Masjid Mein Dakhil Hone Ki Dua: 5 ज़रूरी बातें और फ़ज़ीलत

Masjid Mein Dakhil Hone Ki Dua

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ

Masjid Mein Dakhil Hone Ki Dua

मस्जिद अल्लाह सुब्हानवा तआला की इबादत की जगह है। जब कोई मुसलमान नमाज़ पढ़ने, क़ुरआन की तिलावत करने या ज़िक्र करने के लिए मस्जिद में दाख़िल होता है, तो उसे अल्लाह सुब्हानवा  तआला को याद करना चाहिए और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत पर अमल करना चाहिए।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने मस्जिद में दाख़िल होते वक़्त अल्लाह तआला से उसकी रहमत के दरवाज़े खोलने की दुआ पढ़ना सिखाया है। इस दुआ के अल्फ़ाज़ छोटे हैं, लेकिन इसका मतलब बहुत ख़ूबसूरत है।

1. मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ अरबी में

दुआ-

اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ

2. मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ हिंदी में

हिंदी में पढ़ने का तरीक़ा-

अल्लाहुम्मफ़्तह ली अबवाबा रहमतिका।

3. Masjid Mein Dakhil Hone Ki Dua Hinglish Mein

Allahummaftah li abwaba rahmatik.

4. दुआ का हिंदी में मतलब

ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।

5. Dua Meaning in English

O Allah, open the gates of Your mercy for me.

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ की हदीस

हज़रत अबू हुमैद या हज़रत अबू उसैद अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब तुममें से कोई मस्जिद में दाख़िल हो, तो नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम पर सलाम भेजे और फिर यह दुआ पढ़े –

اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ

और जब मस्जिद से बाहर निकले, तो कहे –

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ

हदीस का हवाला-

  • सहीह मुस्लिम, हदीस नंबर 713।
  • सुनन अबू दाऊद, हदीस नंबर 465।
  • सुनन अन-नसाई, हदीस नंबर 729।

ये रिवायतें मस्जिद में दाख़िल होने और बाहर निकलने की दुआ के बारे में हैं। सहीह मुस्लिम की हदीस का विवरण और सुनन अबू दाऊद 465 देखें।

मस्जिद से निकलने की दुआ

मस्जिद से बाहर निकलते वक़्त भी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से दुआ पढ़ना साबित है।

अरबी-

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ

हिंदी में पढ़ने का तरीक़ा-

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका मिन फ़ज़्लिका।

Hinglish-

Allahumma inni as’aluka min fadlik.

हिंदी मतलब-

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल और नेमतों का सवाल करता हूँ।

English Meaning-

O Allah, I ask You for Your bounty.

हदीस का हवाला- सहीह मुस्लिम, हदीस नंबर 713; सुनन अबू दाऊद, हदीस नंबर 465।

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ की फ़ज़ीलत

1. अल्लाह की रहमत माँगना

इस दुआ में बंदा अल्लाह सुब्हानवा तआला से उसकी रहमत के दरवाज़े खोलने की गुज़ारिश करता है। मस्जिद में दाख़िल होकर नमाज़ और दूसरी इबादतों में मशग़ूल होने से पहले यह दुआ पढ़ना एक अच्छी सुन्नत है।

2. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सुन्नत पर अमल

इस दुआ को पढ़ने से मुसलमान रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की सिखाई हुई तालीम पर अमल करता है। इसकी अहमियत यही है कि यह दुआ हदीस से साबित है।

3. इबादत की तरफ़ दिल लगाना

दुआ के अल्फ़ाज़ इंसान को याद दिलाते हैं कि मस्जिद में वह अल्लाह तआला की रहमत और उसकी ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए आया है।

4. मस्जिद से निकलते वक़्त भी अल्लाह को याद करना

मस्जिद से बाहर निकलते वक़्त अल्लाह तआला के फ़ज़्ल की दुआ पढ़ना भी सुन्नत से साबित है। इससे बंदा इबादत के वक़्त और रोज़मर्रा की ज़िंदगी, दोनों में अल्लाह से मदद माँगता है।

