Dua Hajat : 5 असरदार दुआएँ, अरबी, हिंदी और इंग्लिश में
दुआ-ए-हाजत क्या है?

दुआ-ए-हाजत का मतलब है अपनी ज़रूरत, परेशानी और दिल की मुराद पूरी होने के लिए अल्लाह सुब्हानवा तआला से दुआ माँगना। इस्लाम में बंदे को हर छोटी-बड़ी ज़रूरत के लिए अल्लाह से मदद माँगने की तालीम दी गई है।
इंसान को जब रोज़गार, कारोबार, शादी, औलाद, सेहत, घर-परिवार या किसी दूसरी परेशानी का सामना हो, तो उसे अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए। दुआ के साथ हलाल कोशिश करना, सब्र करना और अल्लाह पर भरोसा रखना भी ज़रूरी है।
दुआ-ए-हाजत के नाम से एक ख़ास दुआ मशहूर है। इससे जुड़ी हदीस की सनद पर उलमा ने कलाम किया है, इसलिए इसे यक़ीनी तौर पर सहीह हदीस से साबित दुआ कहना दुरुस्त नहीं। इस लेख में मशहूर दुआ के साथ कुरआन से साबित दुआएँ भी दी गई हैं।
1. दुआ-ए-हाजत अरबी में
दुआ-ए-हाजत के नाम से मशहूर दुआ के अल्फ़ाज़ ये हैं-
अरबी-
لَا إِلٰهَ إِلَّا اللَّهُ الْحَلِيمُ الْكَرِيمُ، سُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ، أَسْأَلُكَ مُوجِبَاتِ رَحْمَتِكَ، وَعَزَائِمَ مَغْفِرَتِكَ، وَالْغَنِيمَةَ مِنْ كُلِّ بِرٍّ، وَالسَّلَامَةَ مِنْ كُلِّ إِثْمٍ، لَا تَدَعْ لِي ذَنْبًا إِلَّا غَفَرْتَهُ، وَلَا هَمًّا إِلَّا فَرَّجْتَهُ، وَلَا حَاجَةً هِيَ لَكَ رِضًا إِلَّا قَضَيْتَهَا يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ
हिंदी में पढ़ने का तरीका-
ला इलाहा इल्लल्लाहुल हलीमुल करीम, सुब्हानल्लाहि रब्बिल अर्शिल अज़ीम, अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन। असअलुका मोजिबाति रहमतिका, व अज़ाइमा मग़फिरतिका, वल ग़नीमत मिन कुल्लि बिर्रिन, वस्सलामता मिन कुल्लि इस्मिन। ला तदअ ली ज़म्बन इल्ला ग़फरता, व ला हम्मन इल्ला फर्रज्ता, व ला हाजतन हिया लका रिज़न इल्ला क़ज़ैतहा, या अरहमर राहिमीन।
Hinglish-
La ilaha illallahul Haleemul Kareem, Subhanallahi Rabbil Arshil Azeem, Alhamdu lillahi Rabbil Aalameen. As’aluka mujibati rahmatika, wa azaima maghfiratika, wal ghaneemata min kulli birrin, was salamata min kulli ithmin. La tada’ li zanban illa ghafartahu, wa la hamman illa farrajtahu, wa la hajatan hiya laka ridan illa qadaytaha, ya Arhamar Rahimeen.
हिंदी मतलब-
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं। वह बहुत बुर्दबार और करम फ़रमाने वाला है। अज़मत वाले अर्श के रब अल्लाह की पाकी बयान करता हूँ। तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जो सारे जहानों का रब है।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी रहमत के ज़रिए और तेरी मग़फिरत के वसीलों से सवाल करता हूँ। हर नेकी में हिस्सा और हर गुनाह से सलामती माँगता हूँ। मेरा कोई गुनाह ऐसा न रहने दे जिसे तू माफ़ न फ़रमाए, कोई परेशानी ऐसी न रहने दे जिसे तू दूर न फ़रमाए और मेरी कोई ऐसी ज़रूरत, जिसमें तेरी रज़ा हो, अधूरी न रहने दे। ऐ सबसे ज़्यादा रहम फ़रमाने वाले!
