ख़ुत्बा अल हजाह क्या है? ( Khutbatul Hajah Juma khutba Hindi )

ख़ुत्बा अल हजाह “خطبۃ الحاجہ” (Khutbat al-Haajah) यानी ज़रूरत का खाश ख़ुत्बा एक मुक़द्दस और ब-बरकत शुरुआत है, जिसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम अपनी तक़रीर, निकाह, जुमा ख़ुत्बा या किसी अहम एलान से पहले पढ़ा करते थे।
इस ख़ुत्बे का मक़सद अल्लाह की हम्द-ओ-सना (तारीफ़), मदद की दरख़्वास्त और अपने आमाल की इस्लाह करना होता है। इसमें अल्लाह से पनाह माँगी जाती है – अपने नफ़्स की बुराई और गुनाहों के असर से। साथ ही तौहीद (एक अल्लाह की इबादत) और रिसालत (हुज़ूर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम की नबूवत) की गवाही दी जाती है।
ये ख़ुत्बा, सुनने वाले को अल्लाह की याद और तौहीद की बुनियाद पर तैयार करता है ताकि कोई भी अमल या एलान ख़ालिस अल्लाह के लिए हो।
ख़ुत्बा अल हजाह की शुरुआत ( Khutbatul Hajah Juma khutba Hindi )
ख़ुत्बा अल हजाह “خطبۃ الحاجہ” (Khutbat al-Haajah) की शुरुआत हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने फ़रमाई।
हदीस की किताबों जैसे सहीह मुस्लिम, अबू दाऊद, निसाई, वग़ैरह में कई सहाबा (जैसे हज़रत इब्ने मसऊद रज़ि. और हज़रत जाबिर रज़ि.) से रिवायत है कि हुज़ूर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम तक़रीबन हर अहम तक़रीर या निकाह से पहले ये ख़ुत्बा पढ़ते थे।
बड़े-बड़े उलमा जैसे इमाम नववी, इब्न तैमिय्या और इब्न अल-क़य्यिम ने इस ख़ुत्बे की अहमियत पर ज़ोर दिया है और इसे तक़रीर की सही और बरकत भरी शुरुआत बताया है।आज भी बहुत से इस्लामी स्कॉलर, इमाम और निकाह-ख़्वां इसी ख़ुत्बे से शुरुआत करते हैं ताकि अल्लाह की रहमत और हिदायत साथ हो।
ख़ुत्बा अल हजाह के 2 वाक़्यात
1. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम ने सबसे पहले दीन की दावत के लिए , बनी हाशिम यानि आपके रिस्तेदारो को खाने पर बुलाया था , अबू लहब की साजिश और लोगो को जाने से रोकने के लिए आपने खुत्बातुल हजाह का कलाम शुरू किया । आपके मुबारक लबों से ये खुत्बा सुन्ना , इतना असरदार था की अरब के कबीलो की बड़ी तादात , इसे सुनकर ही दीन में शामिल हुई। यही वजह थी , मक्का के क़ुरैश इसे कोई खाश जादू समझते थे , आज इसे जुमा के खुत्बा में पढ़ा जाता है ।
2. हज़रते दिमाद अल अज़दी रदिअल्लाहु ताला अन्हो , जब मक्का की उस हस्ती को देखने निकले , जिन्हे क़ुरैश जादूगर पुकार रहे थे । तोह आपको बताया गया कि आप अपने कानो में रुई दाल कर जाएँ। मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलय्हि वसल्लम के कलाम में जादू है । पहले तो आप घबरा गए पर आलिम और हकीम होने की वजह से रुई निकाल कर इमाम उल अम्बिया के दीदार किये । पर जब खुत्बा तुल हजाह सुना तोह सच पर लब्बैक कहा। और बिना वक़्त गवाए , दीन कुबूल कर लिया ।
ख़ुत्बा अल हजाह अरबी में
إِنَّ الْحَمْدَ لِلَّهِ، نَحْمَدُهُ، وَنَسْتَعِينُهُ، وَنَسْتَغْفِرُهُ،
وَنَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ شُرُورِ أَنْفُسِنَا وَمِنْ سَيِّئَاتِ أَعْمَالِنَا،
مَنْ يَهْدِهِ اللَّهُ فَلَا مُضِلَّ لَهُ، وَمَنْ يُضْلِلْ فَلَا هَادِيَ لَهُ،
وَأَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ،
وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ۔
ख़ुत्बा अल हजाह हिंदी में
इन्नल-हम्द लिल्लाह, नहमदुहू, व नस्तईनुहू, व नस्तग़फिरुहू,
व नऊज़ु बिल्लाहि मिं शुรูरी अंफुसिना व मिं सैय्यिआति आ’मालिना।
मन यहदिहिल्लाहु फ़ला मुदिल्ल लह, व मन युद्लिल फ़ला हादी लह।
व अशहदु अल्ला इलााहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीक लह।
व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।
ख़ुत्बा अल हजाह इंग्लिश में
Innal-hamda lillaah, nahmaduhu, wa nasta’eenuhu, wa nastaghfiruhu,
wa na’oodhu billaahi min shuroori anfusinaa wa min sayyi’ati a’maalinaa.