ज़रूरी बात- इस ख़ास दुआ को पढ़ने पर किसी निश्चित संख्या में सवाब मिलने या हर परेशानी दूर होने का दावा तभी करना चाहिए, जब उसके लिए सहीह दलील मौजूद हो।

क़ुरआन में मस्जिद की अहमियत

क़ुरआन मजीद में मस्जिदों की अहमियत और उन्हें आबाद रखने वालों का ज़िक्र मिलता है।

अल्लाह सुब्हानवा तआला फरमाते है-

إِنَّمَا يَعْمُرُ مَسَاجِدَ اللَّهِ مَنْ آمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَأَقَامَ الصَّلَاةَ وَآتَى الزَّكَاةَ وَلَمْ يَخْشَ إِلَّا اللَّهَ

हवाला- सूरह अत-तौबा, 9:18।

मतलब- अल्लाह की मस्जिदों को वही लोग आबाद करते हैं जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखते हैं, नमाज़ क़ायम करते हैं, ज़कात देते हैं और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते।

इस आयत में मस्जिदों को आबाद रखने और इबादत करने वालों की अहमियत बयान हुई है। मस्जिद में दाख़िल होने की ख़ास दुआ के अल्फ़ाज़ हदीस से साबित हैं, क़ुरआन की इस आयत से नहीं। सूरह अत-तौबा 9:18

मस्जिद में दाख़िल होने के आदाब

मस्जिद में जाते वक़्त इन बातों का ख़याल रखें-

  • मस्जिद में दाख़िल होते वक़्त दुआ पढ़ें।
  • दाहिना पैर पहले रखने का आदाब अपनाएँ।
  • मस्जिद की सफ़ाई और पाकीज़गी का ख़याल रखें।
  • मस्जिद में ऊँची आवाज़ से दूसरों को परेशान न करें।
  • नमाज़ पढ़ने वालों के आगे से गुज़रने से बचें।
  • मस्जिद से निकलते वक़्त बाहर निकलने की दुआ पढ़ें।

दाहिना पैर पहले रखने का अमल मशहूर इस्लामी आदाब में शामिल है। इसे बयान करते वक़्त मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ वाली हदीस से अलग समझना चाहिए, क्योंकि दोनों की दलीलें एक जैसी नहीं हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ क्या है?

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ है-

اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ

हिंदी में- अल्लाहुम्मफ़्तह ली अबवाबा रहमतिका।

2. Masjid mein dakhil hone ki dua ka matlab kya hai?

इसका मतलब है- ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।

3. मस्जिद से निकलने की दुआ क्या है?

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ

हिंदी में- अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका मिन फ़ज़्लिका।

मतलब- ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल और नेमतों का सवाल करता हूँ।

4. मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ किस हदीस में है?

यह दुआ सहीह मुस्लिम, हदीस नंबर 713 और सुनन अबू दाऊद, हदीस नंबर 465 में मिलती है।

5. क्या मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ हर मस्जिद में पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, यह दुआ आम तौर पर मस्जिद में दाख़िल होते वक़्त पढ़ी जाती है। इसका मक़सद अल्लाह सुब्हानवा तआला से उसकी रहमत माँगना है।

ख़ुलासा

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ छोटी और आसानी से याद होने वाली दुआ है। इसे याद करें और मस्जिद में दाख़िल होते वक़्त पढ़ने की आदत बनाएँ। मस्जिद से निकलते वक़्त अल्लाह सुब्हानवा तआला से उसके फ़ज़्ल की दुआ पढ़ना भी न भूलें।

अल्लाह सुब्हानवा तआला हमें सहीह इल्म हासिल करने, सुन्नत पर अमल करने और अपनी इबादत को बेहतर बनाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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