English Meaning-
There is no deity worthy of worship except Allah, the Most Forbearing, the Most Generous. Glory be to Allah, the Lord of the Mighty Throne, and all praise belongs to Allah, the Lord of all worlds.
O Allah, I ask You for that which brings Your mercy, for Your forgiveness, for a share in every good deed, and for protection from every sin. Leave no sin of mine without forgiveness, no distress without relief, and no need that pleases You without granting it, O Most Merciful of those who show mercy.
ज़रूरी हदीस नोट- यह मशहूर दुआ जामे तिर्मिज़ी, हदीस 479 और सुनन इब्न माजा, हदीस 1384 के हवाले से बयान की जाती है; अलग-अलग संस्करणों में नंबर अलग हो सकता है। इसकी रिवायत को कई मुहद्दिसीन ने कमज़ोर, बल्कि बहुत कमज़ोर कहा है। इसलिए इसके खास अल्फ़ाज़ और तरीके को नबी ﷺ से यक़ीनी तौर पर साबित नहीं कहना चाहिए।
2. हाजत के लिए कुरआन की 4 दुआएँ
किसी ज़रूरत या परेशानी में अल्लाह से दुआ माँगने के लिए कुरआन की ये दुआएँ पढ़ी जा सकती हैं।
दुआ 1- हर तरह की भलाई के लिए
अरबी-
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
हिंदी में पढ़ें-
रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतं व फ़िल आख़िरति हसनतं व क़िना अज़ाबन्नार।
Hinglish-
Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina azaban-nar.
हिंदी मतलब- ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई अता फ़रमा, आख़िरत में भी भलाई अता फ़रमा और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।
English Meaning- Our Lord, grant us good in this world and good in the Hereafter, and protect us from the punishment of the Fire.
हवाला- सूरह अल-बक़रह, 2:201।
दुआ 2- अल्लाह की रहमत और मदद के लिए
अरबी-
رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنْزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ
हिंदी में पढ़ें-
रब्बि इन्नी लिमा अन्ज़ल्ता इलय्या मिन ख़ैरिन फ़क़ीर।
Hinglish-
Rabbi inni lima anzalta ilayya min khairin faqeer.
हिंदी मतलब- ऐ मेरे रब! तू जो भी भलाई मेरी तरफ़ नाज़िल फ़रमाए, मैं उसका मोहताज हूँ।
English Meaning- My Lord, I am truly in need of whatever good You may send down to me.
हवाला- सूरह अल-क़सस, 28:24। यह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की दुआ है।
दुआ 3- परेशानी में आसानी के लिए
अरबी-
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
हिंदी में पढ़ें-
ला इलाहा इल्ला अन्ता सुब्हानका इन्नी कुन्तु मिनज़्ज़ालिमीन।
Hinglish-
La ilaha illa anta subhanaka inni kuntu minaz-zalimeen.
हिंदी मतलब- तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तू पाक है। बेशक मुझसे ही कोताही हुई।
English Meaning- There is no deity except You; glory be to You. Indeed, I have been among the wrongdoers.
हवाला- सूरह अल-अंबिया, 21:87। यह हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम की दुआ है।
दुआ 4- काम में आसानी और बेहतर रास्ते के लिए
अरबी-
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي
हिंदी में पढ़ें-
रब्बिश्रह ली सद्री, व यस्सिर ली अम्री।
Hinglish-
Rabbishrah li sadri, wa yassir li amri.
हिंदी मतलब- ऐ मेरे रब! मेरा सीना खोल दे और मेरा काम मेरे लिए आसान फ़रमा दे।
English Meaning: My Lord, expand my chest and make my task easy for me.
