गिलाफ-ए-काबा कैसे बनता है? किस्वा तैयार होने के 7 अहम मराहिल

गिलाफ-ए-काबा कैसे बनता है? 

 

गिलाफ-ए-काबा कैसे बनता है?

 

 

 

 

 

ख़ाना-ए-काबा पर चढ़ाए जाने वाले गिलाफ को किस्वा कहा जाता है। काले रंग का यह गिलाफ सिर्फ़ एक कपड़ा नहीं, बल्कि बेहद बारीक कारीगरी, रेशम, कढ़ाई और इस्लामी ख़त्ताती का शानदार नमूना है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गिलाफ-ए-काबा कैसे तैयार होता है?

किस्वा को तैयार करने का पूरा अमल मक्का मुकर्रमा में मौजूद King Abdulaziz Complex for Holy Kaaba Kiswa में होता है। यहाँ आधुनिक मशीनों के साथ माहिर कारीगर किस्वा के अलग-अलग हिस्सों को तैयार करते हैं।

Official जानकारी के मुताबिक़ किस्वा की तैयारी 7 अहम मराहिल से होकर गुजरती है। इनमें पानी तैयार करने से लेकर रेशम की धुलाई और रंगाई, बुनाई, आयात और इस्लामी नक़्श की printing, सिलाई, सोने-चांदी की कढ़ाई और आख़िरी quality check शामिल है।

किस्वा कहाँ तैयार किया जाता है?

गिलाफ-ए-काबा की तैयारी मक्का मुकर्रमा के Umm Al-Joud इलाके में मौजूद King Abdulaziz Complex for Holy Kaaba Kiswa में की जाती है।

इस complex में किस्वा बनाने के लिए अलग-अलग महकमे हैं, जिनमें weaving, dyeing, printing, embroidery और sewing जैसे काम शामिल हैं।

यहाँ traditional craftsmanship के साथ modern technology का भी इस्तेमाल किया जाता है।

गिलाफ-ए-काबा कैसे बनता है? 7 अहम मराहिल

किस्वा की पूरी तैयारी को मौजूदा official जानकारी के मुताबिक़ 7 मुख्य मराहिल में समझा जा सकता है।

1. पानी तैयार करने का मरहला

किस्वा बनाने का पहला मरहला पानी को ख़ास standards के मुताबिक़ तैयार करना है।

इस पानी का इस्तेमाल रेशम को धोने और उसकी रंगाई के लिए किया जाता है। पानी की quality को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह आगे होने वाले washing और dyeing process के लिए मुनासिब हो।

यानी किस्वा की तैयारी सीधे कपड़े से शुरू नहीं होती, बल्कि उसके लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की तैयारी से अमल शुरू होता है।

2. रेशम की धुलाई और रंगाई

इसके बाद कच्चे रेशम को धोया जाता है और उसकी रंगाई की जाती है।

रेशम पर लगी protective wax layer को हटाया जाता है। इसके बाद बाहरी किस्वा के लिए रेशम को ख़ास काले रंग में रंगा जाता है।

Official जानकारी के मुताबिक़ बाहरी किस्वा काले रंग का होता है, जबकि अंदर इस्तेमाल होने वाले कुछ रेशमी कपड़ों के लिए हरे रंग का इस्तेमाल किया जाता है।

रंगाई के बाद रेशम को ख़ास dryers की मदद से सुखाया जाता है।

3. मशीन से रेशम की बुनाई

अब रेशम को बुनाई के मरहले में ले जाया जाता है।

इस stage में silk threads को तैयार करके उन्हें weaving machines में इस्तेमाल किया जाता है। किस्वा के लिए patterned और plain दोनों तरह के silk fabrics तैयार किए जाते हैं।

Official जानकारी के मुताबिक़ weaving के दौरान तैयार होने वाले warp beams में एक मीटर में 9,900 से ज़्यादा threads हो सकते हैं।

इसी stage में किस्वा के बाहरी कपड़े और उसके कुछ दूसरे हिस्सों के लिए इस्तेमाल होने वाला fabric तैयार किया जाता है।

4. कुरआनी आयात और इस्लामी नक़्श की printing

इसके बाद plain silk fabric पर कुरआनी आयात और इस्लामी decorations के designs तैयार किए जाते हैं।

इस काम के लिए silk-screen printing technique इस्तेमाल की जाती है।

इस stage में आयात, ख़त्ताती और दूसरे approved designs को बहुत सटीक तरीके से कपड़े पर mark किया जाता है, ताकि आगे होने वाली embroidery सही जगह पर की जा सके।

यानी printing का मक़सद सिर्फ़ सजावट करना नहीं होता, बल्कि आगे होने वाली कढ़ाई के लिए design को सही जगह पर तैयार करना भी होता है।

