अच्छा अमल है। रोज़ाना कार में बैठते समय भी क़ुरान में आई इस दुआ को पढ़ना अल्लाह की नेमत याद करने का अच्छा ज़रिया है।

याद रखने का आसान तरीका

अगर पूरी सफर की दुआ याद न हो, तो कम से कम यह हिस्सा याद कर लें:

सुब्हानल्लज़ी सख़्ख़रा लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़्रिनीन। व इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून।

इसे सवारी पर बैठने के बाद पढ़ना आसान है और इसके अंदर बहुत गहरा मतलब है।

5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. सवारी पर बैठने की दुआ कौन सी है?

सवारी पर बैठने की मशहूर क़ुरानिक दुआ है –

سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ ۝ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ

यह सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़ 43:13–14 में है।

2. क्या कार में बैठते समय भी यह दुआ पढ़ सकते हैं?

जी हाँ। क़ुरान में सवारी पर बैठते समय अल्लाह की नेमत याद करने और यह दुआ पढ़ने का ज़िक्र है। आज की कार और दूसरी सवारियाँ भी इसी माने में शामिल हैं।

3. क्या सवारी की दुआ और सफर की दुआ अलग हैं?

जी हाँ। सवारी पर बैठने की दुआ छोटी क़ुरानिक दुआ है, जबकि सफर की दुआ में सफर की आसानी, नेकी, तक़वा और घरवालों की हिफाज़त जैसी दुआएँ भी शामिल हैं। नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से दोनों का ज़िक्र मिलता है।

4. क्या सवारी पर बैठते समय अल्लाहु अकबर भी कहना चाहिए?

सफर के लिए सवारी पर बैठते समय नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम  से तीन बार अल्लाहु अकबर कहना और फिर सवारी की दुआ पढ़ना रिवायत हुआ है।

5. इस दुआ का सबसे अहम पैग़ाम क्या है?

इस दुआ का एक बड़ा पैग़ाम यह है कि इंसान अपनी ताक़त पर घमंड न करे। सवारी और दूसरी नेमतें अल्लाह की तरफ से हैं और आखिरकार हर इंसान को अपने रब की तरफ लौटकर जाना है।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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