Iftar Ki Dua: 2 आसान दुआएँ, सही हदीस और बड़ी फ़ज़ीलत

इफ़्तार की दुआ Iftar Ki Dua 

Iftar Ki Dua

इफ़्तार की दुआ

रमज़ान में रोज़ा रखने के बाद सूरज डूबने पर रोज़ा खोलने को इफ़्तार कहा जाता है। इफ़्तार के वक़्त अल्लाह तआला का शुक्र अदा करना, दुआ माँगना और सुन्नत के मुताबिक़ रोज़ा खोलना बहुत अहम है।

बहुत से लोग Google पर iftar ki dua, roza kholne ki dua और iftar dua in hindi सर्च करते हैं। इस लेख में आप इफ़्तार की दुआ अरबी, हिंदी में पढ़ने का तरीका और Hinglish में जानेंगे। साथ ही दोनों दुआओं का मतलब, हदीस का हवाला और इफ़्तार से जुड़ी ज़रूरी बातें भी पढ़ेंगे।

1. इफ़्तार की दुआ अरबी में (Iftar Ki Dua)

रोज़ा खोलने के बाद पढ़ी जाने वाली एक दुआ हदीस में इस तरह आई है-

अरबी दुआ-

ذَهَبَ الظَّمَأُ، وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ، وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

हिंदी में पढ़ें-

ज़हबज़-ज़मऊ, वबतल्लतिल-उरूक़ु, व सबतल-अज्रु, इन्शा अल्लाह।

Hinglish-

Dhahabaz-zama’u, wabtallatil-urooqu, wa thabatal-ajru, in sha Allah.

हिंदी मतलब-

प्यास चली गई, नसें तर हो गईं और अगर अल्लाह ने चाहा तो सवाब साबित हो गया।

English Meaning-

“The thirst has gone, the veins are moistened, and the reward is confirmed, if Allah wills.”

हदीस का हवाला- सुनन अबू दाऊद, हदीस 2357। इस रिवायत को कई हदीस विद्वानों ने सहीह या हसन दर्जे का माना है।

2. मशहूर इफ़्तार की दुआ

बहुत से मुसलमान रोज़ा खोलते वक़्त यह दुआ भी पढ़ते हैं।

अरबी दुआ-

اللَّهُمَّ لَكَ صُمْتُ وَعَلَىٰ رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ

हिंदी में पढ़ें-

अल्लाहुम्मा लका सुम्तु, व अला रिज़्क़िका अफ़्तरतु।

Hinglish-

Allahumma laka sumtu, wa ‘ala rizqika aftartu.

हिंदी मतलब-

ऐ अल्लाह! मैंने तेरी ख़ुशी के लिए रोज़ा रखा और तेरे दिए हुए रिज़्क़ से रोज़ा खोला।

English Meaning-

“O Allah, I fasted for Your sake and broke my fast with the provision You have given me.”

हदीस का हवाला- सुनन अबू दाऊद, हदीस 2358।

ज़रूरी बात- इस दुआ की रिवायत को कई मुहद्दिसीन ने ज़ईफ़ कहा है, क्योंकि इसकी सनद मुरसल है। कुछ आलिमों ने इसे अमल के लिए क़ाबिल-ए-क़ुबूल माना है। इसलिए इसे नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम से साबित सहीह दुआ कहकर पेश नहीं करना चाहिए। ऊपर दी गई पहली दुआ के लिए हदीस का हवाला ज़्यादा मज़बूत है।

3. इफ़्तार की दुआ कब पढ़ें?

इफ़्तार के वक़्त दुआ पढ़ने के साथ रोज़ा सही वक़्त पर खोलना भी ज़रूरी है।

  1. सूरज डूबने और मग़रिब का वक़्त होने की तस्दीक़ करें।
  2. खजूर या पानी से रोज़ा खोलें, अगर उपलब्ध हो।
  3. रोज़ा खोलने के बाद पहली दुआ पढ़ सकते हैं।
  4. अल्लाह तआला का शुक्र अदा करें और अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ माँगें।
  5. मग़रिब की नमाज़ वक़्त पर अदा करें।

हदीस में पहली दुआ के अल्फ़ाज़ रोज़ा खोलने के बाद कहे जाने की तरफ़ इशारा करते हैं। इसलिए इसे रोज़ा खोलने के बाद पढ़ना मुनासिब है।

4. इफ़्तार की दुआ की फ़ज़ीलत

इफ़्तार का वक़्त रोज़ेदार के लिए इबादत, शुक्र और दुआ का अहम मौक़ा है।

अल्लाह का शुक्र अदा करना

रोज़ा रखने वाला दिन भर खाने-पीने से रुका रहता है। इफ़्तार के वक़्त अल्लाह के दिए हुए रिज़्क़ की क़द्र करना और उसका शुक्र अदा करना चाहिए।

दुआ माँगने का मौक़ा

रमज़ान में अपने गुनाहों की माफ़ी, हिदायत, सेहत, हलाल रिज़्क़ और अपने घरवालों की ख़ैरियत के लिए दुआ करें।

रोज़े का सवाब

रोज़ा अल्लाह की इबादत है। इख़लास के साथ रोज़ा रखने और नेक अमल करने पर अल्लाह से सवाब की उम्मीद रखनी चाहिए।