5. अलग-अलग हिस्सों को जोड़ना और सिलाई

अब किस्वा के अलग-अलग कपड़ों और हिस्सों को एक साथ जोड़ा जाता है।

इस stage में silk panels और दूसरे हिस्सों को सिलकर एक बड़े covering की शक्ल दी जाती है।

किस्वा के अंदर cotton lining भी इस्तेमाल होती है। 2026 की official जानकारी के मुताबिक़ assembly के दौरान सफेद cotton inner lining को तैयार करके embroidered silk panels के साथ जोड़ा जाता है।

किस्वा के बड़े panels को बहुत सटीक measurement के साथ जोड़ा जाता है ताकि चारों तरफ़ का covering सही आकार में तैयार हो सके।

6. सोने और चांदी के तारों से कढ़ाई

यह किस्वा की सबसे बारीक और दिलचस्प stages में से एक है।

कुरआनी आयात और इस्लामी designs को उभरी हुई शक्ल देने के लिए cotton threads से padding की जाती है। इसके ऊपर silver और gold-plated silver wires से embroidery की जाती है।

Official जानकारी के मुताबिक़ किस्वा में pure silver और gold-plated silver wires का इस्तेमाल होता है।

इस वजह से किस्वा पर मौजूद कुरआनी आयात और decorations देखने में उभरे हुए और बहुत नफ़ीस दिखाई देते हैं।

यह काम माहिर कारीगर बेहद एहतियात के साथ करते हैं, क्योंकि आयात और designs में छोटी-सी गलती भी पूरे काम के look को प्रभावित कर सकती है।

7. आख़िरी quality check

किस्वा तैयार होने के बाद उसका आख़िरी और बहुत अहम quality inspection किया जाता है।

इस stage में देखा जाता है कि इस्तेमाल किए गए materials, stitching, embroidery, designs और दूसरे हिस्से तय किए गए standards के मुताबिक़ हैं या नहीं।

हर हिस्सा सही जगह पर है या नहीं, embroidery में कोई कमी तो नहीं और पूरा covering तय specifications के मुताबिक़ तैयार हुआ है या नहीं — इन सब चीज़ों की जांच की जाती है।

Quality control पूरा होने के बाद किस्वा को ख़ाना-ए-काबा पर चढ़ाने के लिए तैयार किया जाता है।

किस्वा में कितना रेशम, चांदी और दूसरा सामान इस्तेमाल होता है?

Saudi Press Agency की जून 2026 की official जानकारी के मुताबिक़ एक किस्वा की तैयारी में लगभग-

  • 825 किलोग्राम कच्चा रेशम
  • 120 किलोग्राम gold-plated silver wire
  • 60 किलोग्राम pure silver
  • 410 किलोग्राम कच्चा cotton

इस्तेमाल होता है।

ये आंकड़े किस्वा की विशालता और उसकी तैयारी में लगने वाली मेहनत का अंदाज़ा देते हैं।

किस्वा पर कुरआनी आयात कैसे लिखी जाती हैं?

किस्वा पर कुरआनी आयात और इस्लामी designs को बेहद नफ़ासत के साथ तैयार किया जाता है।

पहले designs को silk fabric पर printing के ज़रिए mark किया जाता है। इसके बाद उन designs और आयात की embroidery की जाती है।

कुरआनी आयात को उभरा हुआ look देने के लिए cotton threads से padding की जाती है और उसके ऊपर silver तथा gold-plated silver wires से embroidery की जाती है।

2025 में 1447 AH के लिए तैयार की गई किस्वा के बारे में Saudi Press Agency ने बताया था कि उस पर 68 कुरआनी आयात थीं और gilded sections में silver threads plated with 24-karat gold का इस्तेमाल किया गया था।

एक किस्वा तैयार होने में कितना समय लगता है?

किस्वा की तैयारी कोई कुछ दिनों का काम नहीं है।

2025 की official जानकारी के मुताबिक़ 1447 AH की किस्वा की manufacturing में लगभग 11 महीने लगे थे।

इस दौरान रेशम की तैयारी, रंगाई, बुनाई, printing, embroidery, assembly और final inspection जैसे कई मराहिल पूरे किए जाते हैं।

किस्वा का रंग काला क्यों होता है?

आज हम ख़ाना-ए-काबा को काले किस्वा में देखते हैं और यही इसकी सबसे पहचान वाली निशानियों में से एक है।

मौजूदा किस्वा के लिए बाहरी silk fabric को काले रंग में dye किया जाता है।

हालांकि इस्लामी तारीख़ में काबा के covering के रंग हमेशा सिर्फ़ काले नहीं रहे। अलग-अलग दौर में किस्वा के रंग और material में बदलाव का ज़िक्र मिलता है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि किस्वा शुरू से ही हमेशा काले रंग का था।

किस्वा कब बदला जाता है?