हवाला- सूरह ताहा, 20:25–26। यह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की दुआ का हिस्सा है।
3. दुआ-ए-हाजत पढ़ने का सही तरीका
दुआ करने के लिए कोई एक खास लफ़्ज़ ही ज़रूरी नहीं। आप अपनी ज़रूरत अपनी ज़बान में भी अल्लाह के सामने बयान कर सकते हैं।
- अगर मुमकिन हो तो वुज़ू करके इत्मीनान से बैठें।
- अल्लाह की हम्द और तारीफ़ करें।
- नबी मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम पर दरूद भेजें।
- कुरआन की दुआएँ पढ़ें और अपनी ज़रूरत अल्लाह से बयान करें।
- हलाल रास्ता अपनाने, सब्र करने और अपनी कोशिश जारी रखने की तौफ़ीक़ माँगें।
- दुआ के बाद अल्लाह पर भरोसा रखें और जायज़ कोशिश करते रहें।
आप चाहें तो दो रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़कर भी दुआ कर सकते हैं। हालांकि, दुआ-ए-हाजत के लिए दो रकअत और उसके बाद एक ख़ास दुआ को नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से साबित सुन्नत मानने के बारे में उलमा के बीच इख़्तिलाफ़ है। इस खास तरीके को सहीह हदीस से साबित बताने में एहतियात करें।
4. दुआ-ए-हाजत की फ़ज़ीलत
दुआ की अहमियत कुरआन और सहीह सुन्नत से साबित है। अल्लाह से दुआ करना बंदे की आजिज़ी, उम्मीद और अपने रब पर भरोसे का इज़हार है।
- अल्लाह से मदद- मुश्किल वक़्त में बंदा अल्लाह से रहमत और मदद माँगता है।
- दिल को सुकून- दुआ इंसान को अपनी परेशानी अल्लाह के सामने रखने का मौका देती है।
- मग़फिरत की उम्मीद- बंदा अपने गुनाहों की माफ़ी माँग सकता है।
- दुनिया और आख़िरत की भलाई- कुरआन की दुआओं में दोनों जहानों की भलाई माँगी गई है।
- सब्र और तवक्कुल- दुआ के साथ जायज़ कोशिश और अल्लाह पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
यह दावा करना सही नहीं कि कोई एक दुआ पढ़ने से हर मुराद फ़ौरन पूरी होना तय है। अल्लाह से उम्मीद रखें, लेकिन दुआ को किसी गारंटी या तयशुदा नतीजे का ज़रिया न समझें।
5. दुआ-ए-हाजत के बारे में कुरआन और हदीस
कुरआन की आयत
अल्लाह सुब्हानवा तआला फरमाते है-
وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِي عَنِّي فَإِنِّي قَرِيبٌ ۖ أُجِيبُ دَعْوَةَ الدَّاعِ إِذَا دَعَانِ
हिंदी मतलब- और जब मेरे बंदे आपसे मेरे बारे में पूछें, तो बेशक मैं क़रीब हूँ। जब दुआ करने वाला मुझे पुकारता है, तो मैं उसकी दुआ का जवाब देता हूँ।
हवाला- सूरह अल-बक़रह, 2:186।
परेशानी में नमाज़ पढ़ना
हज़रत हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जब नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम को कोई परेशानी पेश आती, तो आप नमाज़ पढ़ते थे।
हवाला- सुनन अबू दाऊद, हदीस 1319 के रूप में प्रचलित नंबरिंग में; संस्करण के मुताबिक नंबर बदल सकता है।
इससे परेशानी में नमाज़ और अल्लाह की तरफ़ रुजू करने की अहमियत समझ आती है। लेकिन इससे दुआ-ए-हाजत की मशहूर रिवायत के सभी खास अल्फ़ाज़ और तरीके अपने आप सहीह साबित नहीं हो जाते।
दुआ-ए-हाजत की मशहूर रिवायत का दर्जा
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अबी औफ़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से दुआ-ए-हाजत के खास तरीके के बारे में रिवायत की गई है। यह जामे तिर्मिज़ी और सुनन इब्न माजा में मिलती है। इमाम तिर्मिज़ी ने इसकी सनद पर कलाम का ज़िक्र किया और इसमें फ़ाइद बिन अब्दुर्रहमान नाम के रावी को कमज़ोर बताया गया। कई दूसरे मुहद्दिसीन ने इसे बहुत कमज़ोर कहा है।
दूसरी तरफ़ कुछ उलमा ने ज़रूरत के लिए नफ़्ल नमाज़ पढ़ने और उसके बाद दुआ करने की गुंजाइश बयान की है। इसलिए बेहतर है कि आम दुआ और नमाज़ की साबित तालीमात पर अमल किया जाए और किसी कमज़ोर रिवायत को सहीह कहकर पेश न किया जाए।
6. दुआ-ए-हाजत कब माँगें?