Man yahdihillaahu falaa mudhilla lah, wa man yudhlil falaa haadiya lah.
Wa ash-hadu an laa ilaaha illallaah, wahdahu laa shareeka lah.
Wa ash-hadu anna Muhammadan ‘abduhoo wa rasooluh.
ख़ुत्बा अल हजाह इंग्लिश तर्जुमा
Verily, all praise is for Allah. We praise Him, seek His help, and ask His forgiveness.
We seek refuge in Allah from the evils of ourselves and the bad consequences of our deeds.
Whomever Allah guides, none can misguide; and whomever He misguides, none can guide.
I bear witness that there is no god but Allah, alone, without partners.
And I bear witness that Muhammad is His servant and Messenger.
ख़ुत्बा अल हजाह से जुड़े 5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. ख़ुत्बा अल हजाह क्या है और इसे क्यों पढ़ा जाता है?
ख़ुत्बा अल हजाह एक मस्नून ख़ुत्बा है, जिसमें अल्लाह तआला की हम्द-ओ-सना, उससे मदद और मग़फ़िरत की दरख़्वास्त, और तौहीद व रिसालत की गवाही दी जाती है। इसे निकाह, दीन की तक़रीर और दूसरी अहम बातों की शुरुआत में पढ़ा जाता है। इसकी तालीम हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत हदीस में मिलती है।
2. क्या जुमे के ख़ुत्बे में ख़ुत्बा अल हजाह पढ़ना ज़रूरी है?
ख़ुत्बा अल हजाह के इन्हीं अल्फ़ाज़ को जुमे के ख़ुत्बे में पढ़ना ज़रूरी होने की कोई आम सहमति नहीं है। इमाम को अल्लाह की हम्द-ओ-सना और दीन की नसीहत के साथ ख़ुत्बा देना चाहिए। ख़ुत्बा अल हजाह पढ़ना एक मस्नून तरीक़ा है, लेकिन इसे जुमे के ख़ुत्बे की शर्त नहीं समझना चाहिए।
3. क्या ख़ुत्बा अल हजाह निकाह से पहले भी पढ़ा जाता है?
जी हाँ, ख़ुत्बा अल हजाह निकाह से पहले भी पढ़ा जाता है। हदीस में निकाह और दूसरी अहम बातों के मौक़े पर इसे पढ़ने का ज़िक्र मिलता है। इसमें अल्लाह की तारीफ़, उससे मदद माँगने और तक़वा इख़्तियार करने की तालीम दी जाती है।
4. ख़ुत्बा अल हजाह की हदीस किस किताब में मिलती है?
ख़ुत्बा अल हजाह की मशहूर रिवायत सुनन अबू दाऊद (हदीस 2118), जामे तिर्मिज़ी (हदीस 1105) और सुनन नसाई (हदीस 3277) में मिलती है। हदीस नंबर अलग-अलग नुस्ख़ों और वेबसाइटों पर कुछ फ़र्क़ के साथ मिल सकते हैं। इसलिए हदीस का हवाला देते वक़्त किताब और रिवायत के अल्फ़ाज़ की भी जाँच करनी चाहिए।
5. क्या ख़ुत्बा अल हजाह हिंदी या इंग्लिश में पढ़ सकते हैं?
ख़ुत्बा अल हजाह के अरबी अल्फ़ाज़ को सही तरह सीखकर अरबी में पढ़ना बेहतर है। हिंदी या इंग्लिश में लिखी हुई तलफ़्फ़ुज़ की मदद से इसे सीख सकते हैं, लेकिन transliteration अरबी का पूरा विकल्प नहीं है। जुमे या निकाह के ख़ुत्बे में दूसरी भाषा के इस्तेमाल और ज़रूरी अरकान के बारे में अपने मस्लक के भरोसेमंद आलिम से रहनुमाई लेना बेहतर है।
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