मौजूदा official व्यवस्था के मुताबिक़ ख़ाना-ए-काबा की किस्वा को हर साल 1 मुहर्रम को नई किस्वा से बदला जाता है।

पुरानी किस्वा को हटाकर नई किस्वा के हिस्सों को ख़ाना-ए-काबा के चारों तरफ़ लगाया जाता है और फिर उसके हिस्सों को आपस में जोड़ा जाता है।

2025 में 1447 AH की नई किस्वा भी 1 मुहर्रम के मौके़ पर ख़ाना-ए-काबा पर चढ़ाई गई थी।

किस्वा का वज़न कितना होता है?

2025 में 1447 AH के लिए तैयार की गई नई किस्वा का कुल वज़न लगभग 1,415 किलोग्राम बताया गया था।

उस किस्वा में 47 embroidered black silk pieces शामिल थे और उस पर 68 कुरआनी आयात थीं।

यह आंकड़ा हर साल बिल्कुल एक जैसा होना ज़रूरी नहीं है, क्योंकि design, materials और production specifications में बदलाव हो सकते हैं।

किस्वा सिर्फ़ एक कपड़ा नहीं

गिलाफ-ए-काबा की तैयारी को देखें तो यह साफ़ होता है कि इसमें बहुत से अलग-अलग हुनर एक साथ शामिल होते हैं।

रेशम की तैयारी से लेकर रंगाई, weaving, printing, सिलाई, ख़त्ताती और सोने-चांदी की embroidery तक — हर मरहला बहुत एहतियात और नफ़ासत से पूरा किया जाता है।

इसी वजह से किस्वा को इस्लामी कला और craftsmanship की एक अहम मिसाल माना जाता है।

ख़ाना-ए-काबा के गिलाफ को तैयार करने का यह पूरा अमल मक्का मुकर्रमा में होने वाली उस मेहनत को सामने लाता है जो हर साल नई किस्वा को तैयार करने में लगती है।

एक नज़र में — किस्वा के 7 मराहिल

1. पानी तैयार करना → washing और dyeing के लिए पानी की तैयारी
2. धुलाई और रंगाई → रेशम की cleaning और black dyeing
3. बुनाई → silk fabric की automated weaving
4. Printing → कुरआनी आयात और Islamic designs की silk-screen printing
5. Assembly & Sewing → अलग-अलग हिस्सों और lining को जोड़ना
6. Embroidery → silver और gold-plated silver wires से कढ़ाई
7. Quality Control → तैयार किस्वा की आख़िरी जांच

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गिलाफ-ए-काबा को क्या कहा जाता है?

ख़ाना-ए-काबा के गिलाफ को किस्वा (Kiswah) कहा जाता है।

गिलाफ-ए-काबा कहाँ बनाया जाता है?

किस्वा की तैयारी मक्का मुकर्रमा में मौजूद King Abdulaziz Complex for Holy Kaaba Kiswa में की जाती है।

किस्वा कितने stages में बनता है?

मौजूदा official जानकारी के मुताबिक़ किस्वा की manufacturing 7 मुख्य stages में होती है।

किस्वा बनाने में कौन-सा कपड़ा इस्तेमाल होता है?

किस्वा के लिए मुख्य रूप से natural silk इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ cotton lining और embroidery के लिए silver तथा gold-plated silver wires का इस्तेमाल होता है।

किस्वा पर सोना कैसे लगाया जाता है?

किस्वा पर embroidery के लिए silver wires और gold-plated silver wires का इस्तेमाल किया जाता है। कुरआनी आयात और designs को पहले तैयार किया जाता है और फिर padding तथा embroidery के ज़रिए उभरा हुआ बनाया जाता है।

आख़िरी बात

किस्वा की तैयारी का पूरा अमल हमें यह दिखाता है कि ख़ाना-ए-काबा का गिलाफ कितनी नफ़ासत और मेहनत से तैयार किया जाता है।

रेशम की तैयारी से लेकर उसकी रंगाई, बुनाई, कुरआनी आयात की printing, सिलाई और सोने-चांदी की कढ़ाई तक हर मरहला अपनी जगह बहुत अहम है।

अल्लाह तआला हमें ख़ाना-ए-काबा की ज़ियारत नसीब फरमाए और अपने मुक़द्दस मक़ामात की मुहब्बत हमारे दिलों में क़ायम रखे। आमीन।

नोट: इस लेख में किस्वा की manufacturing से जुड़े आंकड़े और stages Saudi Press Agency तथा King Abdulaziz Complex से जारी की गई official जानकारी के आधार पर बताए गए हैं।

 

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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