आप दिन या रात में किसी भी वक़्त अल्लाह से दुआ कर सकते हैं। दुआ के लिए कोई एक तय समय ज़रूरी नहीं है।
- रात के आख़िरी हिस्से में।
- अज़ान और इक़ामत के बीच।
- फ़र्ज़ नमाज़ के बाद, अपनी दुआ के लिए मुनासिब तरीके से।
- परेशानी या मुश्किल के वक़्त।
- रोज़मर्रा की ज़रूरतों और अपने घर-परिवार की भलाई के लिए।
नफ़्ल नमाज़ के लिए मना किए गए समय का भी ख़याल रखें। अगर किसी खास समय या खास नमाज़ के बारे में शक हो, तो किसी भरोसेमंद आलिम से पूछें।
7. दुआ-ए-हाजत के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQs
1. दुआ-ए-हाजत क्या है?
दुआ-ए-हाजत वह दुआ है जिसमें इंसान अपनी ज़रूरत, परेशानी या जायज़ मुराद पूरी होने के लिए अल्लाह से मदद माँगता है।
2. क्या दुआ-ए-हाजत सहीह हदीस से साबित है?
दुआ-ए-हाजत के नाम से मशहूर खास दुआ और दो रकअत के तरीके वाली रिवायत को कई मुहद्दिसीन ने कमज़ोर या बहुत कमज़ोर कहा है। कुछ उलमा ने ज़रूरत के लिए नफ़्ल नमाज़ और दुआ की गुंजाइश बयान की है।
3. हाजत पूरी होने की दुआ कितनी बार पढ़ें?
कुरआन और सहीह हदीस से ऐसी कोई आम तादाद साबित नहीं कि हर ज़रूरत के लिए यही दुआ इतनी बार पढ़ना ज़रूरी हो। आप अपनी ज़रूरत के मुताबिक अल्लाह से बार-बार दुआ कर सकते हैं, लेकिन किसी गैर-साबित गिनती को लाज़िमी न समझें।
4. क्या दुआ-ए-हाजत से हर मुराद पूरी होती है?
दुआ इबादत है और अल्लाह अपने बंदों की दुआ सुनता है। मगर किसी खास दुआ से हर मुराद का फ़ौरन पूरा होना तय बताना सही नहीं। अल्लाह की हिकमत पर भरोसा रखें और जायज़ कोशिश जारी रखें।
5. हाजत के लिए कुरआन की कौन-सी दुआ पढ़ें?
आप “रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतं व फ़िल आख़िरति हसनतं व क़िना अज़ाबन्नार” (सूरह अल-बक़रह, 2:201) या “रब्बि इन्नी लिमा अन्ज़ल्ता इलय्या मिन ख़ैरिन फ़क़ीर” (सूरह अल-क़सस, 28:24) पढ़ सकते हैं। इनके साथ अपनी ज़रूरत भी अल्लाह के सामने बयान करें।
आख़िरी बात
दुआ-ए-हाजत का असल मक़सद अल्लाह से अपनी ज़रूरतों के लिए मदद माँगना है। अपनी मुराद के लिए दुआ करें, कुरआन की दुआओं को याद करें, नमाज़ की पाबंदी करें और हलाल कोशिश जारी रखें। दुआ के अल्फ़ाज़ से ज़्यादा अहम दिल की सच्चाई, अल्लाह पर भरोसा और उसकी रज़ा की तलब है।
अल्लाह सुब्हानवा तआला हमारी जायज़ हाजतों को पूरा फ़रमाए, हमारी परेशानियों को दूर करे और हमें दुनिया व आख़िरत की भलाई अता फ़रमाए। आमीन।
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