सुन्नत के मुताबिक़ इफ़्तार

खजूर से रोज़ा खोलना बेहतर है। अगर खजूर न हो तो पानी से रोज़ा खोला जा सकता है।

ध्यान रहे कि किसी ख़ास दुआ के बारे में बग़ैर सही दलील के यह दावा नहीं करना चाहिए कि उसे पढ़ने से हर मुराद ज़रूर पूरी होगी।

5. इफ़्तार और क़ुरआन की आयत

क़ुरआन मजीद में अल्लाह तआला ने रोज़े का मक़सद और उसके कुछ अहकाम बयान फ़रमाए हैं।

सूरह अल-बक़रा, आयत 183

इस आयत में ईमान वालों पर रोज़े फ़र्ज़ किए जाने और तक़वा हासिल करने का ज़िक्र है।

सूरह अल-बक़रा, आयत 185

इस आयत में रमज़ान के महीने, क़ुरआन के नाज़िल होने और रोज़े से जुड़े अहकाम का बयान है।

सूरह अल-बक़रा, आयत 187

इस आयत में रोज़े की रातों में खाने-पीने की इजाज़त और सुबह सादिक़ से लेकर रात तक रोज़ा पूरा करने का हुक्म बयान हुआ है।

अहम वज़ाहत: क़ुरआन में इफ़्तार की किसी ख़ास दुआ के अल्फ़ाज़ इन आयतों में नहीं दिए गए हैं। ये आयतें रोज़े के अहकाम और उसकी अहमियत को समझाती हैं।

6. इफ़्तार के वक़्त अपनी दुआ कैसे करें?

इफ़्तार के वक़्त आप अल्लाह तआला से अपनी ज़रूरतों के लिए अपनी ज़बान में भी दुआ कर सकते हैं।

मिसाल के तौर पर:

“ऐ अल्लाह! मेरे रोज़े और इबादत को क़ुबूल फ़रमा। मेरे गुनाहों को माफ़ फ़रमा, मुझे सीधी राह दिखा, मेरे घरवालों को सलामती अता फ़रमा और मुझे हलाल रिज़्क़ अता फ़रमा। आमीन।”

इसके अलावा अपने वालिदैन, बीवी-बच्चों, रिश्तेदारों और तमाम परेशान हाल लोगों के लिए भी दुआ करें।

7. इफ़्तार की दुआ से जुड़े 5 सवाल (FAQ)

1. इफ़्तार की दुआ क्या है?

रोज़ा खोलने के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ है: “ज़हबज़-ज़मऊ, वबतल्लतिल-उरूक़ु, व सबतल-अज्रु, इन्शा अल्लाह।” यह सुनन अबू दाऊद, हदीस 2357 में रिवायत हुई है।

2. रोज़ा खोलने की दुआ हिंदी में क्या है?

हिंदी में पढ़ने का तरीका है: “ज़हबज़-ज़मऊ, वबतल्लतिल-उरूक़ु, व सबतल-अज्रु, इन्शा अल्लाह।”

3. क्या “अल्लाहुम्मा लका सुम्तु” सहीह हदीस से साबित है?

यह दुआ सुनन अबू दाऊद, हदीस 2358 में रिवायत हुई है। लेकिन कई मुहद्दिसीन ने इसकी सनद को ज़ईफ़ कहा है। इसलिए इसकी हैसियत बताते वक़्त एहतियात ज़रूरी है।

4. इफ़्तार की दुआ रोज़ा खोलने से पहले पढ़ें या बाद में?

सुनन अबू दाऊद की रिवायत में दुआ रोज़ा खोलने के वक़्त बयान हुई है और उसके अल्फ़ाज़ प्यास मिटने का ज़िक्र करते हैं। इसलिए इसे रोज़ा खोलने के बाद पढ़ना मुनासिब है। इफ़्तार से पहले भी अल्लाह से अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ कर सकते हैं।

5. क्या इफ़्तार के वक़्त हर दुआ क़ुबूल होती है?

रोज़ेदार की दुआ की फ़ज़ीलत में रिवायतें मिलती हैं, लेकिन उनकी सनद और दर्जे के बारे में विद्वानों के बीच चर्चा है। इसलिए यह कहना सही नहीं कि हर दुआ उसी वक़्त और उसी शक्ल में ज़रूर क़ुबूल होगी। अल्लाह से उम्मीद रखें और लगातार दुआ करते रहें।

नतीजा

इफ़्तार के वक़्त अल्लाह तआला का शुक्र अदा करें, सुन्नत के मुताबिक़ रोज़ा खोलें और अपनी ज़रूरतों के लिए दुआ करें। रोज़ा खोलने के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ “ज़हबज़-ज़मऊ…” सुनन अबू दाऊद की हदीस 2357 में आई है। मशहूर दुआ “अल्लाहुम्मा लका सुम्तु…” भी रिवायत हुई है, लेकिन उसकी सनद को कई मुहद्दिसीन ने ज़ईफ़ कहा है।

अल्लाह सुब्हानवताला हमारे रोज़े, नमाज़ और तमाम नेक आमाल क़ुबूल फ़रमाए। आमीन।

जज़ाकल्लाह खैर। अल्लाह सुब्हानवताला इस कोशिश में हुई छोटी बड़ी गलती को माफ़ करे  – आमीन ।

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